कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १२ / ११४ № 12 of 114 रचना १२ / ११४
२४ दिसम्बर २०१५ 24 December 2015 २४ दिसम्बर २०१५

जिसकी जूती, उसी का सिर jisakee jootee, usee kaa sir जिसकी जूती, उसी का सिर

नए साल की छूट है

मची माल में लूट है

एक खरीदो एक फ्री

थैले भर ले जाओ जी...

जब

शहरों के बाज़ार, माल दुकान आदि बिक्री केन्द्रों

पर छूट का हल्ला मचा हुआ हो, मनभावन, लोकलुभावन

सामग्री से समाचार पत्र अटे हुए हों, टीवी चेनल नारे लगा रहे हों तो

फिर महिलाओं में खरीदी की होड़ में दौड़ शुरू होना स्वाभाविक ही है।

लीना और

मीना शहर की एक मध्यमवर्गीय सोसाइटी

nae saal kee choot hai

machee maal men loot hai

ek khareedo ek phree

thaile bhar le jaao jee

jab

shaharon ke baazaar, maal dukaan aadi bikree kendron

par choot kaa hallaa machaa huaa ho, manabhaawan, lokalubhaawan

saamagree se samaachaar patr ate hue hon, teewee chenal naare lagaa rahe hon to

phir mahilaaon men khareedee kee hod men daud shuroo honaa svaabhaawik hee hai

leenaa aur

meenaa shahar kee ek madhyamawargeey sosaaitee

नए साल की छूट है

मची माल में लूट है

एक खरीदो एक फ्री

थैले भर ले जाओ जी...

जब

शहरों के बाज़ार, माल दुकान आदि बिक्री केन्द्रों

पर छूट का हल्ला मचा हुआ हो, मनभावन, लोकलुभावन

सामग्री से समाचार पत्र अटे हुए हों, टीवी चेनल नारे लगा रहे हों तो

फिर महिलाओं में खरीदी की होड़ में दौड़ शुरू होना स्वाभाविक ही है।

लीना और

मीना शहर की एक मध्यमवर्गीय सोसाइटी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗