गागर में सागर-५ लघुकथाएँ gaagar men saagar-5 laghukathaaen गागर में सागर-५ लघुकथाएँ
---
सहेलियाँ
गहरे मेकअप और वज़नदार वस्त्राभूषणों से लदी-फँदी ये
चारों सहेलियाँ वैसे तो मिलते ही चहकने लगती थीं और बातों से फुर्सत ही नहीं मिलती
थी, लेकिन आज पास-पास बैठी होने के बावजूद इन्हें
आपस में बातें करने की फुर्सत नहीं थी क्योंकि आज वे एक विवाह समारोह में शामिल
होने के लिए आई थीं। लेकिन हाँ, बार-बार
अपने पर्स से छोटा सा आइना निकालकर विभिन्न कोणों से खुद को निहारने के बाद कुछ
सुनने की
---
saheliyaan
gahare mekaap aur wazanadaar wastraabhooshanon se ladee-phandee ye
chaaron saheliyaan waise to milate hee chahakane lagatee theen aur baaton se phursat hee naheen milatee
thee, lekin aaj paas-paas baithee hone ke baawajood inhen
aapas men baaten karane kee phursat naheen thee kyonki aaj we ek wiwaah samaaroh men shaamil
hone ke lie aaee theen lekin haan, baar-baar
apane pars se chotaa saa aainaa nikaalakar wibhinn konon se khud ko nihaarane ke baad kuch
sunane kee
---
सहेलियाँ
गहरे मेकअप और वज़नदार वस्त्राभूषणों से लदी-फँदी ये
चारों सहेलियाँ वैसे तो मिलते ही चहकने लगती थीं और बातों से फुर्सत ही नहीं मिलती
थी, लेकिन आज पास-पास बैठी होने के बावजूद इन्हें
आपस में बातें करने की फुर्सत नहीं थी क्योंकि आज वे एक विवाह समारोह में शामिल
होने के लिए आई थीं। लेकिन हाँ, बार-बार
अपने पर्स से छोटा सा आइना निकालकर विभिन्न कोणों से खुद को निहारने के बाद कुछ
सुनने की