कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०९ / २०५ № 109 of 205 रचना १०९ / २०५
१ नवम्बर २०१५ 1 November 2015 १ नवम्बर २०१५

ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली jyoti parvon kee jagee, aaee diwaalee ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली

॥

ज्योत

पर्वों की जगी आई दिवाली।

॥

भू-भुवन

में रंग बिखरे, रोशनी के

॥

रात

अमा पूनम बनी, आई दिवाली।

॥

नव

उमंगों के पहनकर पंख नूतन

॥

डाल

पर चहकी चिड़ी,

आई

दिवाली।

॥

देख

झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

॥

फिर

कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

॥

वस्त्र

नूतन,

ओढ़

बचपन,

है

मगन मन

॥

ले

पटाखों की लड़ी,

आई

दिवाली।

॥

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

॥

बाग

में चटकी कली, आई दिवाली।

॥

सुन

सखी री! गाओ स्वागत-गान

मंगल

॥

ले

दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

॥

लोक

सारे में दुआ, देखो अलौकिक

॥

देवताओं

की घुली, आई दिवाली।

॥

जो

बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

॥

लेके

अपनों की गली, आई दिवाली।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

dvaar par dastak huee, aaee diwaalee

·

jyot

parvon kee jagee aaee diwaalee

·

bhoo-bhuwan

men rang bikhare, roshanee ke

·

raat

amaa poonam banee, aaee diwaalee

·

naw

umangon ke pahanakar pankh nootan

·

daal

par chahakee chidee,

aaee

diwaalee

·

dekh

jhilamil door tak har nayan-jal men

·

phir

kamalinee khil uthee, aaee diwaalee

·

wastr

nootan,

oढ़

bachapan,

hai

magan man

·

le

pataakhon kee ladee,

aaee

diwaalee

·

prem-purawaa, jab chalee paayal pahanakar

·

baag

men chatakee kalee, aaee diwaalee

·

sun

sakhee ree! gaao svaagat-gaan

mangal

·

le

diyaa lakshmee khadee, aaee diwaalee

·

lok

saare men duaa, dekho alaukik

·

dewataaon

kee ghulee, aaee diwaalee

·

jo

base parades unako ‘kalpanaa’ phir

·

leke

apanon kee galee, aaee diwaalee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली

॥

ज्योत

पर्वों की जगी आई दिवाली।

॥

भू-भुवन

में रंग बिखरे, रोशनी के

॥

रात

अमा पूनम बनी, आई दिवाली।

॥

नव

उमंगों के पहनकर पंख नूतन

॥

डाल

पर चहकी चिड़ी,

आई

दिवाली।

॥

देख

झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

॥

फिर

कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

॥

वस्त्र

नूतन,

ओढ़

बचपन,

है

मगन मन

॥

ले

पटाखों की लड़ी,

आई

दिवाली।

॥

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

॥

बाग

में चटकी कली, आई दिवाली।

॥

सुन

सखी री! गाओ स्वागत-गान

मंगल

॥

ले

दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

॥

लोक

सारे में दुआ, देखो अलौकिक

॥

देवताओं

की घुली, आई दिवाली।

॥

जो

बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

॥

लेके

अपनों की गली, आई दिवाली।

॥

-कल्पना रामानी

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗