कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३३ / १६३ № 33 of 163 रचना ३३ / १६३
४ सितम्बर २०१३ 4 September 2013 ४ सितम्बर २०१३

जय भारत माँ! jay bhaarat maan! जय भारत माँ!

यह भूमि अहा! मम भारत की।

सुजला, सुफला, महकी-महकी।

इस भू पर जन्म अनंत लिए।

सुख सूर्य, अनेक बसंत जिये।

यह स्वर्ग धरा पर और कहाँ?

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

सिर, ताज हिमालय शोभित है।

चरणों पर सागर मोहित है।

हर रात यहाँ पर पूनम की।

हर प्रात सुवर्णिम सूरज की।

बहतीं यमुना अरु गंग यहाँ।

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

यह भूमि पुरातन वैभव

yah bhoomi ahaa! mam bhaarat kee

·

sujalaa, suphalaa, mahakee-mahakee

·

is bhoo par janm anant lie

·

sukh soory, anek basant jiye

·

yah svarg dharaa par aur kahaan?

·

jay bhaarat maan! jay bhaarat maan!

·

sir, taaj himaalay shobhit hai

·

charanon par saagar mohit hai

·

har raat yahaan par poonam kee

·

har praat suwarnim sooraj kee

·

bahateen yamunaa aru gang yahaan

·

jay bhaarat maan! jay bhaarat maan!

·

yah bhoomi puraatan waibhaw

यह भूमि अहा! मम भारत की।

सुजला, सुफला, महकी-महकी।

इस भू पर जन्म अनंत लिए।

सुख सूर्य, अनेक बसंत जिये।

यह स्वर्ग धरा पर और कहाँ?

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

सिर, ताज हिमालय शोभित है।

चरणों पर सागर मोहित है।

हर रात यहाँ पर पूनम की।

हर प्रात सुवर्णिम सूरज की।

बहतीं यमुना अरु गंग यहाँ।

जय भारत माँ! जय भारत माँ!

यह भूमि पुरातन वैभव

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗