कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १२७ / २०४ № 127 of 204 रचना १२७ / २०४
१८ मई २०१६ 18 May 2016 १८ मई २०१६

बेटियों पर चर्चा हो betiyon par charchaa ho बेटियों पर चर्चा हो

अगर

कहीं भी बंधु,

चिरागों

चर्चा पर हो

भव-भूतल

के बिसरे कोनों पर चर्चा हो

व्यर्थ

विलाप,

निराशा, रुदन, विसर्जित

करके

लक्ष्य-साधना, कर्म, हौसलों पर चर्चा

हो

सुमन

सभी,

खुश-रंग

सुरभि,

देते

बगिया को

नहीं

ज़रूरी,

सिर्फ

गुलाबों पर चर्चा हो

नाम

हमारा भव में,

चर्चित

हो न हो मगर

चाह, कलम के, अमृत-भावों पर चर्चा हो

सार

जहाँ हो,

ज्ञान-सिंधु

की बूँद-बूँद में

ऐसी

सरल,

सुभाष्य

किताबों पर चर्चा हो

छोड़ो

भी,

अब

नीरस जीवन का नित रोना

रसमय, गीत, ग़ज़ल, कविताओं पर चर्चा

हो

बेदम

हो जब भूख,

रोटियाँ

घर-घर पहुँचें

तभी

आसमाँ,

चाँद-सितारों

पर चर्चा हो

सदी

कह रही सुनो ‘कल्पना’ समय आ गया

बेटों

से रुख मोड़,

बेटियों

पर चर्चा हो

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

agar

kaheen bhee bandhu,

chiraagon

charchaa par ho

·

bhaw-bhootal

ke bisare konon par charchaa ho

·

wyarth

wilaap,

niraashaa, rudan, wisarjit

karake

·

lakshy-saadhanaa, karm, hausalon par charchaa

ho

·

suman

sabhee,

khush-rang

surabhi,

dete

bagiyaa ko

·

naheen

zarooree,

sirph

gulaabon par charchaa ho

·

naam

hamaaraa bhaw men,

charchit

ho n ho magar

·

chaah, kalam ke, amriit-bhaawon par charchaa ho

·

saar

jahaan ho,

jnaan-sindhu

kee boond-boond men

·

aisee

saral,

subhaashy

kitaabon par charchaa ho

·

chodo

bhee,

ab

neeras jeewan kaa nit ronaa

·

rasamay, geet, gazal, kawitaaon par charchaa

ho

·

bedam

ho jab bhookh,

rotiyaan

ghar-ghar pahunchen

·

tabhee

aasamaan,

chaand-sitaaron

par charchaa ho

·

sadee

kah rahee suno ‘kalpanaa’ samay aa gayaa

·

beton

se rukh mod,

betiyon

par charchaa ho

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

अगर

कहीं भी बंधु,

चिरागों

चर्चा पर हो

भव-भूतल

के बिसरे कोनों पर चर्चा हो

व्यर्थ

विलाप,

निराशा, रुदन, विसर्जित

करके

लक्ष्य-साधना, कर्म, हौसलों पर चर्चा

हो

सुमन

सभी,

खुश-रंग

सुरभि,

देते

बगिया को

नहीं

ज़रूरी,

सिर्फ

गुलाबों पर चर्चा हो

नाम

हमारा भव में,

चर्चित

हो न हो मगर

चाह, कलम के, अमृत-भावों पर चर्चा हो

सार

जहाँ हो,

ज्ञान-सिंधु

की बूँद-बूँद में

ऐसी

सरल,

सुभाष्य

किताबों पर चर्चा हो

छोड़ो

भी,

अब

नीरस जीवन का नित रोना

रसमय, गीत, ग़ज़ल, कविताओं पर चर्चा

हो

बेदम

हो जब भूख,

रोटियाँ

घर-घर पहुँचें

तभी

आसमाँ,

चाँद-सितारों

पर चर्चा हो

सदी

कह रही सुनो ‘कल्पना’ समय आ गया

बेटों

से रुख मोड़,

बेटियों

पर चर्चा हो

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗