कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १० / २०५ № 10 of 205 रचना १० / २०५
४ अगस्त २०१३ 4 August 2013 ४ अगस्त २०१३

कैसे सुफल पाएँगे आप kaise suphal paaenge aap कैसे सुफल पाएँगे आप

हक़ किसी का छीनकर, कैसे सुफल पाएँगे आप?

॥

बीज जैसे बो रहे, वैसी फसल पाएँगे आप।

॥

यों अगर जलते रहे, कालिख भरे मन के दिये

॥

बंधुवर! सच मानिए, निज अंध कल पाएँगे आप।

॥

भूलकर अमृत वचन, यदि विष उगलते ही रहे

॥

फिर निगलने के लिए भी, घट-गरल पाएँगे आप।

॥

निर्बलों की नाव गर, मझधार मोड़ी आपने

॥

दैव्य के इंसाफ से,

बचकर न चल पाएँगे आप।

॥

प्यार देकर प्यार लें, आनंद पल-पल बाँटिए

॥

मित्र!

तय है तृप्त मन, आनंद-पल पाएँगे आप।

॥

शुद्ध भावों से रचें,

कोमल गज़ल के काफिये

॥

क्षुब्ध मन के पंक में, खिलते कमल पाएँगे आप।

॥

याद हो वेदों की भाषा, मान संस्कृति का भी हो

॥

हे मनुज! सम्मान का, विस्तृत पटल पाएँगे आप।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

haq kisee kaa cheenakar, kaise suphal paaenge aap?

·

beej jaise bo rahe, waisee phasal paaenge aap

·

yon agar jalate rahe, kaalikh bhare man ke diye

·

bandhuwar! sach maanie, nij andh kal paaenge aap

·

bhoolakar amriit wachan, yadi wish ugalate hee rahe

·

phir nigalane ke lie bhee, ghat-garal paaenge aap

·

nirbalon kee naaw gar, majhadhaar modee aapane

·

daivy ke insaaph se,

bachakar n chal paaenge aap

·

pyaar dekar pyaar len, aanand pal-pal baantie

·

mitr!

tay hai triipt man, aanand-pal paaenge aap

·

shuddh bhaawon se rachen,

komal gazal ke kaaphiye

·

kshubdh man ke pank men, khilate kamal paaenge aap

·

yaad ho wedon kee bhaashaa, maan sanskriiti kaa bhee ho

·

he manuj! sammaan kaa, wistriit patal paaenge aap

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हक़ किसी का छीनकर, कैसे सुफल पाएँगे आप?

॥

बीज जैसे बो रहे, वैसी फसल पाएँगे आप।

॥

यों अगर जलते रहे, कालिख भरे मन के दिये

॥

बंधुवर! सच मानिए, निज अंध कल पाएँगे आप।

॥

भूलकर अमृत वचन, यदि विष उगलते ही रहे

॥

फिर निगलने के लिए भी, घट-गरल पाएँगे आप।

॥

निर्बलों की नाव गर, मझधार मोड़ी आपने

॥

दैव्य के इंसाफ से,

बचकर न चल पाएँगे आप।

॥

प्यार देकर प्यार लें, आनंद पल-पल बाँटिए

॥

मित्र!

तय है तृप्त मन, आनंद-पल पाएँगे आप।

॥

शुद्ध भावों से रचें,

कोमल गज़ल के काफिये

॥

क्षुब्ध मन के पंक में, खिलते कमल पाएँगे आप।

॥

याद हो वेदों की भाषा, मान संस्कृति का भी हो

॥

हे मनुज! सम्मान का, विस्तृत पटल पाएँगे आप।

॥

-कल्पना रामानी

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प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗