कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७ / ५२ № 7 of 52 रचना ७ / ५२
१५ मई २०१६ 15 May 2016 १५ मई २०१६

नचाए थी गर्मी nachaae thee garmee नचाए थी गर्मी

तपे

थो जदहिं सिजु, तपाए थी गर्मी।

॥

नंहनि

ते असाँखे नचाए थी गर्मी।

॥

पचायूँ

असाँ कींअ रोटी, असाँजो

॥

गोहे तनु पघर साँ पचाए थी गर्मी।

॥

जदहिं

थी दिसे तंगि दाढा थियूँ था

॥

हवाउनि

खे होको लगाए थी गर्मी।

॥

विछाए

बगीचनि में सावा गालीचा

॥

झकोरनि

साँ झूला झुलाए थी गर्मी।

॥

सँदेसा

परे खाँ दई प्यार-सिक साँ

॥

जबल

ते असाँखे घुराए थी गर्मी।

॥

खणी

थी अचे साणु गिदिरा

tape

tho jadahin siju, tapaae thee garmee

·

nanhani

te asaankhe nachaae thee garmee

·

pachaayoon

asaan keen rotee, asaanjo

·

gohe tanu paghar saan pachaae thee garmee

·

jadahin

thee dise tangi daadhaa thiyoon thaa

·

hawaauni

khe hoko lagaae thee garmee

·

wichaae

bageechani men saawaa gaaleechaa

·

jhakorani

saan jhoolaa jhulaae thee garmee

·

sandesaa

pare khaan daee pyaar-sik saan

·

jabal

te asaankhe ghuraae thee garmee

·

khanee

thee ache saanu gidiraa

तपे

थो जदहिं सिजु, तपाए थी गर्मी।

॥

नंहनि

ते असाँखे नचाए थी गर्मी।

॥

पचायूँ

असाँ कींअ रोटी, असाँजो

॥

गोहे तनु पघर साँ पचाए थी गर्मी।

॥

जदहिं

थी दिसे तंगि दाढा थियूँ था

॥

हवाउनि

खे होको लगाए थी गर्मी।

॥

विछाए

बगीचनि में सावा गालीचा

॥

झकोरनि

साँ झूला झुलाए थी गर्मी।

॥

सँदेसा

परे खाँ दई प्यार-सिक साँ

॥

जबल

ते असाँखे घुराए थी गर्मी।

॥

खणी

थी अचे साणु गिदिरा

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗