कुछ पा लेना सब कुछ खोने से अच्छा है kuch paa lenaa sab kuch khone se achchaa hai कुछ पा लेना सब कुछ खोने से अच्छा है
कुछ
पा लेना, सब कुछ खोने से अच्छा है
छोटा
घर भी, बेघर होने से अच्छा है
पर
स्वतंत्र हों, पा लें चाहे रूखी रोटी
ज़र
परोसते कैदी कोने से अच्छा है
नहीं
ज़रूरी मिले सभी को पूरा सूरज
एक
चक्षु भी, अँधा होने से अच्छा है
जो
हासिल है, साथ उसी के हँसकर जीना
पास
नहीं, उसके हित रोने से अच्छा है
नवता के सँग, परम्पराओं को भी पूजना
हर-पल बोझिल जीवन ढोने से अच्छा है
जल
वो जीवन, जो कंठों की प्यास बुझाए
नदिया
बनना, सागर होने से अच्छा है
सिर्फ
ज़रूरत साथ रहे, यदि पार उतरना
बोझ
बढ़ाकर नाव डुबोने से अच्छा है
खुले दृगों से सदा ‘कल्पना’ कदम बढ़ाना
ठोकर खा, दृग, नीर भिगोने से अच्छा है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
kuch
paa lenaa, sab kuch khone se achchaa hai
chotaa
ghar bhee, beghar hone se achchaa hai
par
svatantr hon, paa len chaahe rookhee rotee
zar
parosate kaidee kone se achchaa hai
naheen
zarooree mile sabhee ko pooraa sooraj
ek
chakshu bhee, andhaa hone se achchaa hai
jo
haasil hai, saath usee ke hansakar jeenaa
paas
naheen, usake hit rone se achchaa hai
nawataa ke sang, paramparaaon ko bhee poojanaa
har-pal bojhil jeewan dhone se achchaa hai
jal
wo jeewan, jo kanthon kee pyaas bujhaae
nadiyaa
bananaa, saagar hone se achchaa hai
sirph
zaroorat saath rahe, yadi paar utaranaa
bojh
bढ़aakar naaw dubone se achchaa hai
khule driigon se sadaa ‘kalpanaa’ kadam bढ़aanaa
thokar khaa, driig, neer bhigone se achchaa hai
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
कुछ
पा लेना, सब कुछ खोने से अच्छा है
छोटा
घर भी, बेघर होने से अच्छा है
पर
स्वतंत्र हों, पा लें चाहे रूखी रोटी
ज़र
परोसते कैदी कोने से अच्छा है
नहीं
ज़रूरी मिले सभी को पूरा सूरज
एक
चक्षु भी, अँधा होने से अच्छा है
जो
हासिल है, साथ उसी के हँसकर जीना
पास
नहीं, उसके हित रोने से अच्छा है
नवता के सँग, परम्पराओं को भी पूजना
हर-पल बोझिल जीवन ढोने से अच्छा है
जल
वो जीवन, जो कंठों की प्यास बुझाए
नदिया
बनना, सागर होने से अच्छा है
सिर्फ
ज़रूरत साथ रहे, यदि पार उतरना
बोझ
बढ़ाकर नाव डुबोने से अच्छा है
खुले दृगों से सदा ‘कल्पना’ कदम बढ़ाना
ठोकर खा, दृग, नीर भिगोने से अच्छा है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी