कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २६ / ११४ № 26 of 114 रचना २६ / ११४
१८ दिसम्बर २०१६ 18 December 2016 १८ दिसम्बर २०१६

लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२ laghukathaaen-gaagar men saagar 6 se 12 लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२

६)

माँ के लिए

अपनी पत्नी व बच्चों के साथ दीपावली की ख़रीदारी के

लिए कई घंटों से निकले परेश की नज़रें माल में अचानक कपड़ों के एक स्टाल पर टंगी हुई

सुंदर सी साड़ी पर ठहर गईं। उसने पत्नी को

आवाज़ देकर बुलाया और पूछा-

“सुधा डियर,

यह साड़ी तुम्हारी माँ के ऊपर कैसी लगेगी”?

- अरे वाह! बहुत सुंदर साड़ी है,

यह कलर तो ममा को बहुत पसंद है खूब फबेगा उनके ऊपर,

लेकिन तुम उन्हें यह

6)

maan ke lie

·

apanee patnee w bachchon ke saath deepaawalee kee kareedaaree ke

lie kaee ghanton se nikale paresh kee nazaren maal men achaanak kapadon ke ek staal par tangee huee

sundar see saadee par thahar gaeen usane patnee ko

aawaaz dekar bulaayaa aur poochaa-

·

“sudhaa diyar,

yah saadee tumhaaree maan ke oopar kaisee lagegee”?

·

- are waah! bahut sundar saadee hai,

yah kalar to mamaa ko bahut pasand hai khoob phabegaa unake oopar,

lekin tum unhen yah

६)

माँ के लिए

अपनी पत्नी व बच्चों के साथ दीपावली की ख़रीदारी के

लिए कई घंटों से निकले परेश की नज़रें माल में अचानक कपड़ों के एक स्टाल पर टंगी हुई

सुंदर सी साड़ी पर ठहर गईं। उसने पत्नी को

आवाज़ देकर बुलाया और पूछा-

“सुधा डियर,

यह साड़ी तुम्हारी माँ के ऊपर कैसी लगेगी”?

- अरे वाह! बहुत सुंदर साड़ी है,

यह कलर तो ममा को बहुत पसंद है खूब फबेगा उनके ऊपर,

लेकिन तुम उन्हें यह

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗