ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली jyoti parvon kee jagee, aaee diwaalee ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली
द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली
ज्योत
पर्वों की जगी आई दिवाली।
भू-भुवन
में रंग बिखरे, रोशनी के
रात
अमा पूनम बनी, आई दिवाली।
नव
उमंगों के पहनकर पंख नूतन
डाल
पर चहकी चिड़ी,
आई
दिवाली।
देख
झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में
फिर
कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।
वस्त्र
नूतन,
ओढ़
बचपन,
है
मगन मन
ले
पटाखों की लड़ी,
आई
दिवाली।
प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर
बाग
में चटकी कली, आई दिवाली।
सुन
सखी री! गाओ स्वागत-गान
मंगल
ले
दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।
लोक
सारे में दुआ, देखो अलौकिक
देवताओं
की घुली, आई दिवाली।
जो
बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर
लेके
अपनों की गली, आई दिवाली।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
dvaar par dastak huee, aaee diwaalee
jyot
parvon kee jagee aaee diwaalee
bhoo-bhuwan
men rang bikhare, roshanee ke
raat
amaa poonam banee, aaee diwaalee
naw
umangon ke pahanakar pankh nootan
daal
par chahakee chidee,
aaee
diwaalee
dekh
jhilamil door tak har nayan-jal men
phir
kamalinee khil uthee, aaee diwaalee
wastr
nootan,
oढ़
bachapan,
hai
magan man
le
pataakhon kee ladee,
aaee
diwaalee
prem-purawaa, jab chalee paayal pahanakar
baag
men chatakee kalee, aaee diwaalee
sun
sakhee ree! gaao svaagat-gaan
mangal
le
diyaa lakshmee khadee, aaee diwaalee
lok
saare men duaa, dekho alaukik
dewataaon
kee ghulee, aaee diwaalee
jo
base parades unako ‘kalpanaa’ phir
leke
apanon kee galee, aaee diwaalee
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली
ज्योत
पर्वों की जगी आई दिवाली।
भू-भुवन
में रंग बिखरे, रोशनी के
रात
अमा पूनम बनी, आई दिवाली।
नव
उमंगों के पहनकर पंख नूतन
डाल
पर चहकी चिड़ी,
आई
दिवाली।
देख
झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में
फिर
कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।
वस्त्र
नूतन,
ओढ़
बचपन,
है
मगन मन
ले
पटाखों की लड़ी,
आई
दिवाली।
प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर
बाग
में चटकी कली, आई दिवाली।
सुन
सखी री! गाओ स्वागत-गान
मंगल
ले
दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।
लोक
सारे में दुआ, देखो अलौकिक
देवताओं
की घुली, आई दिवाली।
जो
बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर
लेके
अपनों की गली, आई दिवाली।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी