अनोखा उपहार anokhaa upahaar अनोखा उपहार
“सुनो नीलू डियर, आज
शाम को माँ-पिताजी से मिलने चलना है, मैं जल्दी आऊँगा, तुम
तैयार रहना...”
कहते हुए आशीष दफ्तर के लिए निकल गया।
पति के जाते ही नीलिमा प्रसन्न-मन घर
के काम-काज जल्दी-जल्दी निपटाने लग गई। उसके कालेज की दो दिन छुट्टी थी। सोचा कि
वृद्धाश्रम से वापस आते समय मायके भी होती आएगी। मायका है तो इसी शहर में लेकिन
ससुर जी की बीमारी के कारण जाने का समय ही नहीं निकाल पाती थी। बड़ी
“suno neeloo diyar, aaj
shaam ko maan-pitaajee se milane chalanaa hai, main jaldee aaoongaa, tum
taiyaar rahanaa”
kahate hue aasheesh daphtar ke lie nikal gayaa
pati ke jaate hee neelimaa prasann-man ghar
ke kaam-kaaj jaldee-jaldee nipataane lag gaee usake kaalej kee do din chuttee thee sochaa ki
wriiddhaashram se waapas aate samay maayake bhee hotee aaegee maayakaa hai to isee shahar men lekin
sasur jee kee beemaaree ke kaaran jaane kaa samay hee naheen nikaal paatee thee badee
“सुनो नीलू डियर, आज
शाम को माँ-पिताजी से मिलने चलना है, मैं जल्दी आऊँगा, तुम
तैयार रहना...”
कहते हुए आशीष दफ्तर के लिए निकल गया।
पति के जाते ही नीलिमा प्रसन्न-मन घर
के काम-काज जल्दी-जल्दी निपटाने लग गई। उसके कालेज की दो दिन छुट्टी थी। सोचा कि
वृद्धाश्रम से वापस आते समय मायके भी होती आएगी। मायका है तो इसी शहर में लेकिन
ससुर जी की बीमारी के कारण जाने का समय ही नहीं निकाल पाती थी। बड़ी