कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५४ / २०५ № 54 of 205 रचना ५४ / २०५
१ सितम्बर २०१४ 1 September 2014 १ सितम्बर २०१४

कुछ और नहीं kuch aur naheen कुछ और नहीं

खुदा से माँगा मेहर के सिवा कुछ और

नहीं।

॥

दुआएँ देती नज़र के सिवा कुछ और नहीं।

॥

दुखा के गाँव का दिल चल दिये मिला

लेकिन

॥

दिलों से तंग शहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

पिलाके नाग को पय, बाद

पूज लो चाहे

॥

मिलेगा दंश-ज़हर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

चमन को सींच लहू से है सोचता माली

॥

गुलों की लंबी उमर के सिवा कुछ और

नहीं।

॥

लिया तो सौख्य नई पौध ने बुजुर्गों से

॥

दिया है रंज-फिकर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

जवाबी तोहफे मिलेंगे हमें भी कुदरत से

॥

सुनामी, बाढ़, कहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

जो जानते ही नहीं, साज़, राग, उनके लिए

॥

ग़ज़ल भी रूक्ष बहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

विपन्न हैं जिन्हें दिखता हसीन दुनिया

में

॥

उदास शाम सहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

कुछ ऐसा हो कि बसे “कल्पना” हरिक

जन के

॥

हृदय में प्रेमनगर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

khudaa se maangaa mehar ke siwaa kuch aur

naheen

·

duaaen detee nazar ke siwaa kuch aur naheen

·

dukhaa ke gaanv kaa dil chal diye milaa

lekin

·

dilon se tang shahar ke siwaa kuch aur naheen

·

pilaake naag ko pay, baad

pooj lo chaahe

·

milegaa dansh-zahar ke siwaa kuch aur naheen

·

chaman ko seench lahoo se hai sochataa maalee

·

gulon kee lanbee umar ke siwaa kuch aur

naheen

·

liyaa to saukhy naee paudh ne bujurgon se

·

diyaa hai ranj-phikar ke siwaa kuch aur naheen

·

jawaabee tohaphe milenge hamen bhee kudarat se

·

sunaamee, baaढ़, kahar ke siwaa kuch aur naheen

·

jo jaanate hee naheen, saaz, raag, unake lie

·

gazal bhee rooksh bahar ke siwaa kuch aur naheen

·

wipann hain jinhen dikhataa haseen duniyaa

men

·

udaas shaam sahar ke siwaa kuch aur naheen

·

kuch aisaa ho ki base “kalpanaa” harik

jan ke

·

hriiday men premanagar ke siwaa kuch aur naheen

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुदा से माँगा मेहर के सिवा कुछ और

नहीं।

॥

दुआएँ देती नज़र के सिवा कुछ और नहीं।

॥

दुखा के गाँव का दिल चल दिये मिला

लेकिन

॥

दिलों से तंग शहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

पिलाके नाग को पय, बाद

पूज लो चाहे

॥

मिलेगा दंश-ज़हर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

चमन को सींच लहू से है सोचता माली

॥

गुलों की लंबी उमर के सिवा कुछ और

नहीं।

॥

लिया तो सौख्य नई पौध ने बुजुर्गों से

॥

दिया है रंज-फिकर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

जवाबी तोहफे मिलेंगे हमें भी कुदरत से

॥

सुनामी, बाढ़, कहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

जो जानते ही नहीं, साज़, राग, उनके लिए

॥

ग़ज़ल भी रूक्ष बहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

विपन्न हैं जिन्हें दिखता हसीन दुनिया

में

॥

उदास शाम सहर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

कुछ ऐसा हो कि बसे “कल्पना” हरिक

जन के

॥

हृदय में प्रेमनगर के सिवा कुछ और नहीं।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗