शाम ढल जाने के बाद shaam dhal jaane ke baad शाम ढल जाने के बाद
दृग
खुले रखना किसी से, प्रीत पल जाने के बाद।
जग
नहीं देता सहारा, पग फिसल जाने के बाद।
चार
होते ही नयन, कर लो हजारों कोशिशें
त्राण
है मुश्किल, नज़र का बाण चल जाने के बाद।
बाँध
लो प्रेमिल पलों को, ज़िंदगी भर के लिए।
फिर
नहीं आता वही मौसम, निकल जाने के बाद।
प्यार तो होता खरा, पर खार करता है जहाँ
इसलिए मिलते हैं दो दिल, शाम ढल जाने के बाद।
सब्र
से सींचो हृदय में, प्रेम रूपी बीज को
ख़ुशबुएँ
देता रहेगा, फूल-फल जाने के बाद।
प्रेम
के अतिरेक का,
कैसा मिला है फल उसे
जान
पाता है कहाँ,
परवाना जल जाने के बाद।
क्यों
डरें हम “कल्पना” जब मीत हर-दम साथ है
हाथ यह छूटेगा अब तो, दम निकल जाने के बाद।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
driig
khule rakhanaa kisee se, preet pal jaane ke baad
jag
naheen detaa sahaaraa, pag phisal jaane ke baad
chaar
hote hee nayan, kar lo hajaaron koshishen
traan
hai mushkil, nazar kaa baan chal jaane ke baad
baandh
lo premil palon ko, zindagee bhar ke lie
phir
naheen aataa wahee mausam, nikal jaane ke baad
pyaar to hotaa kharaa, par khaar karataa hai jahaan
isalie milate hain do dil, shaam dhal jaane ke baad
sabr
se seencho hriiday men, prem roopee beej ko
kushabuen
detaa rahegaa, phool-phal jaane ke baad
prem
ke atirek kaa,
kaisaa milaa hai phal use
jaan
paataa hai kahaan,
parawaanaa jal jaane ke baad
kyon
daren ham “kalpanaa” jab meet har-dam saath hai
haath yah chootegaa ab to, dam nikal jaane ke baad
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
दृग
खुले रखना किसी से, प्रीत पल जाने के बाद।
जग
नहीं देता सहारा, पग फिसल जाने के बाद।
चार
होते ही नयन, कर लो हजारों कोशिशें
त्राण
है मुश्किल, नज़र का बाण चल जाने के बाद।
बाँध
लो प्रेमिल पलों को, ज़िंदगी भर के लिए।
फिर
नहीं आता वही मौसम, निकल जाने के बाद।
प्यार तो होता खरा, पर खार करता है जहाँ
इसलिए मिलते हैं दो दिल, शाम ढल जाने के बाद।
सब्र
से सींचो हृदय में, प्रेम रूपी बीज को
ख़ुशबुएँ
देता रहेगा, फूल-फल जाने के बाद।
प्रेम
के अतिरेक का,
कैसा मिला है फल उसे
जान
पाता है कहाँ,
परवाना जल जाने के बाद।
क्यों
डरें हम “कल्पना” जब मीत हर-दम साथ है
हाथ यह छूटेगा अब तो, दम निकल जाने के बाद।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी