कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९७ / २०४ № 197 of 204 रचना १९७ / २०४
१२ नवम्बर २०२० 12 November 2020 १२ नवम्बर २०२०

कुदरत kudarat कुदरत

हरी चदरिया तहा रही कुदरत

सबक हमें अब सिखा रही कुदरत

विष-बेलें तो हमने ही बोईं

उनका ही विष पिला रही कुदरत

उँगली-इशारा देख न पाए हम

अब उँगली पर नचा रही कुदरत

धूल बना दी हमने नम माटी

हमें धूल अब चटा रही कुदरत

हमने उसका रस निचोड़ डाला

हमें रसातल दिखा रही कुदरत

हाथ छुड़ाया उससे मैत्री का

अब तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

हमने उसके लिए कुआँ खोदा

खाई में हमें धका रही कुदरत

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

अब हमको ही सता रही कुदरत

- कल्पना रामानी

haree chadariyaa tahaa rahee kudarat

sabak hamen ab sikhaa rahee kudarat

·

wish-belen to hamane hee boeen

unakaa hee wish pilaa rahee kudarat

·

ungalee-ishaaraa dekh n paae ham

ab ungalee par nachaa rahee kudarat

·

dhool banaa dee hamane nam maatee

hamen dhool ab chataa rahee kudarat

·

hamane usakaa ras nichod daalaa

hamen rasaatal dikhaa rahee kudarat

·

haath chudaayaa usase maitree kaa

ab to chakke chudaa rahee kudarat

·

hamane usake lie kuaan khodaa

khaaee men hamen dhakaa rahee kudarat

·

hamane 'kalpanaa' use sataayaa hai

ab hamako hee sataa rahee kudarat

·

- kalpanaa raamaanee

हरी चदरिया तहा रही कुदरत

सबक हमें अब सिखा रही कुदरत

विष-बेलें तो हमने ही बोईं

उनका ही विष पिला रही कुदरत

उँगली-इशारा देख न पाए हम

अब उँगली पर नचा रही कुदरत

धूल बना दी हमने नम माटी

हमें धूल अब चटा रही कुदरत

हमने उसका रस निचोड़ डाला

हमें रसातल दिखा रही कुदरत

हाथ छुड़ाया उससे मैत्री का

अब तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

हमने उसके लिए कुआँ खोदा

खाई में हमें धका रही कुदरत

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

अब हमको ही सता रही कुदरत

- कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗