कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३५ / २०५ № 135 of 205 रचना १३५ / २०५
१४ अगस्त २०१६ 14 August 2016 १४ अगस्त २०१६

प्यारा अमर निशान pyaaraa amar nishaan प्यारा अमर निशान

स्वतंत्रता

की वर्षगाँठ है, शिखर-शिखर पर तान।

॥

लहराएँगे

आज तिरंगा, पूर्ण मान सम्मान।

॥

अगस्त

पंद्रह सैंतालिस का दिन पावन था वो

॥

मुक्त

हुआ जब फिरंगियों से अपना हिंदुस्तान।

॥

ज्यों

ही ले संदेश चल पड़ी, सुरभित नवल

हवा

॥

पाखी

भी वंदन को पहुँचे,

तय कर अथक उड़ान।

॥

करने

को अभिषेक आ गए, उमड़-घुमड़ बदरा

॥

कहीं

बज उठे शंख-घंटियाँ, गूँजी कहीं अजान।

॥

नन्हें

बालक, नन्हें झंडे टाँगे वस्त्रों में

॥

घूम

रहे हैं लिए हाथ में, दोने भर मिष्ठान।

॥

मैदानों

में भी परेड के खूब नज़ारे हैं

॥

कहीं

ध्वनित है मधुर सुरों में, जन-गण-मन जय गान।

॥

इस

दिन वीर शहीदों को भी याद सभी करते

॥

जो

यौवन में हुए देश पर तन मन से कुर्बान।

॥

अब

ऐसे संकल्प प्रगति के, मिलकर सभी करें।

॥

बनी

रहे ज्यों भारत-माँ की सबसे ऊँची शान।

॥

रहे

‘कल्पना’ सदा अखंडित आज़ादी प्यारी

॥

युगों-युगों

तक तना रहे, यह प्यारा अमर निशान।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

svatantrataa

kee warshagaanth hai, shikhar-shikhar par taan

·

laharaaenge

aaj tirangaa, poorn maan sammaan

·

agast

pandrah saintaalis kaa din paawan thaa wo

·

mukt

huaa jab phirangiyon se apanaa hindustaan

·

jyon

hee le sandesh chal padee, surabhit nawal

hawaa

·

paakhee

bhee wandan ko pahunche,

tay kar athak udaan

·

karane

ko abhishek aa gae, umad-ghumad badaraa

·

kaheen

baj uthe shankh-ghantiyaan, goonjee kaheen ajaan

·

nanhen

baalak, nanhen jhande taange wastron men

·

ghoom

rahe hain lie haath men, done bhar mishthaan

·

maidaanon

men bhee pared ke khoob nazaare hain

·

kaheen

dhvanit hai madhur suron men, jan-gan-man jay gaan

·

is

din weer shaheedon ko bhee yaad sabhee karate

·

jo

yauwan men hue desh par tan man se kurbaan

·

ab

aise sankalp pragati ke, milakar sabhee karen

·

banee

rahe jyon bhaarat-maan kee sabase oonchee shaan

·

rahe

‘kalpanaa’ sadaa akhandit aazaadee pyaaree

·

yugon-yugon

tak tanaa rahe, yah pyaaraa amar nishaan

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

स्वतंत्रता

की वर्षगाँठ है, शिखर-शिखर पर तान।

॥

लहराएँगे

आज तिरंगा, पूर्ण मान सम्मान।

॥

अगस्त

पंद्रह सैंतालिस का दिन पावन था वो

॥

मुक्त

हुआ जब फिरंगियों से अपना हिंदुस्तान।

॥

ज्यों

ही ले संदेश चल पड़ी, सुरभित नवल

हवा

॥

पाखी

भी वंदन को पहुँचे,

तय कर अथक उड़ान।

॥

करने

को अभिषेक आ गए, उमड़-घुमड़ बदरा

॥

कहीं

बज उठे शंख-घंटियाँ, गूँजी कहीं अजान।

॥

नन्हें

बालक, नन्हें झंडे टाँगे वस्त्रों में

॥

घूम

रहे हैं लिए हाथ में, दोने भर मिष्ठान।

॥

मैदानों

में भी परेड के खूब नज़ारे हैं

॥

कहीं

ध्वनित है मधुर सुरों में, जन-गण-मन जय गान।

॥

इस

दिन वीर शहीदों को भी याद सभी करते

॥

जो

यौवन में हुए देश पर तन मन से कुर्बान।

॥

अब

ऐसे संकल्प प्रगति के, मिलकर सभी करें।

॥

बनी

रहे ज्यों भारत-माँ की सबसे ऊँची शान।

॥

रहे

‘कल्पना’ सदा अखंडित आज़ादी प्यारी

॥

युगों-युगों

तक तना रहे, यह प्यारा अमर निशान।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗