कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११० / २०४ № 110 of 204 रचना ११० / २०४
१४ दिसम्बर २०१५ 14 December 2015 १४ दिसम्बर २०१५

जब कलम को थामती मेरी गजल है jab kalam ko thaamatee meree gajal hai जब कलम को थामती मेरी गजल है

जब

क़लम को थामती, मेरी गज़ल है।

खूब

कहना जानती, मेरी गज़ल है।

पूर

होता जब गले तक सब्र-सागर

तब

किनारा लाँघती, मेरी गज़ल है।

दीन-दुखियों, बेबसों का हाथ

गहकर

हक़

में उनके बोलती, मेरी गज़ल है।

अंधविश्वासों

की परतों को परे कर

रूढ़ियों

को रौंदती, मेरी गज़ल है।

नफ़रतों

की बाढ़ से बिफरी नदी पर

नेह

का पुल बाँधती, मेरी गज़ल है।

हौसले

हारे जनों के हिय जगाकर

दुख

के कंटक काटती, मेरी गज़ल है।

देशद्रोही, ठग लुटेरों की

हरिक नस

‘कल्पना’ पहचानती, मेरी गज़ल है।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jab

qalam ko thaamatee, meree gazal hai

·

khoob

kahanaa jaanatee, meree gazal hai

·

poor

hotaa jab gale tak sabr-saagar

·

tab

kinaaraa laanghatee, meree gazal hai

·

deen-dukhiyon, bebason kaa haath

gahakar

·

haq

men unake bolatee, meree gazal hai

·

andhawishvaason

kee paraton ko pare kar

·

rooढ़iyon

ko raundatee, meree gazal hai

·

nafaraton

kee baaढ़ se bipharee nadee par

·

neh

kaa pul baandhatee, meree gazal hai

·

hausale

haare janon ke hiy jagaakar

·

dukh

ke kantak kaatatee, meree gazal hai

·

deshadrohee, thag luteron kee

harik nas

·

‘kalpanaa’ pahachaanatee, meree gazal hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जब

क़लम को थामती, मेरी गज़ल है।

खूब

कहना जानती, मेरी गज़ल है।

पूर

होता जब गले तक सब्र-सागर

तब

किनारा लाँघती, मेरी गज़ल है।

दीन-दुखियों, बेबसों का हाथ

गहकर

हक़

में उनके बोलती, मेरी गज़ल है।

अंधविश्वासों

की परतों को परे कर

रूढ़ियों

को रौंदती, मेरी गज़ल है।

नफ़रतों

की बाढ़ से बिफरी नदी पर

नेह

का पुल बाँधती, मेरी गज़ल है।

हौसले

हारे जनों के हिय जगाकर

दुख

के कंटक काटती, मेरी गज़ल है।

देशद्रोही, ठग लुटेरों की

हरिक नस

‘कल्पना’ पहचानती, मेरी गज़ल है।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗