कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २० / ११४ № 20 of 114 रचना २० / ११४
११ अगस्त २०१६ 11 August 2016 ११ अगस्त २०१६

फर्ज़ की डोर pharz kee dor फर्ज़ की डोर

सावन का

महीना लगते ही मेघा के कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ घुँघरुओं की रुनझुन में बदल

जाती है और ज्यों ज्यों राखी पर्व निकट आने लगता है, यह

आवाज़ तेज़ होती जाती है।

मेघा तीन

भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उससे ५ साल छोटी बहन मनीषा और १२ साल छोटा मनुज,

जिसे

प्यार से सब मुन्नू कहते हैं, जिसके

लिए माँ के साथ-साथ उसने भी हर मंदिर में सिर नवाया, पीर

पूजे, देव मनाए। आखिर

saawan kaa

maheenaa lagate hee meghaa ke kaanon men padane waalee har aawaaz ghungharuon kee runajhun men badal

jaatee hai aur jyon jyon raakhee parv nikat aane lagataa hai, yah

aawaaz tez hotee jaatee hai

·

meghaa teen

bhaaee bahanon men sabase badee hai usase 5 saal chotee bahan maneeshaa aur 12 saal chotaa manuj,

jise

pyaar se sab munnoo kahate hain, jisake

lie maan ke saath-saath usane bhee har mandir men sir nawaayaa, peer

pooje, dew manaae aakhir

सावन का

महीना लगते ही मेघा के कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ घुँघरुओं की रुनझुन में बदल

जाती है और ज्यों ज्यों राखी पर्व निकट आने लगता है, यह

आवाज़ तेज़ होती जाती है।

मेघा तीन

भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उससे ५ साल छोटी बहन मनीषा और १२ साल छोटा मनुज,

जिसे

प्यार से सब मुन्नू कहते हैं, जिसके

लिए माँ के साथ-साथ उसने भी हर मंदिर में सिर नवाया, पीर

पूजे, देव मनाए। आखिर

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗