कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०८ / २०४ № 108 of 204 रचना १०८ / २०४
१ नवम्बर २०१५ 1 November 2015 १ नवम्बर २०१५

ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली jyoti parvon kee jagee, aaee diwaalee ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली

ज्योत

पर्वों की जगी आई दिवाली।

भू-भुवन

में रंग बिखरे, रोशनी के

रात

अमा पूनम बनी, आई दिवाली।

नव

उमंगों के पहनकर पंख नूतन

डाल

पर चहकी चिड़ी,

आई

दिवाली।

देख

झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

फिर

कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

वस्त्र

नूतन,

ओढ़

बचपन,

है

मगन मन

ले

पटाखों की लड़ी,

आई

दिवाली।

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

बाग

में चटकी कली, आई दिवाली।

सुन

सखी री! गाओ स्वागत-गान

मंगल

ले

दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

लोक

सारे में दुआ, देखो अलौकिक

देवताओं

की घुली, आई दिवाली।

जो

बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

लेके

अपनों की गली, आई दिवाली।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

dvaar par dastak huee, aaee diwaalee

·

jyot

parvon kee jagee aaee diwaalee

·

bhoo-bhuwan

men rang bikhare, roshanee ke

·

raat

amaa poonam banee, aaee diwaalee

·

naw

umangon ke pahanakar pankh nootan

·

daal

par chahakee chidee,

aaee

diwaalee

·

dekh

jhilamil door tak har nayan-jal men

·

phir

kamalinee khil uthee, aaee diwaalee

·

wastr

nootan,

oढ़

bachapan,

hai

magan man

·

le

pataakhon kee ladee,

aaee

diwaalee

·

prem-purawaa, jab chalee paayal pahanakar

·

baag

men chatakee kalee, aaee diwaalee

·

sun

sakhee ree! gaao svaagat-gaan

mangal

·

le

diyaa lakshmee khadee, aaee diwaalee

·

lok

saare men duaa, dekho alaukik

·

dewataaon

kee ghulee, aaee diwaalee

·

jo

base parades unako ‘kalpanaa’ phir

·

leke

apanon kee galee, aaee diwaalee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली

ज्योत

पर्वों की जगी आई दिवाली।

भू-भुवन

में रंग बिखरे, रोशनी के

रात

अमा पूनम बनी, आई दिवाली।

नव

उमंगों के पहनकर पंख नूतन

डाल

पर चहकी चिड़ी,

आई

दिवाली।

देख

झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

फिर

कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

वस्त्र

नूतन,

ओढ़

बचपन,

है

मगन मन

ले

पटाखों की लड़ी,

आई

दिवाली।

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

बाग

में चटकी कली, आई दिवाली।

सुन

सखी री! गाओ स्वागत-गान

मंगल

ले

दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

लोक

सारे में दुआ, देखो अलौकिक

देवताओं

की घुली, आई दिवाली।

जो

बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

लेके

अपनों की गली, आई दिवाली।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗