लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२ laghukathaaen-gaagar men saagar 6 se 12 लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२
६)
माँ के लिए
अपनी पत्नी व बच्चों के साथ दीपावली की ख़रीदारी के
लिए कई घंटों से निकले परेश की नज़रें माल में अचानक कपड़ों के एक स्टाल पर टंगी हुई
सुंदर सी साड़ी पर ठहर गईं। उसने पत्नी को
आवाज़ देकर बुलाया और पूछा-
“सुधा डियर,
यह साड़ी तुम्हारी माँ के ऊपर कैसी लगेगी”?
- अरे वाह! बहुत सुंदर साड़ी है,
यह कलर तो ममा को बहुत पसंद है खूब फबेगा उनके ऊपर,
लेकिन तुम उन्हें यह
6)
maan ke lie
apanee patnee w bachchon ke saath deepaawalee kee kareedaaree ke
lie kaee ghanton se nikale paresh kee nazaren maal men achaanak kapadon ke ek staal par tangee huee
sundar see saadee par thahar gaeen usane patnee ko
aawaaz dekar bulaayaa aur poochaa-
“sudhaa diyar,
yah saadee tumhaaree maan ke oopar kaisee lagegee”?
- are waah! bahut sundar saadee hai,
yah kalar to mamaa ko bahut pasand hai khoob phabegaa unake oopar,
lekin tum unhen yah
६)
माँ के लिए
अपनी पत्नी व बच्चों के साथ दीपावली की ख़रीदारी के
लिए कई घंटों से निकले परेश की नज़रें माल में अचानक कपड़ों के एक स्टाल पर टंगी हुई
सुंदर सी साड़ी पर ठहर गईं। उसने पत्नी को
आवाज़ देकर बुलाया और पूछा-
“सुधा डियर,
यह साड़ी तुम्हारी माँ के ऊपर कैसी लगेगी”?
- अरे वाह! बहुत सुंदर साड़ी है,
यह कलर तो ममा को बहुत पसंद है खूब फबेगा उनके ऊपर,
लेकिन तुम उन्हें यह