बुझ न पाए अब दिया विश्वास का bujh n paae ab diyaa wishvaas kaa बुझ न पाए अब दिया विश्वास का
शक्ति का
वर माँग तुमसे माँ
भवानी!
छू रही नारी शिखर
उल्लास का।
तज चुकी है रूढ़ियों
की
रुग्ण शैय्या।
अब नहीं वो द्रौपदी, सीता
अहिल्या।
चाल हर शतरंज की वो
जानती है।
ऊँट, रानी हो कि हाथी या
अढैया।
रच रही वो
जीत की अनमिट
कहानी।
फाड़ पन्ना हार के
इतिहास का।
भव मनाता पर्व जब
नव
रात्रियों का।
ओज नारी पर उतरता
देवियों सा।
क्यों नहीं अभिमान
हो निज
shakti kaa
war maang tumase maan
bhawaanee!
choo rahee naaree shikhar
ullaas kaa
taj chukee hai rooढ़iyon
kee
rugn shaiyyaa
ab naheen wo draupadee, seetaa
ahilyaa
chaal har shataranj kee wo
jaanatee hai
oont, raanee ho ki haathee yaa
adhaiyaa
rach rahee wo
jeet kee anamit
kahaanee
phaad pannaa haar ke
itihaas kaa
bhaw manaataa parv jab
naw
raatriyon kaa
oj naaree par utarataa
dewiyon saa
kyon naheen abhimaan
ho nij
शक्ति का
वर माँग तुमसे माँ
भवानी!
छू रही नारी शिखर
उल्लास का।
तज चुकी है रूढ़ियों
की
रुग्ण शैय्या।
अब नहीं वो द्रौपदी, सीता
अहिल्या।
चाल हर शतरंज की वो
जानती है।
ऊँट, रानी हो कि हाथी या
अढैया।
रच रही वो
जीत की अनमिट
कहानी।
फाड़ पन्ना हार के
इतिहास का।
भव मनाता पर्व जब
नव
रात्रियों का।
ओज नारी पर उतरता
देवियों सा।
क्यों नहीं अभिमान
हो निज