सोचा है यही उनसे मिलकर हम sochaa hai yahee unase milakar ham सोचा है यही उनसे मिलकर हम
सोचा
है यही उनसे मिलकर,
हर बात पुरानी कह देंगे।
जो
बीत चुकी अब तक हम पर,
अपनी ही जुबानी कह देंगे।
मिल
जाए अगर वो राहों में,
हो गहरा प्रेम निगाहों में,
इस
बार हमें प्रिय दे जाओ,
कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।
यदि
उसने सुख-दुख पूछा तो,
कुछ अपना हाल सुनाया तो,
तुम
बिन अब हमको लगती है,
यह दुनिया फ़ानी कह देंगे।
ले
नाम उसी का फिरते हैं,
यादों पे गुज़ारा करते हैं,
मिलना
न हुआ तो लोग हमें,
पगली दीवानी कह देंगे।
बेदर्द
दिलों की भीड़ यहाँ,
कहीं और बसाएँ एक जहाँ,
अब
संग तुम्हारे ही हमको,
यह उम्र बितानी कह देंगे।
माना
कि लबों पर बोल नहीं,
पर हैं इंसाँ पाषाण नहीं।
चुप
रहकर भी इन नैनों से,
हम अपनी कहानी कह देंगे।
यदि
हमसे वो कर ले वादा,
यह जीवन साथ बिताने का,
तो
शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं, कुछ और
निभानी कह देंगे।
-------कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
sochaa
hai yahee unase milakar,
har baat puraanee kah denge
jo
beet chukee ab tak ham par,
apanee hee jubaanee kah denge
mil
jaae agar wo raahon men,
ho gaharaa prem nigaahon men,
is
baar hamen priy de jaao,
kuch neh-nishaanee, kah denge
yadi
usane sukh-dukh poochaa to,
kuch apanaa haal sunaayaa to,
tum
bin ab hamako lagatee hai,
yah duniyaa faanee kah denge
le
naam usee kaa phirate hain,
yaadon pe guzaaraa karate hain,
milanaa
n huaa to log hamen,
pagalee deewaanee kah denge
bedard
dilon kee bheed yahaan,
kaheen aur basaaen ek jahaan,
ab
sang tumhaare hee hamako,
yah umr bitaanee kah denge
maanaa
ki labon par bol naheen,
par hain insaan paashaan naheen
chup
rahakar bhee in nainon se,
ham apanee kahaanee kah denge
yadi
hamase wo kar le waadaa,
yah jeewan saath bitaane kaa,
to
shesh ‘kalpanaa’ rasm naheen, kuch aur
nibhaanee kah denge
-------kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
सोचा
है यही उनसे मिलकर,
हर बात पुरानी कह देंगे।
जो
बीत चुकी अब तक हम पर,
अपनी ही जुबानी कह देंगे।
मिल
जाए अगर वो राहों में,
हो गहरा प्रेम निगाहों में,
इस
बार हमें प्रिय दे जाओ,
कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।
यदि
उसने सुख-दुख पूछा तो,
कुछ अपना हाल सुनाया तो,
तुम
बिन अब हमको लगती है,
यह दुनिया फ़ानी कह देंगे।
ले
नाम उसी का फिरते हैं,
यादों पे गुज़ारा करते हैं,
मिलना
न हुआ तो लोग हमें,
पगली दीवानी कह देंगे।
बेदर्द
दिलों की भीड़ यहाँ,
कहीं और बसाएँ एक जहाँ,
अब
संग तुम्हारे ही हमको,
यह उम्र बितानी कह देंगे।
माना
कि लबों पर बोल नहीं,
पर हैं इंसाँ पाषाण नहीं।
चुप
रहकर भी इन नैनों से,
हम अपनी कहानी कह देंगे।
यदि
हमसे वो कर ले वादा,
यह जीवन साथ बिताने का,
तो
शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं, कुछ और
निभानी कह देंगे।
-------कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी