कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३३ / १६४ № 33 of 164 रचना ३३ / १६४
४ सितम्बर २०१३ 4 September 2013 ४ सितम्बर २०१३

जय भारत माँ! jay bhaarat maan! जय भारत माँ!

यह भूमि अहा! मम भारत की।

॥

सुजला, सुफला, महकी-महकी।

॥

इस भू पर जन्म अनंत लिए।

॥

सुख सूर्य, अनेक बसंत जिये।

॥

यह स्वर्ग धरा पर और कहाँ?

॥

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

॥

सिर, ताज हिमालय शोभित है।

॥

चरणों पर सागर मोहित है।

॥

हर रात यहाँ पर पूनम की।

॥

हर प्रात सुवर्णिम सूरज की।

॥

बहतीं यमुना अरु गंग यहाँ।

॥

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

॥

यह भूमि पुरातन वैभव

yah bhoomi ahaa! mam bhaarat kee

·

sujalaa, suphalaa, mahakee-mahakee

·

is bhoo par janm anant lie

·

sukh soory, anek basant jiye

·

yah svarg dharaa par aur kahaan?

·

jay bhaarat maan! jay bhaarat maan!

·

sir, taaj himaalay shobhit hai

·

charanon par saagar mohit hai

·

har raat yahaan par poonam kee

·

har praat suwarnim sooraj kee

·

bahateen yamunaa aru gang yahaan

·

jay bhaarat maan! jay bhaarat maan!

·

yah bhoomi puraatan waibhaw

यह भूमि अहा! मम भारत की।

॥

सुजला, सुफला, महकी-महकी।

॥

इस भू पर जन्म अनंत लिए।

॥

सुख सूर्य, अनेक बसंत जिये।

॥

यह स्वर्ग धरा पर और कहाँ?

॥

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

॥

सिर, ताज हिमालय शोभित है।

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चरणों पर सागर मोहित है।

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हर रात यहाँ पर पूनम की।

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हर प्रात सुवर्णिम सूरज की।

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बहतीं यमुना अरु गंग यहाँ।

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जय भारत माँ! जय भारत माँ!

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यह भूमि पुरातन वैभव

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗