कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११६ / १६४ № 116 of 164 रचना ११६ / १६४
८ नवम्बर २०१५ 8 November 2015 ८ नवम्बर २०१५

घर-घर दीप जले ghar-ghar deep jale घर-घर दीप जले

ज्योति-पर्व आया

मनभावन

॥

घर-घर दीप जले।

॥

रजत हुआ रजनी का

आँगन

॥

श्यामल गगन तले।

॥

थमे-थमे दिन पंख

लगाकर

॥

फिर गतिमान हुए।

॥

हाथ बढ़ाकर खुशियों

ने

॥

ऊँचे सोपान छुए।

॥

नष्ट हुआ कष्टों का

क्रंदन

॥

सुख के सूत्र फले।

॥

हुआ अस्तगत तम अनंत

में

॥

गम का मेघ छंटा।

॥

भक्ति-भाव से माँ

लक्ष्मी का

॥

सबने नाम रटा।

॥

देख कतारें कंदीलों की

॥

अँधियारे दहले।

॥

देहरी-द्वार सजाने

आए

॥

तोरण रंगोली

jyoti-parv aayaa

manabhaawan

·

ghar-ghar deep jale

·

rajat huaa rajanee kaa

aangan

·

shyaamal gagan tale

·

thame-thame din pankh

lagaakar

·

phir gatimaan hue

·

haath bढ़aakar khushiyon

ne

·

oonche sopaan chue

·

nasht huaa kashton kaa

krandan

·

sukh ke sootr phale

·

huaa astagat tam anant

men

·

gam kaa megh chantaa

·

bhakti-bhaaw se maan

lakshmee kaa

·

sabane naam rataa

·

dekh kataaren kandeelon kee

·

andhiyaare dahale

·

deharee-dvaar sajaane

aae

·

toran rangolee

ज्योति-पर्व आया

मनभावन

॥

घर-घर दीप जले।

॥

रजत हुआ रजनी का

आँगन

॥

श्यामल गगन तले।

॥

थमे-थमे दिन पंख

लगाकर

॥

फिर गतिमान हुए।

॥

हाथ बढ़ाकर खुशियों

ने

॥

ऊँचे सोपान छुए।

॥

नष्ट हुआ कष्टों का

क्रंदन

॥

सुख के सूत्र फले।

॥

हुआ अस्तगत तम अनंत

में

॥

गम का मेघ छंटा।

॥

भक्ति-भाव से माँ

लक्ष्मी का

॥

सबने नाम रटा।

॥

देख कतारें कंदीलों की

॥

अँधियारे दहले।

॥

देहरी-द्वार सजाने

आए

॥

तोरण रंगोली

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗