ससुराल नहीं जाऊँगी 9 sasuraal naheen jaaoongee 9 ससुराल नहीं जाऊँगी 9
अंतिम भाग
शुभदा राजनीति के क ख ग से भी परिचित नहीं थी, वो कमलकांत जी के दल में शामिल तो हो गई मगर मन ही मन एक सिपाही के पहली बार मोर्चे पर जाने जैसी स्थिति से गुजर रही थी।
पहली बार चुनावी बैठक में जाने पर कमलकांत जी ने उसके अभियान की जानकारी के साथ सबसे उसका परिचय करवाया. शुभदा को उस नए माहौल में कुछ अनमनी देखकर उन्होंने उसे प्रोत्साहित करते हुए टिकट दिलवाने की ज़िम्मेदारी स्वयं पर लेकर चुनाव पूर्व के सारे कार्य अपने दल के पुराने, अनुभवी और ईमानदार कार्यकर्ताओं को सौंपने की बात कही। उसे केवल उनके सहयोग से प्रचार कार्य संभालना था।
चुनाव में तीन महीने ही शेष थे, अतः अभी से युद्ध स्तर पर तैयारियाँ आरम्भ कर दी गईं। शुभदा से मुख्य मुद्दे के सभी बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए उसके जन समुदाय को संबोधित करने के लिए भाषण का कच्चा मसौदा तैयार करने को कहा गया.
शुभदा ने कहानी में वर्णित अपने सारे विचार भाषण में शामिल किये. उसके आधार पर दल के विशेषज्ञों को उसपर कार्य करने को कहा गया।
पूरा भाषण तैयार होने पर उससे बोलने का अभ्यास करवाया गया। प्रचार अभियान पर उसे दल के महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं के साथ विशिष्ट स्थानों पर जन समुदाय को संबोधित करने के लिए भेजा जाने लगा।
जन सम्पर्क के दौरान दल के चुनाव चिह्न के साथ मुख्य मुद्दे को सुर्खियों में रखकर छपे हुए पर्चे बाँटे गए। शुभदा जहाँ भी जाती उसे अपार जन-समूह सुनने जुट जाता था. उसे जन-जन का, विशेषकर बहू-बेटियों का अपार स्नेह और समर्थन मिलने लगा।
जब-जब जहाँ भी चुनावी जुलूस निकाला जाता तो बहू-बेटियों और वरिष्ठ जनों का विशाल समुदाय साथ हो लेता था। परिणाम स्वरूप चुनाव सम्पन्न होने पर शुभदा अपने क्षेत्र से बहुमत से विजयी होकर विधायक के पद पर विधानसभा में पहुँच गई।
अब उसे धीरे धीरे कमलकांत जी के मार्गदर्शन में विधानसभा के नियम कायदे, चर्चा बहस, आदि समझकर आगे बढ़ना था। पद मिलते ही उसे सम्मान भी मिलने लगा. एक अरसे बाद वो समय भी आ गया जब नया कानून बनवाने के लिए विधेयक तैयार करके सदन में प्रस्तुत करना था।
शुभदा केवल कमलकांत जी के निर्देशन में हर कार्य को अंजाम देती रही. प्रश्नोत्तर काल के लिए भी उसे कमलकांत जी ने संभावित प्रश्नों के उत्तर तैयार करके उन्हें दिमाग में बिठाने को कहा.
शुभदा अब निडर हो चली थी. उसने बिना किसी हिचकिचाहट और घबराहट के हर तरह के वाद-विवाद, चर्चा-बहस में हिस्सा लिया. धीरे-धीरे विरोधी स्वर भी उसके पक्ष में होते गए.
था। शुभदा को विश्वास था कि युग बदलने के बाद भी अब तक चाहे महिलाओं की विवाह बाद पूर्ण स्वतंत्रता के लिए कोई युगपुरुष अवतरित नहीं हुआ हो मगर वरिष्ठ विधायक कमलकांत जी, ससुर अभिजित वर्मा जी और पति प्रभात जैसे महामानवों के योगदान के बिना उसका आगे बढ़ना इतना आसान नहीं था.
शुभदा का देखा हुआ सपना साकार होने में कितना समय लगेगा, या और कितनी समस्याएँ उत्पन्न होंगी, यह वो नहीं जानती, मगर उसे इतना विश्वास है कि वो इस युग के इतिहास में नया अध्याय जोड़कर महिला शक्ति की मिसाल कायम करने में अवश्य सफल होगी।
।।इति।।
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प्रिय पाठक
आपने पूरी कहानी पढ़ी. इसके लिए मन से धन्यवाद. यह कहानी केवल मेरी कल्पना मात्र है इसका किसी वास्तविक घटना से कोई सम्बन्ध नहीं. व्यक्त विचार मेरे अपने हैं. सहमत होना या न होना आपके ऊपर निर्भर है. आपकी सकारात्मक टिप्पणियों का इंतज़ार रहेगा।😊🙏
- कल्पना रामानी
antim bhaag
shubhadaa raajaneeti ke k kh g se bhee parichit naheen thee, wo kamalakaant jee ke dal men shaamil to ho gaee magar man hee man ek sipaahee ke pahalee baar morche par jaane jaisee sthiti se gujar rahee thee
pahalee baar chunaawee baithak men jaane par kamalakaant jee ne usake abhiyaan kee jaanakaaree ke saath sabase usakaa parichay karawaayaa shubhadaa ko us nae maahaul men kuch anamanee dekhakar unhonne use protsaahit karate hue tikat dilawaane kee zimmedaaree svayan par lekar chunaaw poorv ke saare kaary apane dal ke puraane, anubhawee aur eemaanadaar kaaryakartaaon ko saunpane kee baat kahee use kewal unake sahayog se prachaar kaary sanbhaalanaa thaa
chunaaw men teen maheene hee shesh the, atah abhee se yuddh star par taiyaariyaan aarambh kar dee gaeen shubhadaa se mukhy mudde ke sabhee binduon par prakaash daalate hue usake jan samudaay ko sanbodhit karane ke lie bhaashan kaa kachchaa masaudaa taiyaar karane ko kahaa gayaa
shubhadaa ne kahaanee men warnit apane saare wichaar bhaashan men shaamil kiye usake aadhaar par dal ke wisheshajnon ko usapar kaary karane ko kahaa gayaa
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jan sampark ke dauraan dal ke chunaaw chihn ke saath mukhy mudde ko surkhiyon men rakhakar chape hue parche baante gae shubhadaa jahaan bhee jaatee use apaar jan-samooh sunane jut jaataa thaa use jan-jan kaa, wisheshakar bahoo-betiyon kaa apaar sneh aur samarthan milane lagaa
jab-jab jahaan bhee chunaawee juloos nikaalaa jaataa to bahoo-betiyon aur warishth janon kaa wishaal samudaay saath ho letaa thaa parinaam svaroop chunaaw sampann hone par shubhadaa apane kshetr se bahumat se wijayee hokar widhaayak ke pad par widhaanasabhaa men pahunch gaee
ab use dheere dheere kamalakaant jee ke maargadarshan men widhaanasabhaa ke niyam kaayade, charchaa bahas, aadi samajhakar aage bढ़naa thaa pad milate hee use sammaan bhee milane lagaa ek arase baad wo samay bhee aa gayaa jab nayaa kaanoon banawaane ke lie widheyak taiyaar karake sadan men prastut karanaa thaa
shubhadaa kewal kamalakaant jee ke nirdeshan men har kaary ko anjaam detee rahee prashnottar kaal ke lie bhee use kamalakaant jee ne sanbhaawit prashnon ke uttar taiyaar karake unhen dimaag men bithaane ko kahaa
shubhadaa ab nidar ho chalee thee usane binaa kisee hichakichaahat aur ghabaraahat ke har tarah ke waad-wiwaad, charchaa-bahas men hissaa liyaa dheere-dheere wirodhee svar bhee usake paksh men hote gae
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shubhadaa kaa dekhaa huaa sapanaa saakaar hone men kitanaa samay lagegaa, yaa aur kitanee samasyaaen utpann hongee, yah wo naheen jaanatee, magar use itanaa wishvaas hai ki wo is yug ke itihaas men nayaa adhyaay jodakar mahilaa shakti kee misaal kaayam karane men awashy saphal hogee
iti
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priy paathak
aapane pooree kahaanee pढ़ee isake lie man se dhanyawaad yah kahaanee kewal meree kalpanaa maatr hai isakaa kisee waastawik ghatanaa se koee sambandh naheen wyakt wichaar mere apane hain sahamat honaa yaa n honaa aapake oopar nirbhar hai aapakee sakaaraatmak tippaniyon kaa intazaar rahegaa😊🙏
- kalpanaa raamaanee
अंतिम भाग
शुभदा राजनीति के क ख ग से भी परिचित नहीं थी, वो कमलकांत जी के दल में शामिल तो हो गई मगर मन ही मन एक सिपाही के पहली बार मोर्चे पर जाने जैसी स्थिति से गुजर रही थी।
पहली बार चुनावी बैठक में जाने पर कमलकांत जी ने उसके अभियान की जानकारी के साथ सबसे उसका परिचय करवाया. शुभदा को उस नए माहौल में कुछ अनमनी देखकर उन्होंने उसे प्रोत्साहित करते हुए टिकट दिलवाने की ज़िम्मेदारी स्वयं पर लेकर चुनाव पूर्व के सारे कार्य अपने दल के पुराने, अनुभवी और ईमानदार कार्यकर्ताओं को सौंपने की बात कही। उसे केवल उनके सहयोग से प्रचार कार्य संभालना था।
चुनाव में तीन महीने ही शेष थे, अतः अभी से युद्ध स्तर पर तैयारियाँ आरम्भ कर दी गईं। शुभदा से मुख्य मुद्दे के सभी बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए उसके जन समुदाय को संबोधित करने के लिए भाषण का कच्चा मसौदा तैयार करने को कहा गया.
शुभदा ने कहानी में वर्णित अपने सारे विचार भाषण में शामिल किये. उसके आधार पर दल के विशेषज्ञों को उसपर कार्य करने को कहा गया।
पूरा भाषण तैयार होने पर उससे बोलने का अभ्यास करवाया गया। प्रचार अभियान पर उसे दल के महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं के साथ विशिष्ट स्थानों पर जन समुदाय को संबोधित करने के लिए भेजा जाने लगा।
जन सम्पर्क के दौरान दल के चुनाव चिह्न के साथ मुख्य मुद्दे को सुर्खियों में रखकर छपे हुए पर्चे बाँटे गए। शुभदा जहाँ भी जाती उसे अपार जन-समूह सुनने जुट जाता था. उसे जन-जन का, विशेषकर बहू-बेटियों का अपार स्नेह और समर्थन मिलने लगा।
जब-जब जहाँ भी चुनावी जुलूस निकाला जाता तो बहू-बेटियों और वरिष्ठ जनों का विशाल समुदाय साथ हो लेता था। परिणाम स्वरूप चुनाव सम्पन्न होने पर शुभदा अपने क्षेत्र से बहुमत से विजयी होकर विधायक के पद पर विधानसभा में पहुँच गई।
अब उसे धीरे धीरे कमलकांत जी के मार्गदर्शन में विधानसभा के नियम कायदे, चर्चा बहस, आदि समझकर आगे बढ़ना था। पद मिलते ही उसे सम्मान भी मिलने लगा. एक अरसे बाद वो समय भी आ गया जब नया कानून बनवाने के लिए विधेयक तैयार करके सदन में प्रस्तुत करना था।
शुभदा केवल कमलकांत जी के निर्देशन में हर कार्य को अंजाम देती रही. प्रश्नोत्तर काल के लिए भी उसे कमलकांत जी ने संभावित प्रश्नों के उत्तर तैयार करके उन्हें दिमाग में बिठाने को कहा.
शुभदा अब निडर हो चली थी. उसने बिना किसी हिचकिचाहट और घबराहट के हर तरह के वाद-विवाद, चर्चा-बहस में हिस्सा लिया. धीरे-धीरे विरोधी स्वर भी उसके पक्ष में होते गए.
था। शुभदा को विश्वास था कि युग बदलने के बाद भी अब तक चाहे महिलाओं की विवाह बाद पूर्ण स्वतंत्रता के लिए कोई युगपुरुष अवतरित नहीं हुआ हो मगर वरिष्ठ विधायक कमलकांत जी, ससुर अभिजित वर्मा जी और पति प्रभात जैसे महामानवों के योगदान के बिना उसका आगे बढ़ना इतना आसान नहीं था.
शुभदा का देखा हुआ सपना साकार होने में कितना समय लगेगा, या और कितनी समस्याएँ उत्पन्न होंगी, यह वो नहीं जानती, मगर उसे इतना विश्वास है कि वो इस युग के इतिहास में नया अध्याय जोड़कर महिला शक्ति की मिसाल कायम करने में अवश्य सफल होगी।
।।इति।।
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प्रिय पाठक
आपने पूरी कहानी पढ़ी. इसके लिए मन से धन्यवाद. यह कहानी केवल मेरी कल्पना मात्र है इसका किसी वास्तविक घटना से कोई सम्बन्ध नहीं. व्यक्त विचार मेरे अपने हैं. सहमत होना या न होना आपके ऊपर निर्भर है. आपकी सकारात्मक टिप्पणियों का इंतज़ार रहेगा।😊🙏
- कल्पना रामानी