विजय का दीप wijay kaa deep विजय का दीप
विहँस रहा है बुत रावण
दस शीश उठाए
सच्चा जो इंसान, वेधने
कदम बढ़ा दे।
जिसने
केवल सत्कर्मों का
वरण
किया हो।
कभी
न छल से, बल से बाला
हरण
किया हो।
लाज
बचाई हो अबलाओं
की, लुटने से
सदाचरण
का व्रत, वांछित
आमरण
लिया हो।
अजय
धनुष पर बाण,वही इस
बार
चढ़ा दे।
जिसने
कभी न दुष्कर्मों के
महल
बनाए।
दफनाकर
आदर्श,
wihans rahaa hai but raawan
das sheesh uthaae
sachchaa jo insaan, wedhane
kadam bढ़aa de
jisane
kewal satkarmon kaa
waran
kiyaa ho
kabhee
n chal se, bal se baalaa
haran
kiyaa ho
laaj
bachaaee ho abalaaon
kee, lutane se
sadaacharan
kaa wrat, waanchit
aamaran
liyaa ho
ajay
dhanush par baan,wahee is
baar
chढ़aa de
jisane
kabhee n dushkarmon ke
mahal
banaae
daphanaakar
aadarsh,
विहँस रहा है बुत रावण
दस शीश उठाए
सच्चा जो इंसान, वेधने
कदम बढ़ा दे।
जिसने
केवल सत्कर्मों का
वरण
किया हो।
कभी
न छल से, बल से बाला
हरण
किया हो।
लाज
बचाई हो अबलाओं
की, लुटने से
सदाचरण
का व्रत, वांछित
आमरण
लिया हो।
अजय
धनुष पर बाण,वही इस
बार
चढ़ा दे।
जिसने
कभी न दुष्कर्मों के
महल
बनाए।
दफनाकर
आदर्श,