कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५२ / २०४ № 52 of 204 रचना ५२ / २०४
२५ अगस्त २०१४ 25 August 2014 २५ अगस्त २०१४

सोचा है यही उनसे मिलकर हम sochaa hai yahee unase milakar ham सोचा है यही उनसे मिलकर हम

सोचा

है यही उनसे मिलकर,

हर बात पुरानी कह देंगे।

जो

बीत चुकी अब तक हम पर,

अपनी ही जुबानी कह देंगे।

मिल

जाए अगर वो राहों में,

हो गहरा प्रेम निगाहों में,

इस

बार हमें प्रिय दे जाओ,

कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।

यदि

उसने सुख-दुख पूछा तो,

कुछ अपना हाल सुनाया तो,

तुम

बिन अब हमको लगती है,

यह दुनिया फ़ानी कह देंगे।

ले

नाम उसी का फिरते हैं,

यादों पे गुज़ारा करते हैं,

मिलना

न हुआ तो लोग हमें,

पगली दीवानी कह देंगे।

बेदर्द

दिलों की भीड़ यहाँ,

कहीं और बसाएँ एक जहाँ,

अब

संग तुम्हारे ही हमको,

यह उम्र बितानी कह देंगे।

माना

कि लबों पर बोल नहीं,

पर हैं इंसाँ पाषाण नहीं।

चुप

रहकर भी इन नैनों से,

हम अपनी कहानी कह देंगे।

यदि

हमसे वो कर ले वादा,

यह जीवन साथ बिताने का,

तो

शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं, कुछ और

निभानी कह देंगे।

-------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

sochaa

hai yahee unase milakar,

har baat puraanee kah denge

·

jo

beet chukee ab tak ham par,

apanee hee jubaanee kah denge

·

mil

jaae agar wo raahon men,

ho gaharaa prem nigaahon men,

·

is

baar hamen priy de jaao,

kuch neh-nishaanee, kah denge

·

yadi

usane sukh-dukh poochaa to,

kuch apanaa haal sunaayaa to,

·

tum

bin ab hamako lagatee hai,

yah duniyaa faanee kah denge

·

le

naam usee kaa phirate hain,

yaadon pe guzaaraa karate hain,

·

milanaa

n huaa to log hamen,

pagalee deewaanee kah denge

·

bedard

dilon kee bheed yahaan,

kaheen aur basaaen ek jahaan,

·

ab

sang tumhaare hee hamako,

yah umr bitaanee kah denge

·

maanaa

ki labon par bol naheen,

par hain insaan paashaan naheen

·

chup

rahakar bhee in nainon se,

ham apanee kahaanee kah denge

·

yadi

hamase wo kar le waadaa,

yah jeewan saath bitaane kaa,

·

to

shesh ‘kalpanaa’ rasm naheen, kuch aur

nibhaanee kah denge

·

-------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

सोचा

है यही उनसे मिलकर,

हर बात पुरानी कह देंगे।

जो

बीत चुकी अब तक हम पर,

अपनी ही जुबानी कह देंगे।

मिल

जाए अगर वो राहों में,

हो गहरा प्रेम निगाहों में,

इस

बार हमें प्रिय दे जाओ,

कुछ नेह-निशानी, कह देंगे।

यदि

उसने सुख-दुख पूछा तो,

कुछ अपना हाल सुनाया तो,

तुम

बिन अब हमको लगती है,

यह दुनिया फ़ानी कह देंगे।

ले

नाम उसी का फिरते हैं,

यादों पे गुज़ारा करते हैं,

मिलना

न हुआ तो लोग हमें,

पगली दीवानी कह देंगे।

बेदर्द

दिलों की भीड़ यहाँ,

कहीं और बसाएँ एक जहाँ,

अब

संग तुम्हारे ही हमको,

यह उम्र बितानी कह देंगे।

माना

कि लबों पर बोल नहीं,

पर हैं इंसाँ पाषाण नहीं।

चुप

रहकर भी इन नैनों से,

हम अपनी कहानी कह देंगे।

यदि

हमसे वो कर ले वादा,

यह जीवन साथ बिताने का,

तो

शेष ‘कल्पना’ रस्म नहीं, कुछ और

निभानी कह देंगे।

-------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗