कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५५ / २०५ № 55 of 205 रचना ५५ / २०५
३ सितम्बर २०१४ 3 September 2014 ३ सितम्बर २०१४

शाम ढल जाने के बाद shaam dhal jaane ke baad शाम ढल जाने के बाद

दृग

खुले रखना किसी से, प्रीत पल जाने के बाद।

॥

जग

नहीं देता सहारा, पग फिसल जाने के बाद।

॥

चार

होते ही नयन, कर लो हजारों कोशिशें

॥

त्राण

है मुश्किल, नज़र का बाण चल जाने के बाद।

॥

बाँध

लो प्रेमिल पलों को, ज़िंदगी भर के लिए।

॥

फिर

नहीं आता वही मौसम, निकल जाने के बाद।

॥

प्यार तो होता खरा, पर खार करता है जहाँ

॥

इसलिए मिलते हैं दो दिल, शाम ढल जाने के बाद।

॥

सब्र

से सींचो हृदय में, प्रेम रूपी बीज को

॥

ख़ुशबुएँ

देता रहेगा, फूल-फल जाने के बाद।

॥

प्रेम

के अतिरेक का,

कैसा मिला है फल उसे

॥

जान

पाता है कहाँ,

परवाना जल जाने के बाद।

॥

क्यों

डरें हम “कल्पना” जब मीत हर-दम साथ है

॥

हाथ यह छूटेगा अब तो, दम निकल जाने के बाद।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

driig

khule rakhanaa kisee se, preet pal jaane ke baad

·

jag

naheen detaa sahaaraa, pag phisal jaane ke baad

·

chaar

hote hee nayan, kar lo hajaaron koshishen

·

traan

hai mushkil, nazar kaa baan chal jaane ke baad

·

baandh

lo premil palon ko, zindagee bhar ke lie

·

phir

naheen aataa wahee mausam, nikal jaane ke baad

·

pyaar to hotaa kharaa, par khaar karataa hai jahaan

·

isalie milate hain do dil, shaam dhal jaane ke baad

·

sabr

se seencho hriiday men, prem roopee beej ko

·

kushabuen

detaa rahegaa, phool-phal jaane ke baad

·

prem

ke atirek kaa,

kaisaa milaa hai phal use

·

jaan

paataa hai kahaan,

parawaanaa jal jaane ke baad

·

kyon

daren ham “kalpanaa” jab meet har-dam saath hai

·

haath yah chootegaa ab to, dam nikal jaane ke baad

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

दृग

खुले रखना किसी से, प्रीत पल जाने के बाद।

॥

जग

नहीं देता सहारा, पग फिसल जाने के बाद।

॥

चार

होते ही नयन, कर लो हजारों कोशिशें

॥

त्राण

है मुश्किल, नज़र का बाण चल जाने के बाद।

॥

बाँध

लो प्रेमिल पलों को, ज़िंदगी भर के लिए।

॥

फिर

नहीं आता वही मौसम, निकल जाने के बाद।

॥

प्यार तो होता खरा, पर खार करता है जहाँ

॥

इसलिए मिलते हैं दो दिल, शाम ढल जाने के बाद।

॥

सब्र

से सींचो हृदय में, प्रेम रूपी बीज को

॥

ख़ुशबुएँ

देता रहेगा, फूल-फल जाने के बाद।

॥

प्रेम

के अतिरेक का,

कैसा मिला है फल उसे

॥

जान

पाता है कहाँ,

परवाना जल जाने के बाद।

॥

क्यों

डरें हम “कल्पना” जब मीत हर-दम साथ है

॥

हाथ यह छूटेगा अब तो, दम निकल जाने के बाद।

॥

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗