कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०५ / २०५ № 105 of 205 रचना १०५ / २०५
२६ सितम्बर २०१५ 26 September 2015 २६ सितम्बर २०१५

फूल सलोने गुलाब के phool salone gulaab ke फूल सलोने गुलाब के

डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी

ये, हर लेते हर जन का मन

॥

जब डालों पर खिल लहराते, फूल सलोने गुलाब के

॥

ऋतु बसंत में हरिक बाग ज्यों, बन जाता है रंगमहल

॥

बागों के राजा कहलाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

देख धूप के तेवर इनका, रूप

निखर जाता है और

॥

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

हर मुश्किल को मीत बना लो, देते हमको सीख यही

॥

काँटों से भी प्रीत निभाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते, इनसे जब बिछड़े साथी

॥

हँसकर उनको गले लगाते, फूल

सलोने गुलाब के

॥

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में

॥

रंग-सुरभि से घर महकाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

daal-daal par jab lad jaate, phool salone gulaab ke

·

svapn gulaabee hamen dikhaate, phool salone gulaab ke

·

ras-sugandh, saundary-svaamee

ye, har lete har jan kaa man

·

jab daalon par khil laharaate, phool salone gulaab ke

·

riitu basant men harik baag jyon, ban jaataa hai rangamahal

·

baagon ke raajaa kahalaate, phool salone gulaab ke

·

dekh dhoop ke tewar inakaa, roop

nikhar jaataa hai aur

·

surkh-soory se aankh milaate, phool salone gulaab ke

·

har mushkil ko meet banaa lo, dete hamako seekh yahee

·

kaanton se bhee preet nibhaate, phool salone gulaab ke

·

alag-alag riitu men aa milate, inase jab bichade saathee

·

hansakar unako gale lagaate, phool

salone gulaab ke

·

thodaa saa den sthaan 'kalpanaa', inako apane aangan men

·

rang-surabhi se ghar mahakaate, phool salone gulaab ke

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी

ये, हर लेते हर जन का मन

॥

जब डालों पर खिल लहराते, फूल सलोने गुलाब के

॥

ऋतु बसंत में हरिक बाग ज्यों, बन जाता है रंगमहल

॥

बागों के राजा कहलाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

देख धूप के तेवर इनका, रूप

निखर जाता है और

॥

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

हर मुश्किल को मीत बना लो, देते हमको सीख यही

॥

काँटों से भी प्रीत निभाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते, इनसे जब बिछड़े साथी

॥

हँसकर उनको गले लगाते, फूल

सलोने गुलाब के

॥

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में

॥

रंग-सुरभि से घर महकाते, फूल सलोने गुलाब के

॥

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗