कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ९ / २०५ № 9 of 205 रचना ९ / २०५
४ अगस्त २०१३ 4 August 2013 ४ अगस्त २०१३

बुला रही फुहार है bulaa rahee phuhaar hai बुला रही फुहार है

बदलती ऋतु की रागिनी,

सुना रही फुहार है।

॥

उड़ी सुगंध बाग में,

बुला रही फुहार है।

॥

कहीं घटा घनी-घनी, कहीं पे धूप है खिली

॥

लुका-छुपी के खेल से, रिझा रही फुहार है।

॥

अमा है चाँद रात भी, है साँवली प्रभात भी

॥

अनूप रूप सृष्टि का, दिखा रही फुहार है।

॥

वनों में पेड़-पेड़ पर, पखेरुओं को छेड़कर

॥

बुलंद छंद कान में, सुना रही फुहार है।

॥

चमन के पात-पात पर, कली-कली के गात पर

॥

बिसात बूँद-बूँद से, बिछा रही फुहार है।

॥

पहाड़ पर कछार में, नदी-नदीश धार में

॥

जहाँ-तहाँ बहार में, नहा रही फुहार है।

॥

सहर्ष होगी बोवनी,

भरेगी गोद भूमि की

॥

किसान संग-संग हल,

चला रही फुहार है।

॥

मयूर नृत्य में मगन, कुहुक रही है कोकिला

॥

सुरों में सुर मिलाके गीत, गा रही फुहार है।

॥

झुला रही है शाख पे, सहेलियों को झूलना

॥

घरों में पर्व प्यार से, मना रही हैं फुहार है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

badalatee riitu kee raaginee,

sunaa rahee phuhaar hai

·

udee sugandh baag men,

bulaa rahee phuhaar hai

·

kaheen ghataa ghanee-ghanee, kaheen pe dhoop hai khilee

·

lukaa-chupee ke khel se, rijhaa rahee phuhaar hai

·

amaa hai chaand raat bhee, hai saanvalee prabhaat bhee

·

anoop roop sriishti kaa, dikhaa rahee phuhaar hai

·

wanon men ped-ped par, pakheruon ko chedakar

·

buland chand kaan men, sunaa rahee phuhaar hai

·

chaman ke paat-paat par, kalee-kalee ke gaat par

·

bisaat boond-boond se, bichaa rahee phuhaar hai

·

pahaad par kachaar men, nadee-nadeesh dhaar men

·

jahaan-tahaan bahaar men, nahaa rahee phuhaar hai

·

saharsh hogee bowanee,

bharegee god bhoomi kee

·

kisaan sang-sang hal,

chalaa rahee phuhaar hai

·

mayoor nriity men magan, kuhuk rahee hai kokilaa

·

suron men sur milaake geet, gaa rahee phuhaar hai

·

jhulaa rahee hai shaakh pe, saheliyon ko jhoolanaa

·

gharon men parv pyaar se, manaa rahee hain phuhaar hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

बदलती ऋतु की रागिनी,

सुना रही फुहार है।

॥

उड़ी सुगंध बाग में,

बुला रही फुहार है।

॥

कहीं घटा घनी-घनी, कहीं पे धूप है खिली

॥

लुका-छुपी के खेल से, रिझा रही फुहार है।

॥

अमा है चाँद रात भी, है साँवली प्रभात भी

॥

अनूप रूप सृष्टि का, दिखा रही फुहार है।

॥

वनों में पेड़-पेड़ पर, पखेरुओं को छेड़कर

॥

बुलंद छंद कान में, सुना रही फुहार है।

॥

चमन के पात-पात पर, कली-कली के गात पर

॥

बिसात बूँद-बूँद से, बिछा रही फुहार है।

॥

पहाड़ पर कछार में, नदी-नदीश धार में

॥

जहाँ-तहाँ बहार में, नहा रही फुहार है।

॥

सहर्ष होगी बोवनी,

भरेगी गोद भूमि की

॥

किसान संग-संग हल,

चला रही फुहार है।

॥

मयूर नृत्य में मगन, कुहुक रही है कोकिला

॥

सुरों में सुर मिलाके गीत, गा रही फुहार है।

॥

झुला रही है शाख पे, सहेलियों को झूलना

॥

घरों में पर्व प्यार से, मना रही हैं फुहार है।

॥

-कल्पना रामानी

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प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗