कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २५ / १६३ № 25 of 163 रचना २५ / १६३
९ अगस्त २०१३ 9 August 2013 ९ अगस्त २०१३

विजय का दीप wijay kaa deep विजय का दीप

विहँस रहा है बुत रावण

दस शीश उठाए

सच्चा जो इंसान, वेधने

कदम बढ़ा दे।

जिसने

केवल सत्कर्मों का

वरण

किया हो।

कभी

न छल से, बल से बाला

हरण

किया हो।

लाज

बचाई हो अबलाओं

की, लुटने से

सदाचरण

का व्रत, वांछित

आमरण

लिया हो।

अजय

धनुष पर बाण,वही इस

बार

चढ़ा दे।

जिसने

कभी न दुष्कर्मों के

महल

बनाए।

दफनाकर

आदर्श,

wihans rahaa hai but raawan

·

das sheesh uthaae

·

sachchaa jo insaan, wedhane

·

kadam bढ़aa de

·

jisane

kewal satkarmon kaa

·

waran

kiyaa ho

·

kabhee

n chal se, bal se baalaa

·

haran

kiyaa ho

·

laaj

bachaaee ho abalaaon

·

kee, lutane se

·

sadaacharan

kaa wrat, waanchit

·

aamaran

liyaa ho

·

ajay

dhanush par baan,wahee is

·

baar

chढ़aa de

·

jisane

kabhee n dushkarmon ke

·

mahal

banaae

·

daphanaakar

aadarsh,

विहँस रहा है बुत रावण

दस शीश उठाए

सच्चा जो इंसान, वेधने

कदम बढ़ा दे।

जिसने

केवल सत्कर्मों का

वरण

किया हो।

कभी

न छल से, बल से बाला

हरण

किया हो।

लाज

बचाई हो अबलाओं

की, लुटने से

सदाचरण

का व्रत, वांछित

आमरण

लिया हो।

अजय

धनुष पर बाण,वही इस

बार

चढ़ा दे।

जिसने

कभी न दुष्कर्मों के

महल

बनाए।

दफनाकर

आदर्श,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗