कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४५ / २०४ № 45 of 204 रचना ४५ / २०४
१४ मई २०१४ 14 May 2014 १४ मई २०१४

छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब cheen sakataa hai bhalaa koee kisee kaa kyaa naseeb छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब

छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब?

आज तक वैसा हुआ जैसा कि जिसका था नसीब।

माँ तो होती है सभी की,

जो जगत के जीव हैं

मातृ सुख किसको मिलेगा,

ये मगर लिखता नसीब।

कर दे राजा को भिखारी और राजा रंक को

अर्श से भी फर्श पर,

लाकर बिठा देता नसीब।

बिन बहाए स्वेद पा लेता है कोई चंद्रमा

तो कभी मेहनत को भी होता नहीं दाना नसीब।

लाख धोखे छल-कपट से, ले डकार औरों के हक़

पर टिकेगा ढिंग तेरे, जो लिख चुका तेरा नसीब।

दोष हो जाते बरी,

निर्दोष बन जाते सज़ा

छटपटाते मीन बन,

जिनका हुआ काला नसीब।

दीप जल सबके लिए,

पाता है केवल कालिमा,

पर जलाते जो उसे,

पाते उजालों का नसीब।

‘कल्पना’

फिर द्वेष कैसा, दूसरों के भाग्य से,

क्यों न शुभ कर्मों से लिक्खें, हम स्वयं अपना नसीब।

------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

cheen sakataa hai bhalaa koee kisee kaa kyaa naseeb?

·

aaj tak waisaa huaa jaisaa ki jisakaa thaa naseeb

·

maan to hotee hai sabhee kee,

jo jagat ke jeew hain

·

maatrii sukh kisako milegaa,

ye magar likhataa naseeb

·

kar de raajaa ko bhikhaaree aur raajaa rank ko

·

arsh se bhee pharsh par,

laakar bithaa detaa naseeb

·

bin bahaae sved paa letaa hai koee chandramaa

·

to kabhee mehanat ko bhee hotaa naheen daanaa naseeb

·

laakh dhokhe chal-kapat se, le dakaar auron ke haq

·

par tikegaa dhing tere, jo likh chukaa teraa naseeb

·

dosh ho jaate baree,

nirdosh ban jaate sazaa

·

chatapataate meen ban,

jinakaa huaa kaalaa naseeb

·

deep jal sabake lie,

paataa hai kewal kaalimaa,

·

par jalaate jo use,

paate ujaalon kaa naseeb

·

‘kalpanaa’

phir dvesh kaisaa, doosaron ke bhaagy se,

·

kyon n shubh karmon se likkhen, ham svayan apanaa naseeb

·

------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब?

आज तक वैसा हुआ जैसा कि जिसका था नसीब।

माँ तो होती है सभी की,

जो जगत के जीव हैं

मातृ सुख किसको मिलेगा,

ये मगर लिखता नसीब।

कर दे राजा को भिखारी और राजा रंक को

अर्श से भी फर्श पर,

लाकर बिठा देता नसीब।

बिन बहाए स्वेद पा लेता है कोई चंद्रमा

तो कभी मेहनत को भी होता नहीं दाना नसीब।

लाख धोखे छल-कपट से, ले डकार औरों के हक़

पर टिकेगा ढिंग तेरे, जो लिख चुका तेरा नसीब।

दोष हो जाते बरी,

निर्दोष बन जाते सज़ा

छटपटाते मीन बन,

जिनका हुआ काला नसीब।

दीप जल सबके लिए,

पाता है केवल कालिमा,

पर जलाते जो उसे,

पाते उजालों का नसीब।

‘कल्पना’

फिर द्वेष कैसा, दूसरों के भाग्य से,

क्यों न शुभ कर्मों से लिक्खें, हम स्वयं अपना नसीब।

------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗