फूल तितलियों वाला उपवन phool titaliyon waalaa upawan फूल तितलियों वाला उपवन
बदला मौसम फिर
बसंत का हुआ आगमन।
खिला खुशनुमा फूल-
तितलियों वाला उपवन।
ऋतु रानी का रूप
निरखकर प्रेम अगन में
हुआ पतंगों का भी
जलने को आतुर मन।
पींगें भरने लगे
बाग में भँवरे कलियाँ
लहराता लख हरित
पीत वसुधा का दामन।
पल-पल झरते पात
चतुर्दिश बिखरे-बिखरे
रस-सुगंध से सींच
रहे हैं सारा आँगन।
टिमटिम करती देख
जुगनुओं वाली रैना
खा जाता है मात
चाँदनी का भी यौवन।
लगता है ज्यों उतरी
भू पर एक अप्सरा
प्रीत-प्रीत बन जाता
है यह मदमाता मन।
काश! गीतमय दिन
बसंत के कभी न बीतें
और बीत जाए इनमें
यह सारा जीवन।
badalaa mausam phir
basant kaa huaa aagaman
khilaa khushanumaa phool-
titaliyon waalaa upawan
riitu raanee kaa roop
nirakhakar prem agan men
huaa patangon kaa bhee
jalane ko aatur man
peengen bharane lage
baag men bhanvare kaliyaan
laharaataa lakh harit
peet wasudhaa kaa daaman
pal-pal jharate paat
chaturdish bikhare-bikhare
ras-sugandh se seench
rahe hain saaraa aangan
timatim karatee dekh
juganuon waalee rainaa
khaa jaataa hai maat
chaandanee kaa bhee yauwan
lagataa hai jyon utaree
bhoo par ek apsaraa
preet-preet ban jaataa
hai yah madamaataa man
kaash! geetamay din
basant ke kabhee n beeten
aur beet jaae inamen
yah saaraa jeewan
बदला मौसम फिर
बसंत का हुआ आगमन।
खिला खुशनुमा फूल-
तितलियों वाला उपवन।
ऋतु रानी का रूप
निरखकर प्रेम अगन में
हुआ पतंगों का भी
जलने को आतुर मन।
पींगें भरने लगे
बाग में भँवरे कलियाँ
लहराता लख हरित
पीत वसुधा का दामन।
पल-पल झरते पात
चतुर्दिश बिखरे-बिखरे
रस-सुगंध से सींच
रहे हैं सारा आँगन।
टिमटिम करती देख
जुगनुओं वाली रैना
खा जाता है मात
चाँदनी का भी यौवन।
लगता है ज्यों उतरी
भू पर एक अप्सरा
प्रीत-प्रीत बन जाता
है यह मदमाता मन।
काश! गीतमय दिन
बसंत के कभी न बीतें
और बीत जाए इनमें
यह सारा जीवन।