घर-घर दीप जले ghar-ghar deep jale घर-घर दीप जले
ज्योति-पर्व आया
मनभावन
घर-घर दीप जले।
रजत हुआ रजनी का
आँगन
श्यामल गगन तले।
थमे-थमे दिन पंख
लगाकर
फिर गतिमान हुए।
हाथ बढ़ाकर खुशियों
ने
ऊँचे सोपान छुए।
नष्ट हुआ कष्टों का
क्रंदन
सुख के सूत्र फले।
हुआ अस्तगत तम अनंत
में
गम का मेघ छंटा।
भक्ति-भाव से माँ
लक्ष्मी का
सबने नाम रटा।
देख कतारें कंदीलों की
अँधियारे दहले।
देहरी-द्वार सजाने
आए
तोरण रंगोली
jyoti-parv aayaa
manabhaawan
ghar-ghar deep jale
rajat huaa rajanee kaa
aangan
shyaamal gagan tale
thame-thame din pankh
lagaakar
phir gatimaan hue
haath bढ़aakar khushiyon
ne
oonche sopaan chue
nasht huaa kashton kaa
krandan
sukh ke sootr phale
huaa astagat tam anant
men
gam kaa megh chantaa
bhakti-bhaaw se maan
lakshmee kaa
sabane naam rataa
dekh kataaren kandeelon kee
andhiyaare dahale
deharee-dvaar sajaane
aae
toran rangolee
ज्योति-पर्व आया
मनभावन
घर-घर दीप जले।
रजत हुआ रजनी का
आँगन
श्यामल गगन तले।
थमे-थमे दिन पंख
लगाकर
फिर गतिमान हुए।
हाथ बढ़ाकर खुशियों
ने
ऊँचे सोपान छुए।
नष्ट हुआ कष्टों का
क्रंदन
सुख के सूत्र फले।
हुआ अस्तगत तम अनंत
में
गम का मेघ छंटा।
भक्ति-भाव से माँ
लक्ष्मी का
सबने नाम रटा।
देख कतारें कंदीलों की
अँधियारे दहले।
देहरी-द्वार सजाने
आए
तोरण रंगोली