कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २५ / १६४ № 25 of 164 रचना २५ / १६४
९ अगस्त २०१३ 9 August 2013 ९ अगस्त २०१३

विजय का दीप wijay kaa deep विजय का दीप

विहँस रहा है बुत रावण

॥

दस शीश उठाए

॥

सच्चा जो इंसान, वेधने

॥

कदम बढ़ा दे।

॥

जिसने

केवल सत्कर्मों का

॥

वरण

किया हो।

॥

कभी

न छल से, बल से बाला

॥

हरण

किया हो।

॥

लाज

बचाई हो अबलाओं

॥

की, लुटने से

॥

सदाचरण

का व्रत, वांछित

॥

आमरण

लिया हो।

॥

अजय

धनुष पर बाण,वही इस

॥

बार

चढ़ा दे।

॥

जिसने

कभी न दुष्कर्मों के

॥

महल

बनाए।

॥

दफनाकर

आदर्श,

wihans rahaa hai but raawan

·

das sheesh uthaae

·

sachchaa jo insaan, wedhane

·

kadam bढ़aa de

·

jisane

kewal satkarmon kaa

·

waran

kiyaa ho

·

kabhee

n chal se, bal se baalaa

·

haran

kiyaa ho

·

laaj

bachaaee ho abalaaon

·

kee, lutane se

·

sadaacharan

kaa wrat, waanchit

·

aamaran

liyaa ho

·

ajay

dhanush par baan,wahee is

·

baar

chढ़aa de

·

jisane

kabhee n dushkarmon ke

·

mahal

banaae

·

daphanaakar

aadarsh,

विहँस रहा है बुत रावण

॥

दस शीश उठाए

॥

सच्चा जो इंसान, वेधने

॥

कदम बढ़ा दे।

॥

जिसने

केवल सत्कर्मों का

॥

वरण

किया हो।

॥

कभी

न छल से, बल से बाला

॥

हरण

किया हो।

॥

लाज

बचाई हो अबलाओं

॥

की, लुटने से

॥

सदाचरण

का व्रत, वांछित

॥

आमरण

लिया हो।

॥

अजय

धनुष पर बाण,वही इस

॥

बार

चढ़ा दे।

॥

जिसने

कभी न दुष्कर्मों के

॥

महल

बनाए।

॥

दफनाकर

आदर्श,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗