कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११२ / २०५ № 112 of 205 रचना ११२ / २०५
१७ दिसम्बर २०१५ 17 December 2015 १७ दिसम्बर २०१५

नए साल में nae saal men नए साल में

खुशियों की नव-ज्योत जगाएँ, नए साल में।

॥

उत्सव मिलकर आज मनाएँ, नए साल में।

॥

कल खोया तो, अब पाने को, डटे रहें हम

॥

भूल पुराना नव अपनाएँ, नए साल में।

॥

काल न रोके कभी रुका, यह सत्य सनातन

॥

साथ उसी के बढ़ते जाएँ, नए साल में।

॥

पुनः जोश से हिम्मत का कर थाम निडर हो

॥

अविजय को जय करके आएँ, नए साल में।

॥

रात उजालों से हारी, हैं सदियाँ साक्षी

॥

तमस काट नव-दीप जलाएँ, नए साल में।

॥

धार इरादों की तीखी हो, प्रण हों पुख्ता

॥

काँटों में भी राह बनाएँ, नए साल में।

॥

शुभ कर्मों से हासिल कर सम्मान "कल्पना"

॥

भारत माँ की शान बढ़ाएँ, नए साल में।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

khushiyon kee naw-jyot jagaaen, nae saal men

·

utsaw milakar aaj manaaen, nae saal men

·

kal khoyaa to, ab paane ko, date rahen ham

·

bhool puraanaa naw apanaaen, nae saal men

·

kaal n roke kabhee rukaa, yah saty sanaatan

·

saath usee ke bढ़te jaaen, nae saal men

·

punah josh se himmat kaa kar thaam nidar ho

·

awijay ko jay karake aaen, nae saal men

·

raat ujaalon se haaree, hain sadiyaan saakshee

·

tamas kaat naw-deep jalaaen, nae saal men

·

dhaar iraadon kee teekhee ho, pran hon pukhtaa

·

kaanton men bhee raah banaaen, nae saal men

·

shubh karmon se haasil kar sammaan "kalpanaa"

·

bhaarat maan kee shaan bढ़aaen, nae saal men

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुशियों की नव-ज्योत जगाएँ, नए साल में।

॥

उत्सव मिलकर आज मनाएँ, नए साल में।

॥

कल खोया तो, अब पाने को, डटे रहें हम

॥

भूल पुराना नव अपनाएँ, नए साल में।

॥

काल न रोके कभी रुका, यह सत्य सनातन

॥

साथ उसी के बढ़ते जाएँ, नए साल में।

॥

पुनः जोश से हिम्मत का कर थाम निडर हो

॥

अविजय को जय करके आएँ, नए साल में।

॥

रात उजालों से हारी, हैं सदियाँ साक्षी

॥

तमस काट नव-दीप जलाएँ, नए साल में।

॥

धार इरादों की तीखी हो, प्रण हों पुख्ता

॥

काँटों में भी राह बनाएँ, नए साल में।

॥

शुभ कर्मों से हासिल कर सम्मान "कल्पना"

॥

भारत माँ की शान बढ़ाएँ, नए साल में।

॥

-कल्पना रामानी

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प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗