कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६१ / ६५ № 61 of 65 रचना ६१ / ६५
८ अक्तूबर २०१५ 8 October 2015 ८ अक्तूबर २०१५

जय बोले जो सत्य की jay bole jo saty kee जय बोले जो सत्य की

टिके

हुए हैं सत्य पर, धरती

औ’ आकाश।

पर

झूठों का जूथ ये, बात

समझता काश!

हमने

खुद ही झूठ को, पहनाया

है ताज।

हम

ही ला सकते पुनः, सच

का खोया राज।

हम

ही हैं जो झूठ की, पल

पल लेते ओट।

फिर

चाहे देता रहे, हर

पल मन को चोट।

किससे

करें शिकायतें, जब

खुद जिम्मेदार।

शीश

नवाया झूठ को, दोषी

क्यों करतार।

जप

करता जो झूठ का, कितना

वो नादान।

क्षणिक

भोग ले सुख मगर, खो

देता

tike

hue hain saty par, dharatee

au’ aakaash

·

par

jhoothon kaa jooth ye, baat

samajhataa kaash!

·

hamane

khud hee jhooth ko, pahanaayaa

hai taaj

·

ham

hee laa sakate punah, sach

kaa khoyaa raaj

·

ham

hee hain jo jhooth kee, pal

pal lete ot

·

phir

chaahe detaa rahe, har

pal man ko chot

·

kisase

karen shikaayaten, jab

khud jimmedaar

·

sheesh

nawaayaa jhooth ko, doshee

kyon karataar

·

jap

karataa jo jhooth kaa, kitanaa

wo naadaan

·

kshanik

bhog le sukh magar, kho

detaa

टिके

हुए हैं सत्य पर, धरती

औ’ आकाश।

पर

झूठों का जूथ ये, बात

समझता काश!

हमने

खुद ही झूठ को, पहनाया

है ताज।

हम

ही ला सकते पुनः, सच

का खोया राज।

हम

ही हैं जो झूठ की, पल

पल लेते ओट।

फिर

चाहे देता रहे, हर

पल मन को चोट।

किससे

करें शिकायतें, जब

खुद जिम्मेदार।

शीश

नवाया झूठ को, दोषी

क्यों करतार।

जप

करता जो झूठ का, कितना

वो नादान।

क्षणिक

भोग ले सुख मगर, खो

देता

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗