जय बोले जो सत्य की jay bole jo saty kee जय बोले जो सत्य की
टिके
हुए हैं सत्य पर, धरती
औ’ आकाश।
पर
झूठों का जूथ ये, बात
समझता काश!
हमने
खुद ही झूठ को, पहनाया
है ताज।
हम
ही ला सकते पुनः, सच
का खोया राज।
हम
ही हैं जो झूठ की, पल
पल लेते ओट।
फिर
चाहे देता रहे, हर
पल मन को चोट।
किससे
करें शिकायतें, जब
खुद जिम्मेदार।
शीश
नवाया झूठ को, दोषी
क्यों करतार।
जप
करता जो झूठ का, कितना
वो नादान।
क्षणिक
भोग ले सुख मगर, खो
देता
tike
hue hain saty par, dharatee
au’ aakaash
par
jhoothon kaa jooth ye, baat
samajhataa kaash!
hamane
khud hee jhooth ko, pahanaayaa
hai taaj
ham
hee laa sakate punah, sach
kaa khoyaa raaj
ham
hee hain jo jhooth kee, pal
pal lete ot
phir
chaahe detaa rahe, har
pal man ko chot
kisase
karen shikaayaten, jab
khud jimmedaar
sheesh
nawaayaa jhooth ko, doshee
kyon karataar
jap
karataa jo jhooth kaa, kitanaa
wo naadaan
kshanik
bhog le sukh magar, kho
detaa
टिके
हुए हैं सत्य पर, धरती
औ’ आकाश।
पर
झूठों का जूथ ये, बात
समझता काश!
हमने
खुद ही झूठ को, पहनाया
है ताज।
हम
ही ला सकते पुनः, सच
का खोया राज।
हम
ही हैं जो झूठ की, पल
पल लेते ओट।
फिर
चाहे देता रहे, हर
पल मन को चोट।
किससे
करें शिकायतें, जब
खुद जिम्मेदार।
शीश
नवाया झूठ को, दोषी
क्यों करतार।
जप
करता जो झूठ का, कितना
वो नादान।
क्षणिक
भोग ले सुख मगर, खो
देता