कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ९ / ११४ № 9 of 114 रचना ९ / ११४
२७ सितम्बर २०१५ 27 September 2015 २७ सितम्बर २०१५

तकिया takiyaa तकिया

-माँ आज फिर?

“अरे सोनू! तुम तो खेलने गए थे न”? तकिये को टाँके लगाती हुई विमला ने पूछा

-हाँ माँ, मेरा मित्र आज नहीं आया तो मैं वापस आ गया लेकिन तुम मेरा तकिया जब तब खोलती क्यों रहती हो?

“बेटा कुछ ही दिनों में यह कठोर होने लगता है, इसलिए...”

-लेकिन माँ, यह कब तक करती रहोगी?

“जब तक तुम बड़े नहीं हो जाते बेटे, इसमें पड़ी हुई गुठलियाँ सीधी करते रहने से तुम्हें यह नरम लगेगा। मुझे इससे कोई तकलीफ

-maan aaj phir?

·

“are sonoo! tum to khelane gae the n”? takiye ko taanke lagaatee huee wimalaa ne poochaa

·

-haan maan, meraa mitr aaj naheen aayaa to main waapas aa gayaa lekin tum meraa takiyaa jab tab kholatee kyon rahatee ho?

·

“betaa kuch hee dinon men yah kathor hone lagataa hai, isalie”

·

-lekin maan, yah kab tak karatee rahogee?

·

“jab tak tum bade naheen ho jaate bete, isamen padee huee guthaliyaan seedhee karate rahane se tumhen yah naram lagegaa mujhe isase koee takaleeph

-माँ आज फिर?

“अरे सोनू! तुम तो खेलने गए थे न”? तकिये को टाँके लगाती हुई विमला ने पूछा

-हाँ माँ, मेरा मित्र आज नहीं आया तो मैं वापस आ गया लेकिन तुम मेरा तकिया जब तब खोलती क्यों रहती हो?

“बेटा कुछ ही दिनों में यह कठोर होने लगता है, इसलिए...”

-लेकिन माँ, यह कब तक करती रहोगी?

“जब तक तुम बड़े नहीं हो जाते बेटे, इसमें पड़ी हुई गुठलियाँ सीधी करते रहने से तुम्हें यह नरम लगेगा। मुझे इससे कोई तकलीफ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗