आशाओं के दीप aashaaon ke deep आशाओं के दीप
आँगन-आँगन
आशाओं के दीप जलाती
मन
रोशन हो जाते, जब दीवाली आती
छोड़
रंज-गम हो जाता ब्रह्मांड राममय
दिशा-दिशा
दुनिया की, मंगल-गान सुनाती
सपनों
का नव-सूर्य, उदित होता अंबर
में
और
बाँचती प्रात नवल, अपनों की पाती
देख-देख
कर दिव्य-ज्योत्सना, फैली जग में
प्राण-प्राण
के नेह-दियों की, लौ बढ़ जाती
तोरण
सजते द्वार, अल्पना
देहरी-देहरी
घर-घर
को हर घरणी पावन-धाम बनाती
जब
करता आह्वान जगत तब स्वर्ग-लोक से
सुख-समृद्धि
के ले चिराग, लक्ष्मी उतर आती
पर्वों
के अमृत से बनता जीवन उत्सव
दिल
मिलते इस तरह कि जैसे दीपक-बाती
मावस
को दे मात, कालिमा काट, ‘कल्पना’
दीपमालिका
तीन लोक तक रजत बिछाती
- कल्पना रामानीप्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
aangan-aangan
aashaaon ke deep jalaatee
man
roshan ho jaate, jab deewaalee aatee
chod
ranj-gam ho jaataa brahmaand raamamay
dishaa-dishaa
duniyaa kee, mangal-gaan sunaatee
sapanon
kaa naw-soory, udit hotaa anbar
men
aur
baanchatee praat nawal, apanon kee paatee
dekh-dekh
kar divy-jyotsanaa, phailee jag men
praan-praan
ke neh-diyon kee, lau bढ़ jaatee
toran
sajate dvaar, alpanaa
deharee-deharee
ghar-ghar
ko har gharanee paawan-dhaam banaatee
jab
karataa aahvaan jagat tab svarg-lok se
sukh-samriiddhi
ke le chiraag, lakshmee utar aatee
parvon
ke amriit se banataa jeewan utsaw
dil
milate is tarah ki jaise deepak-baatee
maawas
ko de maat, kaalimaa kaat, ‘kalpanaa’
deepamaalikaa
teen lok tak rajat bichaatee
- kalpanaa raamaaneeprotsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
आँगन-आँगन
आशाओं के दीप जलाती
मन
रोशन हो जाते, जब दीवाली आती
छोड़
रंज-गम हो जाता ब्रह्मांड राममय
दिशा-दिशा
दुनिया की, मंगल-गान सुनाती
सपनों
का नव-सूर्य, उदित होता अंबर
में
और
बाँचती प्रात नवल, अपनों की पाती
देख-देख
कर दिव्य-ज्योत्सना, फैली जग में
प्राण-प्राण
के नेह-दियों की, लौ बढ़ जाती
तोरण
सजते द्वार, अल्पना
देहरी-देहरी
घर-घर
को हर घरणी पावन-धाम बनाती
जब
करता आह्वान जगत तब स्वर्ग-लोक से
सुख-समृद्धि
के ले चिराग, लक्ष्मी उतर आती
पर्वों
के अमृत से बनता जीवन उत्सव
दिल
मिलते इस तरह कि जैसे दीपक-बाती
मावस
को दे मात, कालिमा काट, ‘कल्पना’
दीपमालिका
तीन लोक तक रजत बिछाती
- कल्पना रामानीप्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी