कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७८ / १६३ № 78 of 163 रचना ७८ / १६३
१० सितम्बर २०१४ 10 September 2014 १० सितम्बर २०१४

इस शहर के रास्तों पर is shahar ke raaston par इस शहर के रास्तों पर

तुम पथिक, आए कहाँ से,

ठौर किस तुमको ठहरना?

इस शहर के रास्तों पर,

कुछ सँभलकर

पाँव धरना।

बात कल की है, यहाँ पर,

कत्ल जीवित वन हुआ था।

जड़ मशीनें जी उठी थीं,

और जड़ जीवन हुआ था।

देख थी हैरान कुदरत,

रात का दिन में

उतरना।

जो युगों से थे खड़े

वे पेड़ धरती पर पड़े

थे।

उस कुटिल तूफान से, तुम

पूछना कैसे लड़े थे।

याद

tum pathik, aae kahaan se,

·

thaur kis tumako thaharanaa?

·

is shahar ke raaston par,

·

kuch sanbhalakar

·

paanv dharanaa

·

baat kal kee hai, yahaan par,

·

katl jeewit wan huaa thaa

·

jad masheenen jee uthee theen,

·

aur jad jeewan huaa thaa

·

dekh thee hairaan kudarat,

·

raat kaa din men

·

utaranaa

·

jo yugon se the khade

·

we ped dharatee par pade

the

·

us kutil toophaan se, tum

·

poochanaa kaise lade the

·

yaad

तुम पथिक, आए कहाँ से,

ठौर किस तुमको ठहरना?

इस शहर के रास्तों पर,

कुछ सँभलकर

पाँव धरना।

बात कल की है, यहाँ पर,

कत्ल जीवित वन हुआ था।

जड़ मशीनें जी उठी थीं,

और जड़ जीवन हुआ था।

देख थी हैरान कुदरत,

रात का दिन में

उतरना।

जो युगों से थे खड़े

वे पेड़ धरती पर पड़े

थे।

उस कुटिल तूफान से, तुम

पूछना कैसे लड़े थे।

याद

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗