कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २७ / ११४ № 27 of 114 रचना २७ / ११४
१८ दिसम्बर २०१६ 18 December 2016 १८ दिसम्बर २०१६

मातृ-मन maatrii-man मातृ-मन

घर के तरह-तरह

के कार्यों से थकी हारी विभा अपने अंतिम काम को अंजाम देने यानी छत से सूखे कपड़े

उतारने पहुँची तो फिर वही कबूतर, पानी का

भरा पात्र, बिखरे दाने और गंदगी का आलम

देखकर आग बबूला हो गई। कल ही तो उसने पानी का पात्र खाली करके उल्टा करके रख दिया

था और अपनी व्यस्तता का हवाला देकर सोनू को दाना-पानी रखने से मना कर दिया

था। कपड़े उतारना छोड़ गुस्से में भरी हुई

नीचे पहुँची

ghar ke tarah-tarah

ke kaaryon se thakee haaree wibhaa apane antim kaam ko anjaam dene yaanee chat se sookhe kapade

utaarane pahunchee to phir wahee kabootar, paanee kaa

bharaa paatr, bikhare daane aur gandagee kaa aalam

dekhakar aag baboolaa ho gaee kal hee to usane paanee kaa paatr khaalee karake ultaa karake rakh diyaa

thaa aur apanee wyastataa kaa hawaalaa dekar sonoo ko daanaa-paanee rakhane se manaa kar diyaa

thaa kapade utaaranaa chod gusse men bharee huee

neeche pahunchee

घर के तरह-तरह

के कार्यों से थकी हारी विभा अपने अंतिम काम को अंजाम देने यानी छत से सूखे कपड़े

उतारने पहुँची तो फिर वही कबूतर, पानी का

भरा पात्र, बिखरे दाने और गंदगी का आलम

देखकर आग बबूला हो गई। कल ही तो उसने पानी का पात्र खाली करके उल्टा करके रख दिया

था और अपनी व्यस्तता का हवाला देकर सोनू को दाना-पानी रखने से मना कर दिया

था। कपड़े उतारना छोड़ गुस्से में भरी हुई

नीचे पहुँची

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗