कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २३ / ११४ № 23 of 114 रचना २३ / ११४
१८ अक्तूबर २०१६ 18 October 2016 १८ अक्तूबर २०१६

दिये जगमगा उठे diye jagamagaa uthe दिये जगमगा उठे

“सुन तो सुनन्दा…!”

-कहो प्रतिमा

सोसाइटी

की ये दो सखियाँ प्रातः भ्रमण के साथ बत-रस का मोह भी नहीं छोड़ पातीं। आसपास की

इमारत में रहने वाली सुनन्दा और प्रतिमा पक्की सहेलियाँ हैं। प्रतिमा ने गति कुछ

धीमी करते हुए कहा-

“तुमने सूचना तो पढ़ ही ली होगी। युवा

महिला-संघ द्वारा दिवाली पर हर साल होने वाले आयोजनों में इस बार युवा महिलाओं के

लिए रंगोली प्रतियोगिता रखी गई है, निर्णय

के लिए पड़ोसी सोसाइटी के

“sun to sunandaa…!”

·

-kaho pratimaa

·

sosaaitee

kee ye do sakhiyaan praatah bhraman ke saath bat-ras kaa moh bhee naheen chod paateen aasapaas kee

imaarat men rahane waalee sunandaa aur pratimaa pakkee saheliyaan hain pratimaa ne gati kuch

dheemee karate hue kahaa-

·

“tumane soochanaa to pढ़ hee lee hogee yuwaa

mahilaa-sangh dvaaraa diwaalee par har saal hone waale aayojanon men is baar yuwaa mahilaaon ke

lie rangolee pratiyogitaa rakhee gaee hai, nirnay

ke lie padosee sosaaitee ke

“सुन तो सुनन्दा…!”

-कहो प्रतिमा

सोसाइटी

की ये दो सखियाँ प्रातः भ्रमण के साथ बत-रस का मोह भी नहीं छोड़ पातीं। आसपास की

इमारत में रहने वाली सुनन्दा और प्रतिमा पक्की सहेलियाँ हैं। प्रतिमा ने गति कुछ

धीमी करते हुए कहा-

“तुमने सूचना तो पढ़ ही ली होगी। युवा

महिला-संघ द्वारा दिवाली पर हर साल होने वाले आयोजनों में इस बार युवा महिलाओं के

लिए रंगोली प्रतियोगिता रखी गई है, निर्णय

के लिए पड़ोसी सोसाइटी के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗