कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १० / ११४ № 10 of 114 रचना १० / ११४
५ अक्तूबर २०१५ 5 October 2015 ५ अक्तूबर २०१५

युक्ति yukti युक्ति

सुमन ने जब से बिस्तर पकड़ा, उसकी जैसे दुनिया ही बदल गई। एक तो वृद्धावस्था,

ऊपर से दमे की लाइलाज बीमारी। दिन रात खाँसती रहती। घर में बच्चे और बेटा चलते

फिरते नज़र डाल दिया करते, बहू को उतना समय भी न था, आखिर घर की सारी जवाबदारी जो उसके ऊपर आ गई थी।

रुपए-पैसे की कोई कमी न थी लेकिन उसके साथ दो बातें

करने वाला कोई न था। माँ की परेशानी को

देखते हुए बेटे विनय ने उनकी सेवा के लिए एक सेविका

suman ne jab se bistar pakadaa, usakee jaise duniyaa hee badal gaee ek to wriiddhaawasthaa,

oopar se dame kee laailaaj beemaaree din raat khaansatee rahatee ghar men bachche aur betaa chalate

phirate nazar daal diyaa karate, bahoo ko utanaa samay bhee n thaa, aakhir ghar kee saaree jawaabadaaree jo usake oopar aa gaee thee

·

rupae-paise kee koee kamee n thee lekin usake saath do baaten

karane waalaa koee n thaa maan kee pareshaanee ko

dekhate hue bete winay ne unakee sewaa ke lie ek sewikaa

सुमन ने जब से बिस्तर पकड़ा, उसकी जैसे दुनिया ही बदल गई। एक तो वृद्धावस्था,

ऊपर से दमे की लाइलाज बीमारी। दिन रात खाँसती रहती। घर में बच्चे और बेटा चलते

फिरते नज़र डाल दिया करते, बहू को उतना समय भी न था, आखिर घर की सारी जवाबदारी जो उसके ऊपर आ गई थी।

रुपए-पैसे की कोई कमी न थी लेकिन उसके साथ दो बातें

करने वाला कोई न था। माँ की परेशानी को

देखते हुए बेटे विनय ने उनकी सेवा के लिए एक सेविका

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗