दिन बसंत के din basant ke दिन बसंत के
बदला मौसम, फिर बसंत का
हुआ आगमन।
खिला खुशनुमा, फूल-तितलियों
वाला उपवन।
कुदरत के नव-रंग देखकर
प्रेम अगन में
हुआ पतंगों का भी जलने
को आतुर मन।
पींगें भरने, लगे प्रेम की
भँवरे कलियाँ
लहराता लख, हरित पीत
वसुधा का दामन।
पल-पल झरते, पात चतुर्दिश बिखरे-बिखरे
रस-सुगंध से, सींच रहे हैं
सारा आँगन।
देख जुगनुओं वाली रैना
पर्वत-झरने
खा जाता है मात चाँदनी
का भी यौवन।
लगता है ज्यों, भू पर उतरी
एक अप्सरा
प्रीत-प्रीत बन जाता है यह
मदमाता मन।
काश! "कल्पना" दिन बसंत के
कभी न बीतें
और बीत जाए इनमें
यह सारा जीवन।
-कल्पना रामानी
badalaa mausam, phir basant kaa
huaa aagaman
khilaa khushanumaa, phool-titaliyon
waalaa upawan
kudarat ke naw-rang dekhakar
prem agan men
huaa patangon kaa bhee jalane
ko aatur man
peengen bharane, lage prem kee
bhanvare kaliyaan
laharaataa lakh, harit peet
wasudhaa kaa daaman
pal-pal jharate, paat chaturdish bikhare-bikhare
ras-sugandh se, seench rahe hain
saaraa aangan
dekh juganuon waalee rainaa
parvat-jharane
khaa jaataa hai maat chaandanee
kaa bhee yauwan
lagataa hai jyon, bhoo par utaree
ek apsaraa
preet-preet ban jaataa hai yah
madamaataa man
kaash! "kalpanaa" din basant ke
kabhee n beeten
aur beet jaae inamen
yah saaraa jeewan
-kalpanaa raamaanee
बदला मौसम, फिर बसंत का
हुआ आगमन।
खिला खुशनुमा, फूल-तितलियों
वाला उपवन।
कुदरत के नव-रंग देखकर
प्रेम अगन में
हुआ पतंगों का भी जलने
को आतुर मन।
पींगें भरने, लगे प्रेम की
भँवरे कलियाँ
लहराता लख, हरित पीत
वसुधा का दामन।
पल-पल झरते, पात चतुर्दिश बिखरे-बिखरे
रस-सुगंध से, सींच रहे हैं
सारा आँगन।
देख जुगनुओं वाली रैना
पर्वत-झरने
खा जाता है मात चाँदनी
का भी यौवन।
लगता है ज्यों, भू पर उतरी
एक अप्सरा
प्रीत-प्रीत बन जाता है यह
मदमाता मन।
काश! "कल्पना" दिन बसंत के
कभी न बीतें
और बीत जाए इनमें
यह सारा जीवन।
-कल्पना रामानी