कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७७ / १६४ № 77 of 164 रचना ७७ / १६४
६ सितम्बर २०१४ 6 September 2014 ६ सितम्बर २०१४

आओ मित्रों पेड़ बचाएँ aao mitron ped bachaaen आओ मित्रों पेड़ बचाएँ

वन-वन को अतिक्रमण खा रहा

॥

फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।

॥

है उदास,

सहमा सा मौसम

॥

आओ मित्रों पेड़

॥

बचाएँ।

॥

काँप रहे हैं बरगद पीपल

॥

अमलतास का टूटा है बल।

॥

गुलमोहर की बाहें बेदम

॥

होकर ढूँढ रही हैं संबल।

॥

हम इनको दुलराएँ चलकर

॥

आँसू पोंछें धैर्य

॥

बँधाएँ।

॥

करें इस तरह कुछ तैयारी

॥

पास न पहुँचे इनके आरी।

॥

कातिल नज़र पड़े जो इनपर

॥

बन जाएँ तलवार दुधारी।

wan-wan ko atikraman khaa rahaa

·

phail raheen wishayukt hawaaen

·

hai udaas,

sahamaa saa mausam

·

aao mitron ped

·

bachaaen

·

kaanp rahe hain baragad peepal

·

amalataas kaa tootaa hai bal

·

gulamohar kee baahen bedam

·

hokar dhoondh rahee hain sanbal

·

ham inako dularaaen chalakar

·

aansoo ponchen dhairy

·

bandhaaen

·

karen is tarah kuch taiyaaree

·

paas n pahunche inake aaree

·

kaatil nazar pade jo inapar

·

ban jaaen talawaar dudhaaree

वन-वन को अतिक्रमण खा रहा

॥

फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।

॥

है उदास,

सहमा सा मौसम

॥

आओ मित्रों पेड़

॥

बचाएँ।

॥

काँप रहे हैं बरगद पीपल

॥

अमलतास का टूटा है बल।

॥

गुलमोहर की बाहें बेदम

॥

होकर ढूँढ रही हैं संबल।

॥

हम इनको दुलराएँ चलकर

॥

आँसू पोंछें धैर्य

॥

बँधाएँ।

॥

करें इस तरह कुछ तैयारी

॥

पास न पहुँचे इनके आरी।

॥

कातिल नज़र पड़े जो इनपर

॥

बन जाएँ तलवार दुधारी।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗