उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम) unakaa kat aaj daakiyaa laayaa{prem) उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम)
उनका ख़त आज डाकिया लाया।
फिर से भूला हुआ पता लाया।
बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन
और सावन घनी घटा लाया।
चाँद मुझको दिखा अमावस में
चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।
रंग बिखरे युवा उमंगों के
तंग मौसम नई हवा लाया।
फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे
दिल का दरिया अगर बहा लाया
मेरा हर शे’र गूँजकर शायद
उनको इक बार फिर बुला लाया।
दर्द इतना कभी न था दिल में
दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।
unakaa kat aaj daakiyaa laayaa
phir se bhoolaa huaa pataa laayaa
baad muddat ke gul khilaa aangan
aur saawan ghanee ghataa laayaa
chaand mujhako dikhaa amaawas men
chaandanee ko bhee sang liwaa laayaa
rang bikhare yuwaa umangon ke
tang mausam naee hawaa laayaa
phir milenge we kah gae the mujhe
dil kaa dariyaa agar bahaa laayaa
meraa har she’r goonjakar shaayad
unako ik baar phir bulaa laayaa
dard itanaa kabhee n thaa dil men
dil kahaan se ye ‘kalpanaa’ laayaa
उनका ख़त आज डाकिया लाया।
फिर से भूला हुआ पता लाया।
बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन
और सावन घनी घटा लाया।
चाँद मुझको दिखा अमावस में
चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।
रंग बिखरे युवा उमंगों के
तंग मौसम नई हवा लाया।
फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे
दिल का दरिया अगर बहा लाया
मेरा हर शे’र गूँजकर शायद
उनको इक बार फिर बुला लाया।
दर्द इतना कभी न था दिल में
दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।