कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९६ / २०४ № 196 of 204 रचना १९६ / २०४
१२ नवम्बर २०२० 12 November 2020 १२ नवम्बर २०२०

दिन बसंत के din basant ke दिन बसंत के

बदला मौसम, फिर बसंत का

हुआ आगमन।

खिला खुशनुमा, फूल-तितलियों

वाला उपवन।

कुदरत के नव-रंग देखकर

प्रेम अगन में

हुआ पतंगों का भी जलने

को आतुर मन।

पींगें भरने, लगे प्रेम की

भँवरे कलियाँ

लहराता लख, हरित पीत

वसुधा का दामन।

पल-पल झरते, पात चतुर्दिश बिखरे-बिखरे

रस-सुगंध से, सींच रहे हैं

सारा आँगन।

देख जुगनुओं वाली रैना

पर्वत-झरने

खा जाता है मात चाँदनी

का भी यौवन।

लगता है ज्यों, भू पर उतरी

एक अप्सरा

प्रीत-प्रीत बन जाता है यह

मदमाता मन।

काश! "कल्पना"  दिन बसंत के

कभी न बीतें

और बीत जाए इनमें

यह सारा जीवन।

-कल्पना रामानी

badalaa mausam, phir basant kaa

huaa aagaman

khilaa khushanumaa, phool-titaliyon

waalaa upawan

·

kudarat ke naw-rang dekhakar

prem agan men

huaa patangon kaa bhee jalane

ko aatur man

·

peengen bharane, lage prem kee

bhanvare kaliyaan

laharaataa lakh, harit peet

wasudhaa kaa daaman

·

pal-pal jharate, paat chaturdish bikhare-bikhare

ras-sugandh se, seench rahe hain

saaraa aangan

·

dekh juganuon waalee rainaa

parvat-jharane

khaa jaataa hai maat chaandanee

kaa bhee yauwan

·

lagataa hai jyon, bhoo par utaree

ek apsaraa

preet-preet ban jaataa hai yah

madamaataa man

·

kaash! "kalpanaa" din basant ke

kabhee n beeten

aur beet jaae inamen

yah saaraa jeewan

·

-kalpanaa raamaanee

बदला मौसम, फिर बसंत का

हुआ आगमन।

खिला खुशनुमा, फूल-तितलियों

वाला उपवन।

कुदरत के नव-रंग देखकर

प्रेम अगन में

हुआ पतंगों का भी जलने

को आतुर मन।

पींगें भरने, लगे प्रेम की

भँवरे कलियाँ

लहराता लख, हरित पीत

वसुधा का दामन।

पल-पल झरते, पात चतुर्दिश बिखरे-बिखरे

रस-सुगंध से, सींच रहे हैं

सारा आँगन।

देख जुगनुओं वाली रैना

पर्वत-झरने

खा जाता है मात चाँदनी

का भी यौवन।

लगता है ज्यों, भू पर उतरी

एक अप्सरा

प्रीत-प्रीत बन जाता है यह

मदमाता मन।

काश! "कल्पना"  दिन बसंत के

कभी न बीतें

और बीत जाए इनमें

यह सारा जीवन।

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗