युक्ति yukti युक्ति
सुमन ने जब से बिस्तर पकड़ा, उसकी जैसे दुनिया ही बदल गई। एक तो वृद्धावस्था,
ऊपर से दमे की लाइलाज बीमारी। दिन रात खाँसती रहती। घर में बच्चे और बेटा चलते
फिरते नज़र डाल दिया करते, बहू को उतना समय भी न था, आखिर घर की सारी जवाबदारी जो उसके ऊपर आ गई थी।
रुपए-पैसे की कोई कमी न थी लेकिन उसके साथ दो बातें
करने वाला कोई न था। माँ की परेशानी को
देखते हुए बेटे विनय ने उनकी सेवा के लिए एक सेविका
suman ne jab se bistar pakadaa, usakee jaise duniyaa hee badal gaee ek to wriiddhaawasthaa,
oopar se dame kee laailaaj beemaaree din raat khaansatee rahatee ghar men bachche aur betaa chalate
phirate nazar daal diyaa karate, bahoo ko utanaa samay bhee n thaa, aakhir ghar kee saaree jawaabadaaree jo usake oopar aa gaee thee
rupae-paise kee koee kamee n thee lekin usake saath do baaten
karane waalaa koee n thaa maan kee pareshaanee ko
dekhate hue bete winay ne unakee sewaa ke lie ek sewikaa
सुमन ने जब से बिस्तर पकड़ा, उसकी जैसे दुनिया ही बदल गई। एक तो वृद्धावस्था,
ऊपर से दमे की लाइलाज बीमारी। दिन रात खाँसती रहती। घर में बच्चे और बेटा चलते
फिरते नज़र डाल दिया करते, बहू को उतना समय भी न था, आखिर घर की सारी जवाबदारी जो उसके ऊपर आ गई थी।
रुपए-पैसे की कोई कमी न थी लेकिन उसके साथ दो बातें
करने वाला कोई न था। माँ की परेशानी को
देखते हुए बेटे विनय ने उनकी सेवा के लिए एक सेविका