कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ८ / ११४ № 8 of 114 रचना ८ / ११४
१९ सितम्बर २०१५ 19 September 2015 १९ सितम्बर २०१५

विचित्र विरासत wichitr wiraasat विचित्र विरासत

आज सासु

माँ की तेरहवीं है। मेहमानों के बीच उदासी ओढ़कर नकली आँसू बहाते हुए बहू संजना अब

उकता गई थी। एक ननद को छोडकर बाकी सभी मेहमान जा चुके थे। अब उसे इंतज़ार था सास की

विरासत में छोड़ी हुई चीज़ें देखने का, उनकी अलमारी की

चाबी की जानकारी केवल ननद मीना को ही थी। उसने सबके सामने अलमारी खोली। सामने ही

लॉकर की चाबी और एक कागज़ का पुर्जा पड़ा था। मीना ने माँ का लिखा हुआ संदेश पढ़ा, माँ ने

aaj saasu

maan kee terahaween hai mehamaanon ke beech udaasee oढ़kar nakalee aansoo bahaate hue bahoo sanjanaa ab

ukataa gaee thee ek nanad ko chodakar baakee sabhee mehamaan jaa chuke the ab use intazaar thaa saas kee

wiraasat men chodee huee cheezen dekhane kaa, unakee alamaaree kee

chaabee kee jaanakaaree kewal nanad meenaa ko hee thee usane sabake saamane alamaaree kholee saamane hee

lॉkar kee chaabee aur ek kaagaz kaa purjaa padaa thaa meenaa ne maan kaa likhaa huaa sandesh pढ़aa, maan ne

आज सासु

माँ की तेरहवीं है। मेहमानों के बीच उदासी ओढ़कर नकली आँसू बहाते हुए बहू संजना अब

उकता गई थी। एक ननद को छोडकर बाकी सभी मेहमान जा चुके थे। अब उसे इंतज़ार था सास की

विरासत में छोड़ी हुई चीज़ें देखने का, उनकी अलमारी की

चाबी की जानकारी केवल ननद मीना को ही थी। उसने सबके सामने अलमारी खोली। सामने ही

लॉकर की चाबी और एक कागज़ का पुर्जा पड़ा था। मीना ने माँ का लिखा हुआ संदेश पढ़ा, माँ ने

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗