कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६२ / २०५ № 162 of 205 रचना १६२ / २०५
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम) unakaa kat aaj daakiyaa laayaa{prem) उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम)

उनका ख़त आज डाकिया लाया।

फिर से भूला हुआ पता लाया।

॥

बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन

और सावन घनी घटा लाया।

॥

चाँद मुझको दिखा अमावस में

चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।

॥

रंग बिखरे युवा उमंगों के

तंग मौसम नई हवा लाया।

॥

फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे

दिल का दरिया अगर बहा लाया

॥

मेरा हर शे’र गूँजकर शायद

उनको इक बार फिर बुला लाया।

॥

दर्द इतना कभी न था दिल में

दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।

unakaa kat aaj daakiyaa laayaa

phir se bhoolaa huaa pataa laayaa

·

baad muddat ke gul khilaa aangan

aur saawan ghanee ghataa laayaa

·

chaand mujhako dikhaa amaawas men

chaandanee ko bhee sang liwaa laayaa

·

rang bikhare yuwaa umangon ke

tang mausam naee hawaa laayaa

·

phir milenge we kah gae the mujhe

dil kaa dariyaa agar bahaa laayaa

·

meraa har she’r goonjakar shaayad

unako ik baar phir bulaa laayaa

·

dard itanaa kabhee n thaa dil men

dil kahaan se ye ‘kalpanaa’ laayaa

उनका ख़त आज डाकिया लाया।

फिर से भूला हुआ पता लाया।

॥

बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन

और सावन घनी घटा लाया।

॥

चाँद मुझको दिखा अमावस में

चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।

॥

रंग बिखरे युवा उमंगों के

तंग मौसम नई हवा लाया।

॥

फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे

दिल का दरिया अगर बहा लाया

॥

मेरा हर शे’र गूँजकर शायद

उनको इक बार फिर बुला लाया।

॥

दर्द इतना कभी न था दिल में

दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗