कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९८ / २०४ № 198 of 204 रचना १९८ / २०४
१२ नवम्बर २०२० 12 November 2020 १२ नवम्बर २०२०

ओस की बूंदें os kee boonden ओस की बूंदें

सुनहरी भोर बागों में

बिछाती ओस की बूँदें!

नयन का नूर होती हैं

नवेली ओस की बूँदें!

चपल भँवरों की कलियों से

चुहल पर मुग्ध सी होतीं

सुरों में साथ देती हैं

सुहानी ओस की बूँदें!

चितेरा कौन है जो रात

में जाजम बिछा जाता

न जाने रैन कब बुनती

अकेली ओस की बूँदें!

करिश्मा है ये कुदरत का

या फिर जादू कोई उसका

घुमाकर जो छड़ी कोई

गिराती ओस की बूँदें!

नवल सूरज की किरणों में

छिपी होती हैं ये शायद

जो पुरवाई पवन लाती

सुधा सी ओस की बूँदें!

टहलने चल पड़ें मित्रों

प्रकृति के रूप को निरखें

न जाने कब बिखर जाएँ

फरेबी ओस की बूँदें!

sunaharee bhor baagon men

bichaatee os kee boonden!

nayan kaa noor hotee hain

nawelee os kee boonden!

·

chapal bhanvaron kee kaliyon se

chuhal par mugdh see hoteen

suron men saath detee hain

suhaanee os kee boonden!

·

chiteraa kaun hai jo raat

men jaajam bichaa jaataa

n jaane rain kab bunatee

akelee os kee boonden!

·

karishmaa hai ye kudarat kaa

yaa phir jaadoo koee usakaa

ghumaakar jo chadee koee

giraatee os kee boonden!

·

nawal sooraj kee kiranon men

chipee hotee hain ye shaayad

jo purawaaee pawan laatee

sudhaa see os kee boonden!

·

tahalane chal paden mitron

prakriiti ke roop ko nirakhen

n jaane kab bikhar jaaen

pharebee os kee boonden!

सुनहरी भोर बागों में

बिछाती ओस की बूँदें!

नयन का नूर होती हैं

नवेली ओस की बूँदें!

चपल भँवरों की कलियों से

चुहल पर मुग्ध सी होतीं

सुरों में साथ देती हैं

सुहानी ओस की बूँदें!

चितेरा कौन है जो रात

में जाजम बिछा जाता

न जाने रैन कब बुनती

अकेली ओस की बूँदें!

करिश्मा है ये कुदरत का

या फिर जादू कोई उसका

घुमाकर जो छड़ी कोई

गिराती ओस की बूँदें!

नवल सूरज की किरणों में

छिपी होती हैं ये शायद

जो पुरवाई पवन लाती

सुधा सी ओस की बूँदें!

टहलने चल पड़ें मित्रों

प्रकृति के रूप को निरखें

न जाने कब बिखर जाएँ

फरेबी ओस की बूँदें!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗