कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११० / २०५ № 110 of 205 रचना ११० / २०५
६ नवम्बर २०१५ 6 November 2015 ६ नवम्बर २०१५

ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली jyoti-deepak saukhy kaa upahaar deewaalee ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली

ज्योति-दीपक

सौख्य का उपहार दीवाली।

॥

बाँध

लाई गाँठ में फिर प्यार दीवाली।

॥

आस

के आखर उभर आए हवाओं में

॥

कर

रही धन-देवी का सत्कार दीवाली।

॥

बाँध

वंदनवार देहरी अल्पना रचकर

॥

शोभती

हर द्वार पर शुभकार दीवाली।

॥

पीर

हर, घर-घर सजाती धीर-बाती संग

॥

कोने-कोने

इक दिया क्रमवार दीवाली।

॥

जीतकर

मावस पटाखे छोड़ हर्षित हो

॥

सत्य

की करती तुमुल जयकार दीवाली।

॥

देह

से कितनी हों लंबी दूरियाँ चाहे

॥

जोड़

देती नेह के हिय तार दीवाली।

॥

मेट

मन से मैल, मंगल भाव के भूषण

॥

सौंपती

है विश्व को, हर बार दीवाली।

॥

पूज

लक्ष्मी मातु को पावन सुरों के संग

॥

जग

मनाता ‘कल्पना’ खुशवार दीवाली।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

jyoti-deepak

saukhy kaa upahaar deewaalee

·

baandh

laaee gaanth men phir pyaar deewaalee

·

aas

ke aakhar ubhar aae hawaaon men

·

kar

rahee dhan-dewee kaa satkaar deewaalee

·

baandh

wandanawaar deharee alpanaa rachakar

·

shobhatee

har dvaar par shubhakaar deewaalee

·

peer

har, ghar-ghar sajaatee dheer-baatee sang

·

kone-kone

ik diyaa kramawaar deewaalee

·

jeetakar

maawas pataakhe chod harshit ho

·

saty

kee karatee tumul jayakaar deewaalee

·

deh

se kitanee hon lanbee dooriyaan chaahe

·

jod

detee neh ke hiy taar deewaalee

·

met

man se mail, mangal bhaaw ke bhooshan

·

saunpatee

hai wishv ko, har baar deewaalee

·

pooj

lakshmee maatu ko paawan suron ke sang

·

jag

manaataa ‘kalpanaa’ khushawaar deewaalee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

ज्योति-दीपक

सौख्य का उपहार दीवाली।

॥

बाँध

लाई गाँठ में फिर प्यार दीवाली।

॥

आस

के आखर उभर आए हवाओं में

॥

कर

रही धन-देवी का सत्कार दीवाली।

॥

बाँध

वंदनवार देहरी अल्पना रचकर

॥

शोभती

हर द्वार पर शुभकार दीवाली।

॥

पीर

हर, घर-घर सजाती धीर-बाती संग

॥

कोने-कोने

इक दिया क्रमवार दीवाली।

॥

जीतकर

मावस पटाखे छोड़ हर्षित हो

॥

सत्य

की करती तुमुल जयकार दीवाली।

॥

देह

से कितनी हों लंबी दूरियाँ चाहे

॥

जोड़

देती नेह के हिय तार दीवाली।

॥

मेट

मन से मैल, मंगल भाव के भूषण

॥

सौंपती

है विश्व को, हर बार दीवाली।

॥

पूज

लक्ष्मी मातु को पावन सुरों के संग

॥

जग

मनाता ‘कल्पना’ खुशवार दीवाली।

॥

-कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗