माँ की दुआ maan kee duaa माँ की दुआ
ब्रह्म
के ब्रह्मांड पर,
उपकार है माँ की दुआ।
दैव्य
से हमको मिला, उपहार है माँ की दुआ।
भोग
भव के हैं सभी, फीके अगर संतान को
मिल
न पाए जो भुवन का,
सार है माँ की दुआ।
माँ
के होते छू लें हमको,
कटु हवाएँ, क्या मजाल
पीर
से माँगी हुई, मनुहार है माँ की दुआ।
शक्ति
का यह वृत्त है, संतान को घेरे हुए
काल
भी झुकता ये वो, दरबार है माँ की दुआ।
ज़िंदगी
का पुण्य हर, करती है अर्पण माँ हमें
प्रार्थनाओं
से भरा, आगार है माँ की दुआ।
व्याधियों
में संग रहती, है सदा साया बनी
हर
तरह की व्याधि का, उपचार
है माँ की दुआ।
भाँप
लेती मुश्किलों को, ओट
से अज्ञात की
बन
कवच आ जाती ऐसा, प्यार है माँ की दुआ।
लाख
हों दुश्मन बली, पर है हमारी जय अभंग
साथ
बलशाली अगर, तलवार है माँ की दुआ।
छोडकर
इह लोक माँ, चाहे बसे परलोक में
पर
सदा हमसे जुड़ा, वो तार है माँ की दुआ।
अर्ज़
है यह ‘कल्पना’, सुख सर्व को माँ का मिले
हर
सुखी परिवार का, आधार है माँ की दुआ।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
brahm
ke brahmaand par,
upakaar hai maan kee duaa
daivy
se hamako milaa, upahaar hai maan kee duaa
bhog
bhaw ke hain sabhee, pheeke agar santaan ko
mil
n paae jo bhuwan kaa,
saar hai maan kee duaa
maan
ke hote choo len hamako,
katu hawaaen, kyaa majaal
peer
se maangee huee, manuhaar hai maan kee duaa
shakti
kaa yah wriitt hai, santaan ko ghere hue
kaal
bhee jhukataa ye wo, darabaar hai maan kee duaa
zindagee
kaa puny har, karatee hai arpan maan hamen
praarthanaaon
se bharaa, aagaar hai maan kee duaa
wyaadhiyon
men sang rahatee, hai sadaa saayaa banee
har
tarah kee wyaadhi kaa, upachaar
hai maan kee duaa
bhaanp
letee mushkilon ko, ot
se ajnaat kee
ban
kawach aa jaatee aisaa, pyaar hai maan kee duaa
laakh
hon dushman balee, par hai hamaaree jay abhang
saath
balashaalee agar, talawaar hai maan kee duaa
chodakar
ih lok maan, chaahe base paralok men
par
sadaa hamase judaa, wo taar hai maan kee duaa
arz
hai yah ‘kalpanaa’, sukh sarv ko maan kaa mile
har
sukhee pariwaar kaa, aadhaar hai maan kee duaa
-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
ब्रह्म
के ब्रह्मांड पर,
उपकार है माँ की दुआ।
दैव्य
से हमको मिला, उपहार है माँ की दुआ।
भोग
भव के हैं सभी, फीके अगर संतान को
मिल
न पाए जो भुवन का,
सार है माँ की दुआ।
माँ
के होते छू लें हमको,
कटु हवाएँ, क्या मजाल
पीर
से माँगी हुई, मनुहार है माँ की दुआ।
शक्ति
का यह वृत्त है, संतान को घेरे हुए
काल
भी झुकता ये वो, दरबार है माँ की दुआ।
ज़िंदगी
का पुण्य हर, करती है अर्पण माँ हमें
प्रार्थनाओं
से भरा, आगार है माँ की दुआ।
व्याधियों
में संग रहती, है सदा साया बनी
हर
तरह की व्याधि का, उपचार
है माँ की दुआ।
भाँप
लेती मुश्किलों को, ओट
से अज्ञात की
बन
कवच आ जाती ऐसा, प्यार है माँ की दुआ।
लाख
हों दुश्मन बली, पर है हमारी जय अभंग
साथ
बलशाली अगर, तलवार है माँ की दुआ।
छोडकर
इह लोक माँ, चाहे बसे परलोक में
पर
सदा हमसे जुड़ा, वो तार है माँ की दुआ।
अर्ज़
है यह ‘कल्पना’, सुख सर्व को माँ का मिले
हर
सुखी परिवार का, आधार है माँ की दुआ।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी