मातृ-मन maatrii-man मातृ-मन
घर के तरह-तरह
के कार्यों से थकी हारी विभा अपने अंतिम काम को अंजाम देने यानी छत से सूखे कपड़े
उतारने पहुँची तो फिर वही कबूतर, पानी का
भरा पात्र, बिखरे दाने और गंदगी का आलम
देखकर आग बबूला हो गई। कल ही तो उसने पानी का पात्र खाली करके उल्टा करके रख दिया
था और अपनी व्यस्तता का हवाला देकर सोनू को दाना-पानी रखने से मना कर दिया
था। कपड़े उतारना छोड़ गुस्से में भरी हुई
नीचे पहुँची
ghar ke tarah-tarah
ke kaaryon se thakee haaree wibhaa apane antim kaam ko anjaam dene yaanee chat se sookhe kapade
utaarane pahunchee to phir wahee kabootar, paanee kaa
bharaa paatr, bikhare daane aur gandagee kaa aalam
dekhakar aag baboolaa ho gaee kal hee to usane paanee kaa paatr khaalee karake ultaa karake rakh diyaa
thaa aur apanee wyastataa kaa hawaalaa dekar sonoo ko daanaa-paanee rakhane se manaa kar diyaa
thaa kapade utaaranaa chod gusse men bharee huee
neeche pahunchee
घर के तरह-तरह
के कार्यों से थकी हारी विभा अपने अंतिम काम को अंजाम देने यानी छत से सूखे कपड़े
उतारने पहुँची तो फिर वही कबूतर, पानी का
भरा पात्र, बिखरे दाने और गंदगी का आलम
देखकर आग बबूला हो गई। कल ही तो उसने पानी का पात्र खाली करके उल्टा करके रख दिया
था और अपनी व्यस्तता का हवाला देकर सोनू को दाना-पानी रखने से मना कर दिया
था। कपड़े उतारना छोड़ गुस्से में भरी हुई
नीचे पहुँची