कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ७८ / ११४ № 78 of 114 रचना ७८ / ११४
३० अक्तूबर २०१९ 30 October 2019 ३० अक्तूबर २०१९

अन्नपूर्णा annapoornaa अन्नपूर्णा

उसकी अंतरात्मा चीख-चीख कर कह रही थी-

“अन्नपूर्णा, अगर इस अकाल के समय भी तुमने अपने संचित दानों का उपयोग नहीं किया तो तुम्हारे नाम की क्या सार्थकता?”।

और... अन्नपूर्णा ने

नोट बंदी से व्यथित पति को आज ज़रूरी राशन न जुटा पाने के कारण चिंतित देखकर बरसों से उनकी नज़रें बचाकर छोटे नोटों और रेजगारी के रूप में रखी हुई

अपनी सारी जमा-पूँजी उनको ही नज़र कर दी।

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usakee antaraatmaa cheekh-cheekh kar kah rahee thee-

·

“annapoornaa, agar is akaal ke samay bhee tumane apane sanchit daanon kaa upayog naheen kiyaa to tumhaare naam kee kyaa saarthakataa?”

·

aur annapoornaa ne

not bandee se wyathit pati ko aaj zarooree raashan n jutaa paane ke kaaran chintit dekhakar barason se unakee nazaren bachaakar chote noton aur rejagaaree ke roop men rakhee huee

apanee saaree jamaa-poonjee unako hee nazar kar dee

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उसकी अंतरात्मा चीख-चीख कर कह रही थी-

“अन्नपूर्णा, अगर इस अकाल के समय भी तुमने अपने संचित दानों का उपयोग नहीं किया तो तुम्हारे नाम की क्या सार्थकता?”।

और... अन्नपूर्णा ने

नोट बंदी से व्यथित पति को आज ज़रूरी राशन न जुटा पाने के कारण चिंतित देखकर बरसों से उनकी नज़रें बचाकर छोटे नोटों और रेजगारी के रूप में रखी हुई

अपनी सारी जमा-पूँजी उनको ही नज़र कर दी।

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कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗