कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २५ / ११४ № 25 of 114 रचना २५ / ११४
१८ दिसम्बर २०१६ 18 December 2016 १८ दिसम्बर २०१६

अभय दान abhay daan अभय दान

“आस्था बेटी, अब उठो वहाँ से और नहा धोकर तैयार हो जाओ...जब देखो तब इसी पेड़ के आसपास बनी रहती हो, मिशन स्कूल में पढ़ते-पढ़ते लगता है तुम्हारा दिमाग भी मिशनरी हो चला है...”। उदिता ने भुनभुनाते हुए ६ वीं कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी से कहा। पिछले साल क्रिसमस पर उसी ने तो बेटी की ज़िद के कारण फर का यह पेड़ अपनी बगिया में लगवाया था। वो एक साल के अंदर बेटी में होने वाले आश्चर्य जनक

“aasthaa betee, ab utho wahaan se aur nahaa dhokar taiyaar ho jaaojab dekho tab isee ped ke aasapaas banee rahatee ho, mishan skool men pढ़te-pढ़te lagataa hai tumhaaraa dimaag bhee mishanaree ho chalaa hai” uditaa ne bhunabhunaate hue 6 ween kakshaa men pढ़ne waalee apanee betee se kahaa pichale saal krisamas par usee ne to betee kee zid ke kaaran phar kaa yah ped apanee bagiyaa men lagawaayaa thaa wo ek saal ke andar betee men hone waale aashchary janak

“आस्था बेटी, अब उठो वहाँ से और नहा धोकर तैयार हो जाओ...जब देखो तब इसी पेड़ के आसपास बनी रहती हो, मिशन स्कूल में पढ़ते-पढ़ते लगता है तुम्हारा दिमाग भी मिशनरी हो चला है...”। उदिता ने भुनभुनाते हुए ६ वीं कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी से कहा। पिछले साल क्रिसमस पर उसी ने तो बेटी की ज़िद के कारण फर का यह पेड़ अपनी बगिया में लगवाया था। वो एक साल के अंदर बेटी में होने वाले आश्चर्य जनक

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗