कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २४ / २०५ № 24 of 205 रचना २४ / २०५
९ दिसम्बर २०१३ 9 December 2013 ९ दिसम्बर २०१३

भोर का तारा छिपा जाने किधर है bhor kaa taaraa chipaa jaane kidhar hai भोर का तारा छिपा जाने किधर है

आज

खबरों में जहाँ जाती नज़र है।

॥

रक्त

में डूबी हुई, होती खबर है।

॥

फिर

रहा है दिन उजाले को छिपाकर,

॥

रात

पूनम पर अमावस की मुहर है।

॥

ढूँढते

हैं दीप लेकर लोग उसको,

॥

भोर

का तारा छिपा जाने किधर है।

॥

डर

रहे हैं रास्ते मंज़िल दिखाते,

॥

मंज़िलों

पर खौफ का दिखता कहर है।

॥

खो

चुके हैं नद-नदी रफ्तार अपनी,

॥

साहिलों

की ओट छिपती हर लहर है।

॥

साज़

हैं खामोश, चुप है रागिनी भी,

॥

गीत

गुमसुम, मूक सुर, बेबस बहर है।

॥

हसरतों

के फूल चुनता मन का माली,

॥

नफरतों

के शूल बुनती सेज पर है।

॥

आज

मेरा देश क्यों भयभीत इतना,

॥

हर

गली सुनसान, सहमा हर शहर है।

॥

---------- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

aaj

khabaron men jahaan jaatee nazar hai

·

rakt

men doobee huee, hotee khabar hai

·

phir

rahaa hai din ujaale ko chipaakar,

·

raat

poonam par amaawas kee muhar hai

·

dhoondhate

hain deep lekar log usako,

·

bhor

kaa taaraa chipaa jaane kidhar hai

·

dar

rahe hain raaste manzil dikhaate,

·

manzilon

par khauph kaa dikhataa kahar hai

·

kho

chuke hain nad-nadee raphtaar apanee,

·

saahilon

kee ot chipatee har lahar hai

·

saaz

hain khaamosh, chup hai raaginee bhee,

·

geet

gumasum, mook sur, bebas bahar hai

·

hasaraton

ke phool chunataa man kaa maalee,

·

napharaton

ke shool bunatee sej par hai

·

aaj

meraa desh kyon bhayabheet itanaa,

·

har

galee sunasaan, sahamaa har shahar hai

·

---------- kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

आज

खबरों में जहाँ जाती नज़र है।

॥

रक्त

में डूबी हुई, होती खबर है।

॥

फिर

रहा है दिन उजाले को छिपाकर,

॥

रात

पूनम पर अमावस की मुहर है।

॥

ढूँढते

हैं दीप लेकर लोग उसको,

॥

भोर

का तारा छिपा जाने किधर है।

॥

डर

रहे हैं रास्ते मंज़िल दिखाते,

॥

मंज़िलों

पर खौफ का दिखता कहर है।

॥

खो

चुके हैं नद-नदी रफ्तार अपनी,

॥

साहिलों

की ओट छिपती हर लहर है।

॥

साज़

हैं खामोश, चुप है रागिनी भी,

॥

गीत

गुमसुम, मूक सुर, बेबस बहर है।

॥

हसरतों

के फूल चुनता मन का माली,

॥

नफरतों

के शूल बुनती सेज पर है।

॥

आज

मेरा देश क्यों भयभीत इतना,

॥

हर

गली सुनसान, सहमा हर शहर है।

॥

---------- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗