कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०९ / २०४ № 109 of 204 रचना १०९ / २०४
६ नवम्बर २०१५ 6 November 2015 ६ नवम्बर २०१५

ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली jyoti-deepak saukhy kaa upahaar deewaalee ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली

ज्योति-दीपक

सौख्य का उपहार दीवाली।

बाँध

लाई गाँठ में फिर प्यार दीवाली।

आस

के आखर उभर आए हवाओं में

कर

रही धन-देवी का सत्कार दीवाली।

बाँध

वंदनवार देहरी अल्पना रचकर

शोभती

हर द्वार पर शुभकार दीवाली।

पीर

हर, घर-घर सजाती धीर-बाती संग

कोने-कोने

इक दिया क्रमवार दीवाली।

जीतकर

मावस पटाखे छोड़ हर्षित हो

सत्य

की करती तुमुल जयकार दीवाली।

देह

से कितनी हों लंबी दूरियाँ चाहे

जोड़

देती नेह के हिय तार दीवाली।

मेट

मन से मैल, मंगल भाव के भूषण

सौंपती

है विश्व को, हर बार दीवाली।

पूज

लक्ष्मी मातु को पावन सुरों के संग

जग

मनाता ‘कल्पना’ खुशवार दीवाली।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jyoti-deepak

saukhy kaa upahaar deewaalee

·

baandh

laaee gaanth men phir pyaar deewaalee

·

aas

ke aakhar ubhar aae hawaaon men

·

kar

rahee dhan-dewee kaa satkaar deewaalee

·

baandh

wandanawaar deharee alpanaa rachakar

·

shobhatee

har dvaar par shubhakaar deewaalee

·

peer

har, ghar-ghar sajaatee dheer-baatee sang

·

kone-kone

ik diyaa kramawaar deewaalee

·

jeetakar

maawas pataakhe chod harshit ho

·

saty

kee karatee tumul jayakaar deewaalee

·

deh

se kitanee hon lanbee dooriyaan chaahe

·

jod

detee neh ke hiy taar deewaalee

·

met

man se mail, mangal bhaaw ke bhooshan

·

saunpatee

hai wishv ko, har baar deewaalee

·

pooj

lakshmee maatu ko paawan suron ke sang

·

jag

manaataa ‘kalpanaa’ khushawaar deewaalee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

ज्योति-दीपक

सौख्य का उपहार दीवाली।

बाँध

लाई गाँठ में फिर प्यार दीवाली।

आस

के आखर उभर आए हवाओं में

कर

रही धन-देवी का सत्कार दीवाली।

बाँध

वंदनवार देहरी अल्पना रचकर

शोभती

हर द्वार पर शुभकार दीवाली।

पीर

हर, घर-घर सजाती धीर-बाती संग

कोने-कोने

इक दिया क्रमवार दीवाली।

जीतकर

मावस पटाखे छोड़ हर्षित हो

सत्य

की करती तुमुल जयकार दीवाली।

देह

से कितनी हों लंबी दूरियाँ चाहे

जोड़

देती नेह के हिय तार दीवाली।

मेट

मन से मैल, मंगल भाव के भूषण

सौंपती

है विश्व को, हर बार दीवाली।

पूज

लक्ष्मी मातु को पावन सुरों के संग

जग

मनाता ‘कल्पना’ खुशवार दीवाली।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗