कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १११ / २०४ № 111 of 204 रचना १११ / २०४
१७ दिसम्बर २०१५ 17 December 2015 १७ दिसम्बर २०१५

नए साल में nae saal men नए साल में

खुशियों की नव-ज्योत जगाएँ, नए साल में।

उत्सव मिलकर आज मनाएँ, नए साल में।

कल खोया तो, अब पाने को, डटे रहें हम

भूल पुराना नव अपनाएँ, नए साल में।

काल न रोके कभी रुका, यह सत्य सनातन

साथ उसी के बढ़ते जाएँ, नए साल में।

पुनः जोश से हिम्मत का कर थाम निडर हो

अविजय को जय करके आएँ, नए साल में।

रात उजालों से हारी, हैं सदियाँ साक्षी

तमस काट नव-दीप जलाएँ, नए साल में।

धार इरादों की तीखी हो, प्रण हों पुख्ता

काँटों में भी राह बनाएँ, नए साल में।

शुभ कर्मों से हासिल कर सम्मान "कल्पना"

भारत माँ की शान बढ़ाएँ, नए साल में।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

khushiyon kee naw-jyot jagaaen, nae saal men

·

utsaw milakar aaj manaaen, nae saal men

·

kal khoyaa to, ab paane ko, date rahen ham

·

bhool puraanaa naw apanaaen, nae saal men

·

kaal n roke kabhee rukaa, yah saty sanaatan

·

saath usee ke bढ़te jaaen, nae saal men

·

punah josh se himmat kaa kar thaam nidar ho

·

awijay ko jay karake aaen, nae saal men

·

raat ujaalon se haaree, hain sadiyaan saakshee

·

tamas kaat naw-deep jalaaen, nae saal men

·

dhaar iraadon kee teekhee ho, pran hon pukhtaa

·

kaanton men bhee raah banaaen, nae saal men

·

shubh karmon se haasil kar sammaan "kalpanaa"

·

bhaarat maan kee shaan bढ़aaen, nae saal men

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुशियों की नव-ज्योत जगाएँ, नए साल में।

उत्सव मिलकर आज मनाएँ, नए साल में।

कल खोया तो, अब पाने को, डटे रहें हम

भूल पुराना नव अपनाएँ, नए साल में।

काल न रोके कभी रुका, यह सत्य सनातन

साथ उसी के बढ़ते जाएँ, नए साल में।

पुनः जोश से हिम्मत का कर थाम निडर हो

अविजय को जय करके आएँ, नए साल में।

रात उजालों से हारी, हैं सदियाँ साक्षी

तमस काट नव-दीप जलाएँ, नए साल में।

धार इरादों की तीखी हो, प्रण हों पुख्ता

काँटों में भी राह बनाएँ, नए साल में।

शुभ कर्मों से हासिल कर सम्मान "कल्पना"

भारत माँ की शान बढ़ाएँ, नए साल में।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗