कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३४ / २०४ № 134 of 204 रचना १३४ / २०४
१४ अगस्त २०१६ 14 August 2016 १४ अगस्त २०१६

प्यारा अमर निशान pyaaraa amar nishaan प्यारा अमर निशान

स्वतंत्रता

की वर्षगाँठ है, शिखर-शिखर पर तान।

लहराएँगे

आज तिरंगा, पूर्ण मान सम्मान।

अगस्त

पंद्रह सैंतालिस का दिन पावन था वो

मुक्त

हुआ जब फिरंगियों से अपना हिंदुस्तान।

ज्यों

ही ले संदेश चल पड़ी, सुरभित नवल

हवा

पाखी

भी वंदन को पहुँचे,

तय कर अथक उड़ान।

करने

को अभिषेक आ गए, उमड़-घुमड़ बदरा

कहीं

बज उठे शंख-घंटियाँ, गूँजी कहीं अजान।

नन्हें

बालक, नन्हें झंडे टाँगे वस्त्रों में

घूम

रहे हैं लिए हाथ में, दोने भर मिष्ठान।

मैदानों

में भी परेड के खूब नज़ारे हैं

कहीं

ध्वनित है मधुर सुरों में, जन-गण-मन जय गान।

इस

दिन वीर शहीदों को भी याद सभी करते

जो

यौवन में हुए देश पर तन मन से कुर्बान।

अब

ऐसे संकल्प प्रगति के, मिलकर सभी करें।

बनी

रहे ज्यों भारत-माँ की सबसे ऊँची शान।

रहे

‘कल्पना’ सदा अखंडित आज़ादी प्यारी

युगों-युगों

तक तना रहे, यह प्यारा अमर निशान।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

svatantrataa

kee warshagaanth hai, shikhar-shikhar par taan

·

laharaaenge

aaj tirangaa, poorn maan sammaan

·

agast

pandrah saintaalis kaa din paawan thaa wo

·

mukt

huaa jab phirangiyon se apanaa hindustaan

·

jyon

hee le sandesh chal padee, surabhit nawal

hawaa

·

paakhee

bhee wandan ko pahunche,

tay kar athak udaan

·

karane

ko abhishek aa gae, umad-ghumad badaraa

·

kaheen

baj uthe shankh-ghantiyaan, goonjee kaheen ajaan

·

nanhen

baalak, nanhen jhande taange wastron men

·

ghoom

rahe hain lie haath men, done bhar mishthaan

·

maidaanon

men bhee pared ke khoob nazaare hain

·

kaheen

dhvanit hai madhur suron men, jan-gan-man jay gaan

·

is

din weer shaheedon ko bhee yaad sabhee karate

·

jo

yauwan men hue desh par tan man se kurbaan

·

ab

aise sankalp pragati ke, milakar sabhee karen

·

banee

rahe jyon bhaarat-maan kee sabase oonchee shaan

·

rahe

‘kalpanaa’ sadaa akhandit aazaadee pyaaree

·

yugon-yugon

tak tanaa rahe, yah pyaaraa amar nishaan

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

स्वतंत्रता

की वर्षगाँठ है, शिखर-शिखर पर तान।

लहराएँगे

आज तिरंगा, पूर्ण मान सम्मान।

अगस्त

पंद्रह सैंतालिस का दिन पावन था वो

मुक्त

हुआ जब फिरंगियों से अपना हिंदुस्तान।

ज्यों

ही ले संदेश चल पड़ी, सुरभित नवल

हवा

पाखी

भी वंदन को पहुँचे,

तय कर अथक उड़ान।

करने

को अभिषेक आ गए, उमड़-घुमड़ बदरा

कहीं

बज उठे शंख-घंटियाँ, गूँजी कहीं अजान।

नन्हें

बालक, नन्हें झंडे टाँगे वस्त्रों में

घूम

रहे हैं लिए हाथ में, दोने भर मिष्ठान।

मैदानों

में भी परेड के खूब नज़ारे हैं

कहीं

ध्वनित है मधुर सुरों में, जन-गण-मन जय गान।

इस

दिन वीर शहीदों को भी याद सभी करते

जो

यौवन में हुए देश पर तन मन से कुर्बान।

अब

ऐसे संकल्प प्रगति के, मिलकर सभी करें।

बनी

रहे ज्यों भारत-माँ की सबसे ऊँची शान।

रहे

‘कल्पना’ सदा अखंडित आज़ादी प्यारी

युगों-युगों

तक तना रहे, यह प्यारा अमर निशान।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗