कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४७ / ५२ № 47 of 52 रचना ४७ / ५२
१८ सितम्बर २०१६ 18 September 2016 १८ सितम्बर २०१६

पहुतो नींगरु शहरि पराए pahuto neengaru shahari paraae पहुतो नींगरु शहरि पराए

गोठु छदे कल्ह पहुतो नींगरु शहरि पराए

पेटु

भरिण लइ अजु हू गोदा पयो गसाए

कदहिं

मथे ते ढोए प्यो सामानु गिरह लइ

कदहिं धोई कोप पयो बुख-उञ परिचाए

राजु

कयईं पए हुति पहिंजे घर-घेर-घिटिनि में

पर

हिति चारई पहर पयो थो पघरु वहाए

दींह

गुज़ारे प्यो गोल्हींदे टुकुर छाँव जो

रात

सुम्हें प्यो उभु वेढ़े, धरती हंधु ठाहे

माउ-पीउ

जी

gothu chade kalh pahuto neengaru shahari paraae

·

petu

bharin lai aju hoo godaa payo gasaae

·

kadahin

mathe te dhoe pyo saamaanu girah lai

·

t

kadahin dhoee kop payo bukh-un parichaae

·

raaju

kayaeen pae huti pahinje ghar-gher-ghitini men

·

par

hiti chaaraee pahar payo tho pagharu wahaae

·

deenh

guzaare pyo golheende tukur chaanv jo

·

raat

sumhen pyo ubhu weढ़e, dharatee handhu thaahe

·

maau-peeu

jee

गोठु छदे कल्ह पहुतो नींगरु शहरि पराए

पेटु

भरिण लइ अजु हू गोदा पयो गसाए

कदहिं

मथे ते ढोए प्यो सामानु गिरह लइ

कदहिं धोई कोप पयो बुख-उञ परिचाए

राजु

कयईं पए हुति पहिंजे घर-घेर-घिटिनि में

पर

हिति चारई पहर पयो थो पघरु वहाए

दींह

गुज़ारे प्यो गोल्हींदे टुकुर छाँव जो

रात

सुम्हें प्यो उभु वेढ़े, धरती हंधु ठाहे

माउ-पीउ

जी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗