फर्ज़ की डोर pharz kee dor फर्ज़ की डोर
सावन का
महीना लगते ही मेघा के कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ घुँघरुओं की रुनझुन में बदल
जाती है और ज्यों ज्यों राखी पर्व निकट आने लगता है, यह
आवाज़ तेज़ होती जाती है।
मेघा तीन
भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उससे ५ साल छोटी बहन मनीषा और १२ साल छोटा मनुज,
जिसे
प्यार से सब मुन्नू कहते हैं, जिसके
लिए माँ के साथ-साथ उसने भी हर मंदिर में सिर नवाया, पीर
पूजे, देव मनाए। आखिर
saawan kaa
maheenaa lagate hee meghaa ke kaanon men padane waalee har aawaaz ghungharuon kee runajhun men badal
jaatee hai aur jyon jyon raakhee parv nikat aane lagataa hai, yah
aawaaz tez hotee jaatee hai
meghaa teen
bhaaee bahanon men sabase badee hai usase 5 saal chotee bahan maneeshaa aur 12 saal chotaa manuj,
jise
pyaar se sab munnoo kahate hain, jisake
lie maan ke saath-saath usane bhee har mandir men sir nawaayaa, peer
pooje, dew manaae aakhir
सावन का
महीना लगते ही मेघा के कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ घुँघरुओं की रुनझुन में बदल
जाती है और ज्यों ज्यों राखी पर्व निकट आने लगता है, यह
आवाज़ तेज़ होती जाती है।
मेघा तीन
भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उससे ५ साल छोटी बहन मनीषा और १२ साल छोटा मनुज,
जिसे
प्यार से सब मुन्नू कहते हैं, जिसके
लिए माँ के साथ-साथ उसने भी हर मंदिर में सिर नवाया, पीर
पूजे, देव मनाए। आखिर