कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६१ / २०४ № 161 of 204 रचना १६१ / २०४
१ नवम्बर २०१९ 1 November 2019 १ नवम्बर २०१९

उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम) unakaa kat aaj daakiyaa laayaa{prem) उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम)

उनका ख़त आज डाकिया लाया।

फिर से भूला हुआ पता लाया।

बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन

और सावन घनी घटा लाया।

चाँद मुझको दिखा अमावस में

चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।

रंग बिखरे युवा उमंगों के

तंग मौसम नई हवा लाया।

फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे

दिल का दरिया अगर बहा लाया

मेरा हर शे’र गूँजकर शायद

उनको इक बार फिर बुला लाया।

दर्द इतना कभी न था दिल में

दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।

unakaa kat aaj daakiyaa laayaa

phir se bhoolaa huaa pataa laayaa

·

baad muddat ke gul khilaa aangan

aur saawan ghanee ghataa laayaa

·

chaand mujhako dikhaa amaawas men

chaandanee ko bhee sang liwaa laayaa

·

rang bikhare yuwaa umangon ke

tang mausam naee hawaa laayaa

·

phir milenge we kah gae the mujhe

dil kaa dariyaa agar bahaa laayaa

·

meraa har she’r goonjakar shaayad

unako ik baar phir bulaa laayaa

·

dard itanaa kabhee n thaa dil men

dil kahaan se ye ‘kalpanaa’ laayaa

उनका ख़त आज डाकिया लाया।

फिर से भूला हुआ पता लाया।

बाद मुद्दत के गुल खिला आँगन

और सावन घनी घटा लाया।

चाँद मुझको दिखा अमावस में

चाँदनी को भी सँग लिवा लाया।

रंग बिखरे युवा उमंगों के

तंग मौसम नई हवा लाया।

फिर मिलेंगे वे कह गए थे मुझे

दिल का दरिया अगर बहा लाया

मेरा हर शे’र गूँजकर शायद

उनको इक बार फिर बुला लाया।

दर्द इतना कभी न था दिल में

दिल कहाँ से ये ‘कल्पना’ लाया।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗