कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९८ / २०५ № 198 of 205 रचना १९८ / २०५
१२ नवम्बर २०२० 12 November 2020 १२ नवम्बर २०२०

कुदरत kudarat कुदरत

हरी चदरिया तहा रही कुदरत

सबक हमें अब सिखा रही कुदरत

॥

विष-बेलें तो हमने ही बोईं

उनका ही विष पिला रही कुदरत

॥

उँगली-इशारा देख न पाए हम

अब उँगली पर नचा रही कुदरत

॥

धूल बना दी हमने नम माटी

हमें धूल अब चटा रही कुदरत

॥

हमने उसका रस निचोड़ डाला

हमें रसातल दिखा रही कुदरत

॥

हाथ छुड़ाया उससे मैत्री का

अब तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

॥

हमने उसके लिए कुआँ खोदा

खाई में हमें धका रही कुदरत

॥

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

अब हमको ही सता रही कुदरत

॥

- कल्पना रामानी

haree chadariyaa tahaa rahee kudarat

sabak hamen ab sikhaa rahee kudarat

·

wish-belen to hamane hee boeen

unakaa hee wish pilaa rahee kudarat

·

ungalee-ishaaraa dekh n paae ham

ab ungalee par nachaa rahee kudarat

·

dhool banaa dee hamane nam maatee

hamen dhool ab chataa rahee kudarat

·

hamane usakaa ras nichod daalaa

hamen rasaatal dikhaa rahee kudarat

·

haath chudaayaa usase maitree kaa

ab to chakke chudaa rahee kudarat

·

hamane usake lie kuaan khodaa

khaaee men hamen dhakaa rahee kudarat

·

hamane 'kalpanaa' use sataayaa hai

ab hamako hee sataa rahee kudarat

·

- kalpanaa raamaanee

हरी चदरिया तहा रही कुदरत

सबक हमें अब सिखा रही कुदरत

॥

विष-बेलें तो हमने ही बोईं

उनका ही विष पिला रही कुदरत

॥

उँगली-इशारा देख न पाए हम

अब उँगली पर नचा रही कुदरत

॥

धूल बना दी हमने नम माटी

हमें धूल अब चटा रही कुदरत

॥

हमने उसका रस निचोड़ डाला

हमें रसातल दिखा रही कुदरत

॥

हाथ छुड़ाया उससे मैत्री का

अब तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

॥

हमने उसके लिए कुआँ खोदा

खाई में हमें धका रही कुदरत

॥

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

अब हमको ही सता रही कुदरत

॥

- कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗