ओस की बूंदें os kee boonden ओस की बूंदें
सुनहरी भोर बागों में
बिछाती ओस की बूँदें!
नयन का नूर होती हैं
नवेली ओस की बूँदें!
चपल भँवरों की कलियों से
चुहल पर मुग्ध सी होतीं
सुरों में साथ देती हैं
सुहानी ओस की बूँदें!
चितेरा कौन है जो रात
में जाजम बिछा जाता
न जाने रैन कब बुनती
अकेली ओस की बूँदें!
करिश्मा है ये कुदरत का
या फिर जादू कोई उसका
घुमाकर जो छड़ी कोई
गिराती ओस की बूँदें!
नवल सूरज की किरणों में
छिपी होती हैं ये शायद
जो पुरवाई पवन लाती
सुधा सी ओस की बूँदें!
टहलने चल पड़ें मित्रों
प्रकृति के रूप को निरखें
न जाने कब बिखर जाएँ
फरेबी ओस की बूँदें!
sunaharee bhor baagon men
bichaatee os kee boonden!
nayan kaa noor hotee hain
nawelee os kee boonden!
chapal bhanvaron kee kaliyon se
chuhal par mugdh see hoteen
suron men saath detee hain
suhaanee os kee boonden!
chiteraa kaun hai jo raat
men jaajam bichaa jaataa
n jaane rain kab bunatee
akelee os kee boonden!
karishmaa hai ye kudarat kaa
yaa phir jaadoo koee usakaa
ghumaakar jo chadee koee
giraatee os kee boonden!
nawal sooraj kee kiranon men
chipee hotee hain ye shaayad
jo purawaaee pawan laatee
sudhaa see os kee boonden!
tahalane chal paden mitron
prakriiti ke roop ko nirakhen
n jaane kab bikhar jaaen
pharebee os kee boonden!
सुनहरी भोर बागों में
बिछाती ओस की बूँदें!
नयन का नूर होती हैं
नवेली ओस की बूँदें!
चपल भँवरों की कलियों से
चुहल पर मुग्ध सी होतीं
सुरों में साथ देती हैं
सुहानी ओस की बूँदें!
चितेरा कौन है जो रात
में जाजम बिछा जाता
न जाने रैन कब बुनती
अकेली ओस की बूँदें!
करिश्मा है ये कुदरत का
या फिर जादू कोई उसका
घुमाकर जो छड़ी कोई
गिराती ओस की बूँदें!
नवल सूरज की किरणों में
छिपी होती हैं ये शायद
जो पुरवाई पवन लाती
सुधा सी ओस की बूँदें!
टहलने चल पड़ें मित्रों
प्रकृति के रूप को निरखें
न जाने कब बिखर जाएँ
फरेबी ओस की बूँदें!