कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०४ / २०४ № 104 of 204 रचना १०४ / २०४
२६ सितम्बर २०१५ 26 September 2015 २६ सितम्बर २०१५

फूल सलोने गुलाब के phool salone gulaab ke फूल सलोने गुलाब के

डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते, फूल सलोने गुलाब के

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी

ये, हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते, फूल सलोने गुलाब के

ऋतु बसंत में हरिक बाग ज्यों, बन जाता है रंगमहल

बागों के राजा कहलाते, फूल सलोने गुलाब के

देख धूप के तेवर इनका, रूप

निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते, फूल सलोने गुलाब के

हर मुश्किल को मीत बना लो, देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते, फूल सलोने गुलाब के

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते, इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते, फूल

सलोने गुलाब के

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते, फूल सलोने गुलाब के

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

daal-daal par jab lad jaate, phool salone gulaab ke

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svapn gulaabee hamen dikhaate, phool salone gulaab ke

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ras-sugandh, saundary-svaamee

ye, har lete har jan kaa man

·

jab daalon par khil laharaate, phool salone gulaab ke

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riitu basant men harik baag jyon, ban jaataa hai rangamahal

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baagon ke raajaa kahalaate, phool salone gulaab ke

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dekh dhoop ke tewar inakaa, roop

nikhar jaataa hai aur

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surkh-soory se aankh milaate, phool salone gulaab ke

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har mushkil ko meet banaa lo, dete hamako seekh yahee

·

kaanton se bhee preet nibhaate, phool salone gulaab ke

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alag-alag riitu men aa milate, inase jab bichade saathee

·

hansakar unako gale lagaate, phool

salone gulaab ke

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thodaa saa den sthaan 'kalpanaa', inako apane aangan men

·

rang-surabhi se ghar mahakaate, phool salone gulaab ke

·

-kalpanaa raamaanee

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protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते, फूल सलोने गुलाब के

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी

ये, हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते, फूल सलोने गुलाब के

ऋतु बसंत में हरिक बाग ज्यों, बन जाता है रंगमहल

बागों के राजा कहलाते, फूल सलोने गुलाब के

देख धूप के तेवर इनका, रूप

निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते, फूल सलोने गुलाब के

हर मुश्किल को मीत बना लो, देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते, फूल सलोने गुलाब के

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते, इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते, फूल

सलोने गुलाब के

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते, फूल सलोने गुलाब के

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗