एक दीपक हम जलाएँ ek deepak ham jalaaen एक दीपक हम जलाएँ
भेद की बातें
भुलाकर
नेह की बाती सजाकर
जीव-जग हित
ज्योत्सना का
एक दीपक हम
जलाएँ।
तोड़ सच का कोट, लंका
जोड़ ली है झूठ ने।
हँस रहे पापी
अँधेरे
रब लगा है रूठने।
दुर्ग दुष्टों का
ढहाकर
जय दिशा में पग
बढ़ाकर
कर्म-साधित कामना
का
एक दीपक हम
जलाएँ।
पर्व पर दिखते नहीं
अब
फुलझड़ी के कहकहे।
लोलुपों के साथ बेबस
बम-पटाखे रह रहे।
द्वेष दुविधा को जलाकर
bhed kee baaten
bhulaakar
neh kee baatee sajaakar
jeew-jag hit
jyotsanaa kaa
ek deepak ham
jalaaen
tod sach kaa kot, lankaa
jod lee hai jhooth ne
hans rahe paapee
andhere
rab lagaa hai roothane
durg dushton kaa
dhahaakar
jay dishaa men pag
bढ़aakar
karm-saadhit kaamanaa
kaa
ek deepak ham
jalaaen
parv par dikhate naheen
ab
phulajhadee ke kahakahe
lolupon ke saath bebas
bam-pataakhe rah rahe
dvesh duwidhaa ko jalaakar
भेद की बातें
भुलाकर
नेह की बाती सजाकर
जीव-जग हित
ज्योत्सना का
एक दीपक हम
जलाएँ।
तोड़ सच का कोट, लंका
जोड़ ली है झूठ ने।
हँस रहे पापी
अँधेरे
रब लगा है रूठने।
दुर्ग दुष्टों का
ढहाकर
जय दिशा में पग
बढ़ाकर
कर्म-साधित कामना
का
एक दीपक हम
जलाएँ।
पर्व पर दिखते नहीं
अब
फुलझड़ी के कहकहे।
लोलुपों के साथ बेबस
बम-पटाखे रह रहे।
द्वेष दुविधा को जलाकर