कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १२८ / २०५ № 128 of 205 रचना १२८ / २०५
१८ मई २०१६ 18 May 2016 १८ मई २०१६

बेटियों पर चर्चा हो betiyon par charchaa ho बेटियों पर चर्चा हो

अगर

कहीं भी बंधु,

चिरागों

चर्चा पर हो

॥

भव-भूतल

के बिसरे कोनों पर चर्चा हो

॥

व्यर्थ

विलाप,

निराशा, रुदन, विसर्जित

करके

॥

लक्ष्य-साधना, कर्म, हौसलों पर चर्चा

हो

॥

सुमन

सभी,

खुश-रंग

सुरभि,

देते

बगिया को

॥

नहीं

ज़रूरी,

सिर्फ

गुलाबों पर चर्चा हो

॥

नाम

हमारा भव में,

चर्चित

हो न हो मगर

॥

चाह, कलम के, अमृत-भावों पर चर्चा हो

॥

सार

जहाँ हो,

ज्ञान-सिंधु

की बूँद-बूँद में

॥

ऐसी

सरल,

सुभाष्य

किताबों पर चर्चा हो

॥

छोड़ो

भी,

अब

नीरस जीवन का नित रोना

॥

रसमय, गीत, ग़ज़ल, कविताओं पर चर्चा

हो

॥

बेदम

हो जब भूख,

रोटियाँ

घर-घर पहुँचें

॥

तभी

आसमाँ,

चाँद-सितारों

पर चर्चा हो

॥

सदी

कह रही सुनो ‘कल्पना’ समय आ गया

॥

बेटों

से रुख मोड़,

बेटियों

पर चर्चा हो

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

agar

kaheen bhee bandhu,

chiraagon

charchaa par ho

·

bhaw-bhootal

ke bisare konon par charchaa ho

·

wyarth

wilaap,

niraashaa, rudan, wisarjit

karake

·

lakshy-saadhanaa, karm, hausalon par charchaa

ho

·

suman

sabhee,

khush-rang

surabhi,

dete

bagiyaa ko

·

naheen

zarooree,

sirph

gulaabon par charchaa ho

·

naam

hamaaraa bhaw men,

charchit

ho n ho magar

·

chaah, kalam ke, amriit-bhaawon par charchaa ho

·

saar

jahaan ho,

jnaan-sindhu

kee boond-boond men

·

aisee

saral,

subhaashy

kitaabon par charchaa ho

·

chodo

bhee,

ab

neeras jeewan kaa nit ronaa

·

rasamay, geet, gazal, kawitaaon par charchaa

ho

·

bedam

ho jab bhookh,

rotiyaan

ghar-ghar pahunchen

·

tabhee

aasamaan,

chaand-sitaaron

par charchaa ho

·

sadee

kah rahee suno ‘kalpanaa’ samay aa gayaa

·

beton

se rukh mod,

betiyon

par charchaa ho

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

अगर

कहीं भी बंधु,

चिरागों

चर्चा पर हो

॥

भव-भूतल

के बिसरे कोनों पर चर्चा हो

॥

व्यर्थ

विलाप,

निराशा, रुदन, विसर्जित

करके

॥

लक्ष्य-साधना, कर्म, हौसलों पर चर्चा

हो

॥

सुमन

सभी,

खुश-रंग

सुरभि,

देते

बगिया को

॥

नहीं

ज़रूरी,

सिर्फ

गुलाबों पर चर्चा हो

॥

नाम

हमारा भव में,

चर्चित

हो न हो मगर

॥

चाह, कलम के, अमृत-भावों पर चर्चा हो

॥

सार

जहाँ हो,

ज्ञान-सिंधु

की बूँद-बूँद में

॥

ऐसी

सरल,

सुभाष्य

किताबों पर चर्चा हो

॥

छोड़ो

भी,

अब

नीरस जीवन का नित रोना

॥

रसमय, गीत, ग़ज़ल, कविताओं पर चर्चा

हो

॥

बेदम

हो जब भूख,

रोटियाँ

घर-घर पहुँचें

॥

तभी

आसमाँ,

चाँद-सितारों

पर चर्चा हो

॥

सदी

कह रही सुनो ‘कल्पना’ समय आ गया

॥

बेटों

से रुख मोड़,

बेटियों

पर चर्चा हो

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗