कैसे सुफल पाएँगे आप kaise suphal paaenge aap कैसे सुफल पाएँगे आप
हक़ किसी का छीनकर, कैसे सुफल पाएँगे आप?
बीज जैसे बो रहे, वैसी फसल पाएँगे आप।
यों अगर जलते रहे, कालिख भरे मन के दिये
बंधुवर! सच मानिए, निज अंध कल पाएँगे आप।
भूलकर अमृत वचन, यदि विष उगलते ही रहे
फिर निगलने के लिए भी, घट-गरल पाएँगे आप।
निर्बलों की नाव गर, मझधार मोड़ी आपने
दैव्य के इंसाफ से,
बचकर न चल पाएँगे आप।
प्यार देकर प्यार लें, आनंद पल-पल बाँटिए
मित्र!
तय है तृप्त मन, आनंद-पल पाएँगे आप।
शुद्ध भावों से रचें,
कोमल गज़ल के काफिये
क्षुब्ध मन के पंक में, खिलते कमल पाएँगे आप।
याद हो वेदों की भाषा, मान संस्कृति का भी हो
हे मनुज! सम्मान का, विस्तृत पटल पाएँगे आप।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
haq kisee kaa cheenakar, kaise suphal paaenge aap?
beej jaise bo rahe, waisee phasal paaenge aap
yon agar jalate rahe, kaalikh bhare man ke diye
bandhuwar! sach maanie, nij andh kal paaenge aap
bhoolakar amriit wachan, yadi wish ugalate hee rahe
phir nigalane ke lie bhee, ghat-garal paaenge aap
nirbalon kee naaw gar, majhadhaar modee aapane
daivy ke insaaph se,
bachakar n chal paaenge aap
pyaar dekar pyaar len, aanand pal-pal baantie
mitr!
tay hai triipt man, aanand-pal paaenge aap
shuddh bhaawon se rachen,
komal gazal ke kaaphiye
kshubdh man ke pank men, khilate kamal paaenge aap
yaad ho wedon kee bhaashaa, maan sanskriiti kaa bhee ho
he manuj! sammaan kaa, wistriit patal paaenge aap
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
हक़ किसी का छीनकर, कैसे सुफल पाएँगे आप?
बीज जैसे बो रहे, वैसी फसल पाएँगे आप।
यों अगर जलते रहे, कालिख भरे मन के दिये
बंधुवर! सच मानिए, निज अंध कल पाएँगे आप।
भूलकर अमृत वचन, यदि विष उगलते ही रहे
फिर निगलने के लिए भी, घट-गरल पाएँगे आप।
निर्बलों की नाव गर, मझधार मोड़ी आपने
दैव्य के इंसाफ से,
बचकर न चल पाएँगे आप।
प्यार देकर प्यार लें, आनंद पल-पल बाँटिए
मित्र!
तय है तृप्त मन, आनंद-पल पाएँगे आप।
शुद्ध भावों से रचें,
कोमल गज़ल के काफिये
क्षुब्ध मन के पंक में, खिलते कमल पाएँगे आप।
याद हो वेदों की भाषा, मान संस्कृति का भी हो
हे मनुज! सम्मान का, विस्तृत पटल पाएँगे आप।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी