कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २८ / ११४ № 28 of 114 रचना २८ / ११४
१८ दिसम्बर २०१६ 18 December 2016 १८ दिसम्बर २०१६

समझौता samajhautaa समझौता

माँ को आते देख,

१२ वर्षीय बिटिया अंजलि ने चाय का पानी गैस-चूल्हे पर चढ़ा दिया,

लेकिन लाइटर दिखाने से पहले ही मंजरी ने

इशारे से मना कर दिया और अपने झोले से दूध की खाली थैलियों वाला पोली बैग

निकाल लिया। झट से सभी थैलियों को काटकर सीधा किया और पानी की पतीली में डाल दिया।

नीर को क्षीर में बदलते देख बिटिया की नयन-झील में जमी उदासी की काई में सहसा कमल

गए। खुशी से भरकर बोल उठी-आहा,

maan ko aate dekh,

12 warsheey bitiyaa anjali ne chaay kaa paanee gais-choolhe par chढ़aa diyaa,

lekin laaitar dikhaane se pahale hee manjaree ne

ishaare se manaa kar diyaa aur apane jhole se doodh kee khaalee thailiyon waalaa polee baig

nikaal liyaa jhat se sabhee thailiyon ko kaatakar seedhaa kiyaa aur paanee kee pateelee men daal diyaa

neer ko ksheer men badalate dekh bitiyaa kee nayan-jheel men jamee udaasee kee kaaee men sahasaa kamal

gae khushee se bharakar bol uthee-aahaa,

माँ को आते देख,

१२ वर्षीय बिटिया अंजलि ने चाय का पानी गैस-चूल्हे पर चढ़ा दिया,

लेकिन लाइटर दिखाने से पहले ही मंजरी ने

इशारे से मना कर दिया और अपने झोले से दूध की खाली थैलियों वाला पोली बैग

निकाल लिया। झट से सभी थैलियों को काटकर सीधा किया और पानी की पतीली में डाल दिया।

नीर को क्षीर में बदलते देख बिटिया की नयन-झील में जमी उदासी की काई में सहसा कमल

गए। खुशी से भरकर बोल उठी-आहा,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗