बेटी बचाएँ betee bachaaen बेटी बचाएँ
ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ।
अहम लक्ष्य हो, आज बेटी बचाएँ।
जहाँ घर-चमन में, चहकती है बेटी
बहा करतीं उस घर, महकती हवाएँ।
क़तल बेटियाँ कर, जनम से ही पहले
धरा को न खुद ही, रसातल दिखाएँ।
बहन-बेटी होती सदा पूजिता है
सपूतों को अपने, सबक यह सिखाएँ।
पढ़ाती जो सद्भाव का पाठ जग को
उसे बंधु! बेटे बराबर पढ़ाएँ।
न हो जननियों, अब सुता-भ्रूण हत्या
वचन देके खुद को अडिग हो निभाएँ।
है सच “कल्पना” बेटी बेटों से बढ़कर
कि अब भेद का भूत, भव से भगाएँ।
- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
zameen se uthaakar falak par bithaaen
aham lakshy ho, aaj betee bachaaen
jahaan ghar-chaman men, chahakatee hai betee
bahaa karateen us ghar, mahakatee hawaaen
qatal betiyaan kar, janam se hee pahale
dharaa ko n khud hee, rasaatal dikhaaen
bahan-betee hotee sadaa poojitaa hai
sapooton ko apane, sabak yah sikhaaen
pढ़aatee jo sadbhaaw kaa paath jag ko
use bandhu! bete baraabar pढ़aaen
n ho jananiyon, ab sutaa-bhroon hatyaa
wachan deke khud ko adig ho nibhaaen
hai sach “kalpanaa” betee beton se bढ़kar
ki ab bhed kaa bhoot, bhaw se bhagaaen
- kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ।
अहम लक्ष्य हो, आज बेटी बचाएँ।
जहाँ घर-चमन में, चहकती है बेटी
बहा करतीं उस घर, महकती हवाएँ।
क़तल बेटियाँ कर, जनम से ही पहले
धरा को न खुद ही, रसातल दिखाएँ।
बहन-बेटी होती सदा पूजिता है
सपूतों को अपने, सबक यह सिखाएँ।
पढ़ाती जो सद्भाव का पाठ जग को
उसे बंधु! बेटे बराबर पढ़ाएँ।
न हो जननियों, अब सुता-भ्रूण हत्या
वचन देके खुद को अडिग हो निभाएँ।
है सच “कल्पना” बेटी बेटों से बढ़कर
कि अब भेद का भूत, भव से भगाएँ।
- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी