कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४६ / १६३ № 46 of 163 रचना ४६ / १६३
८ दिसम्बर २०१३ 8 December 2013 ८ दिसम्बर २०१३

नया ज़माना nayaa zamaanaa नया ज़माना

पत्र पत्रिका हुए पुरानेविश्वजाल पर छाना है। नई सोच के नए नज़ारे आया नया ज़माना है। सीढ़ी सरक गई साइड मेंलिफ्ट लपक ली खड़े खड़े। चले सैर को संग पालतू रिश्ते नाते हुए परे। गाँव दौड़कर शहर आ गएशहर चाँद पर जाना है। जीन्स पहनकर चले अकड़ से धूल धरा, धोती कुर्ता। पिज्जा, बर्गर अहा स्वाद क्या!दूर हुआ बैंगन भुरता। चौपाटी बन गई फेसबुकचाट चैट की खाना है। ट्राफिक जाम

patr patrikaa hue puraanewishvajaal par chaanaa hai naee soch ke nae nazaare aayaa nayaa zamaanaa hai seeढ़ee sarak gaee saaid menlipht lapak lee khade khade chale sair ko sang paalatoo rishte naate hue pare gaanv daudakar shahar aa gaeshahar chaand par jaanaa hai jeens pahanakar chale akad se dhool dharaa, dhotee kurtaa pijjaa, bargar ahaa svaad kyaa!door huaa baingan bhurataa chaupaatee ban gaee phesabukachaat chait kee khaanaa hai traaphik jaam

पत्र पत्रिका हुए पुरानेविश्वजाल पर छाना है। नई सोच के नए नज़ारे आया नया ज़माना है। सीढ़ी सरक गई साइड मेंलिफ्ट लपक ली खड़े खड़े। चले सैर को संग पालतू रिश्ते नाते हुए परे। गाँव दौड़कर शहर आ गएशहर चाँद पर जाना है। जीन्स पहनकर चले अकड़ से धूल धरा, धोती कुर्ता। पिज्जा, बर्गर अहा स्वाद क्या!दूर हुआ बैंगन भुरता। चौपाटी बन गई फेसबुकचाट चैट की खाना है। ट्राफिक जाम

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗