कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २२ / १६४ № 22 of 164 रचना २२ / १६४
८ अगस्त २०१३ 8 August 2013 ८ अगस्त २०१३

शरद पूर्णिमा दूध नहाई sharad poornimaa doodh nahaaee शरद पूर्णिमा दूध नहाई

आया उजला पाख धरा पर

॥

सजकर उतरी चाँदनी।

॥

चलीं हवाएँ साथ झूमने

॥

बढ़ा हिमगिरि कदम चूमने।

॥

जड़ चेतन के ह्रदय उतरती

॥

तन मन को आल्हादित करती।

॥

चंद्र लोक से चलकर आई

॥

पहन किरण की पैंजनी।

॥

नवल श्वेत वस्त्रों में आई।

॥

शरद पूर्णिमा दूध नहाई।

॥

आँज नयन में काजल थोड़ा

॥

आसमान को तन पर ओढ़ा।

॥

सजा सितारों से आँचल, ज्यों

॥

जगमग चुनरी बाँधनी।

॥

चंचल रूप सभी को

aayaa ujalaa paakh dharaa par

·

sajakar utaree chaandanee

·

chaleen hawaaen saath jhoomane

·

bढ़aa himagiri kadam choomane

·

jad chetan ke hraday utaratee

·

tan man ko aalhaadit karatee

·

chandr lok se chalakar aaee

·

pahan kiran kee painjanee

·

nawal shvet wastron men aaee

·

sharad poornimaa doodh nahaaee

·

aanj nayan men kaajal thodaa

·

aasamaan ko tan par oढ़aa

·

sajaa sitaaron se aanchal, jyon

·

jagamag chunaree baandhanee

·

chanchal roop sabhee ko

आया उजला पाख धरा पर

॥

सजकर उतरी चाँदनी।

॥

चलीं हवाएँ साथ झूमने

॥

बढ़ा हिमगिरि कदम चूमने।

॥

जड़ चेतन के ह्रदय उतरती

॥

तन मन को आल्हादित करती।

॥

चंद्र लोक से चलकर आई

॥

पहन किरण की पैंजनी।

॥

नवल श्वेत वस्त्रों में आई।

॥

शरद पूर्णिमा दूध नहाई।

॥

आँज नयन में काजल थोड़ा

॥

आसमान को तन पर ओढ़ा।

॥

सजा सितारों से आँचल, ज्यों

॥

जगमग चुनरी बाँधनी।

॥

चंचल रूप सभी को

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗