कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०६ / २०४ № 106 of 204 रचना १०६ / २०४
१८ अक्तूबर २०१५ 18 October 2015 १८ अक्तूबर २०१५

मुस्कान देख मेरी है मुस्कुराता मौसम muskaan dekh meree hai muskuraataa mausam मुस्कान देख मेरी है मुस्कुराता मौसम

मुस्कान

देख मेरी, है मुसकुराता

मौसम।

तुम

आ रहे हो मिलने, यह जान जाता

मौसम।

आती

बहार अचानक, खिल जातीं सुर्ख

कलियाँ

स्वागत

में ख़ुशबुओं की जाजम बिछाता मौसम

लेकर

तुम्हारी पाती, चल देती जब चमन

को

धुन

प्रेम की बजाकर, सँग गुनगुनाता

मौसम

रंगत

बदलती मुख की,

नटखट

ये भाँप लेता

आकर

निकट रँगीला,

मुख

चूम जाता मौसम

प्यारा

ये मेरा साथी, कभी झूलना झुलाता

कभी

बन परिंदा मुझको, नभ में उड़ाता मौसम

खुश

देखता तो खुश हो, जी भर के खिलखिलाता

पर

देख उदास मुझको, हर विधि रिझाता

मौसम

अब

आ भी जाओ प्रिय तुम, कहीं लौट ही न जाए

यह ‘कल्पना’ पुलक से, पलकें बिछाता मौसम

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

muskaan

dekh meree, hai musakuraataa

mausam

·

tum

aa rahe ho milane, yah jaan jaataa

mausam

·

aatee

bahaar achaanak, khil jaateen surkh

kaliyaan

·

svaagat

men kushabuon kee jaajam bichaataa mausam

·

lekar

tumhaaree paatee, chal detee jab chaman

ko

·

dhun

prem kee bajaakar, sang gunagunaataa

mausam

·

rangat

badalatee mukh kee,

natakhat

ye bhaanp letaa

·

aakar

nikat rangeelaa,

mukh

choom jaataa mausam

·

pyaaraa

ye meraa saathee, kabhee jhoolanaa jhulaataa

·

kabhee

ban parindaa mujhako, nabh men udaataa mausam

·

khush

dekhataa to khush ho, jee bhar ke khilakhilaataa

·

par

dekh udaas mujhako, har widhi rijhaataa

mausam

·

ab

aa bhee jaao priy tum, kaheen laut hee n jaae

·

yah ‘kalpanaa’ pulak se, palaken bichaataa mausam

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मुस्कान

देख मेरी, है मुसकुराता

मौसम।

तुम

आ रहे हो मिलने, यह जान जाता

मौसम।

आती

बहार अचानक, खिल जातीं सुर्ख

कलियाँ

स्वागत

में ख़ुशबुओं की जाजम बिछाता मौसम

लेकर

तुम्हारी पाती, चल देती जब चमन

को

धुन

प्रेम की बजाकर, सँग गुनगुनाता

मौसम

रंगत

बदलती मुख की,

नटखट

ये भाँप लेता

आकर

निकट रँगीला,

मुख

चूम जाता मौसम

प्यारा

ये मेरा साथी, कभी झूलना झुलाता

कभी

बन परिंदा मुझको, नभ में उड़ाता मौसम

खुश

देखता तो खुश हो, जी भर के खिलखिलाता

पर

देख उदास मुझको, हर विधि रिझाता

मौसम

अब

आ भी जाओ प्रिय तुम, कहीं लौट ही न जाए

यह ‘कल्पना’ पुलक से, पलकें बिछाता मौसम

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗