कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११५ / १६३ № 115 of 163 रचना ११५ / १६३
१४ अक्तूबर २०१५ 14 October 2015 १४ अक्तूबर २०१५

बुझ न पाए अब दिया विश्वास का bujh n paae ab diyaa wishvaas kaa बुझ न पाए अब दिया विश्वास का

शक्ति का

वर माँग तुमसे माँ

भवानी!

छू रही नारी शिखर

उल्लास का।

तज चुकी है रूढ़ियों

की

रुग्ण शैय्या।

अब नहीं वो द्रौपदी, सीता

अहिल्या।

चाल हर शतरंज की वो

जानती है।

ऊँट, रानी हो कि हाथी या

अढैया।

रच रही वो

जीत की अनमिट

कहानी।

फाड़ पन्ना हार के

इतिहास का।

भव मनाता पर्व जब

नव

रात्रियों का।

ओज नारी पर उतरता

देवियों सा।

क्यों नहीं अभिमान

हो निज

shakti kaa

·

war maang tumase maan

bhawaanee!

·

choo rahee naaree shikhar

·

ullaas kaa

·

taj chukee hai rooढ़iyon

kee

·

rugn shaiyyaa

·

ab naheen wo draupadee, seetaa

·

ahilyaa

·

chaal har shataranj kee wo

·

jaanatee hai

·

oont, raanee ho ki haathee yaa

·

adhaiyaa

·

rach rahee wo

·

jeet kee anamit

kahaanee

·

phaad pannaa haar ke

·

itihaas kaa

·

bhaw manaataa parv jab

naw

·

raatriyon kaa

·

oj naaree par utarataa

·

dewiyon saa

·

kyon naheen abhimaan

ho nij

शक्ति का

वर माँग तुमसे माँ

भवानी!

छू रही नारी शिखर

उल्लास का।

तज चुकी है रूढ़ियों

की

रुग्ण शैय्या।

अब नहीं वो द्रौपदी, सीता

अहिल्या।

चाल हर शतरंज की वो

जानती है।

ऊँट, रानी हो कि हाथी या

अढैया।

रच रही वो

जीत की अनमिट

कहानी।

फाड़ पन्ना हार के

इतिहास का।

भव मनाता पर्व जब

नव

रात्रियों का।

ओज नारी पर उतरता

देवियों सा।

क्यों नहीं अभिमान

हो निज

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗